बारिश का वो दिन: गर्ल फ्रेंड की चुदाई-1

(Barish Ka Wo Din: Girl Friend Ki Chudai-1)

मेरे कमरे से कुछ दूर एक लड़की रहती थी, उसे मैंने पटा लिया था. एक दिन बारिश हो रही थी, मेरी गर्ल फ्रेंड मेरे कमरे के सामने से निकली, वो भीगी हुई थी. मैंने उसे अंदर बुला कर उस की चुदाई की. मेरी सेक्सी कहानी पढ़ कर मजा लें!

मेरा नाम राहुल है, मैं धनबाद झारखण्ड का रहने वाला हूँ।
पिछले कुछ सालों से मैं HotSexStory.xyz कहानियों से बहुत मज़े करता आ रहा हूँ और मैंने कहानियाँ बहुत पढ़ी और लिखी भी… आपने मेरी कहानियों को काफी सराहा।

उस समय मैं एक प्राइवेट ट्रेनिंग ले रहा था और हमारे उस स्कूल जिसमें मैं पढ़ता था, उसमें हम सभी लड़के लड़कियाँ एक ही साथ ट्रेनिंग करते थे. लड़कों के लिए वहीं पास में एक हॉस्टल था लेकिन मैं बाहर ही एक कमरा लेकर रहता और अपनी पढ़ाई किया करता था. मेरे दिन बहुत अच्छी तरह से निकल रहे थे, मैं बहुत खुश था।

मेरे कमरे से कुछ दूर एक लड़की सुषमा रहती थी, वो मेरे कमरे के सामने से निकलती थी, उसे मैंने पटा लिया था.
सुषमा मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त थी, वो दिखने में बहुत सुंदर, गोरी होने के साथ साथ उसका वो गरम जिस्म मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित किया करता था और हमारे बीच बहुत प्यार था, जिसकी वजह से हम बिल्कुल पागल हो चुके थे। हमें एक दूसरे से बिना मिले, देखे, बात किए बिल्कुल भी चैन नहीं मिलता और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत हंसी, मजाक किया करते थे जिसकी वजह से हमारे बीच की दूरियाँ एकदम खत्म हो चुकी थी, हम दोनों ने सेक्स को छोड़ कर बाकी बहुत सारे काम पहले से ही करके मज़े ले लिए थे और अब हम दोनों बहुत समय से किसी अच्छे मौके के इंतज़ार में थे, जिसका फायदा उठा कर हम दोनों अपने मन की इस इच्छा को भी एक बार पूरा कर लें।

एक शाम को अचानक बहुत तेज बारिश होने लगी थी, जिसकी वजह से मेरे पड़ोसी सभी आसपास के लोग अपने अपने घरों में बंद थे और मेरी गर्लफ्रेंड कहीं गई हुई है, क्योंकि वो मेरे ही सामने से निकली थी इसलिए में अपने कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला रखकर में उसी की राह देख रहा था। दोस्तो, आज मेरा उसकी चुदाई करने का पूरा पूरा विचार था। मैं इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था, मैं बैठा उसका आने का इंतजार करते हुए उसकी चढ़ती हुई जवानी के बारे में सोच सोच कर पागल हुआ जा रहा था। मेरे बदन में अजीब सा कुछ होने लगा था और मेरा लंड भी अब तन कर खड़ा होने लगा था।
तभी अचानक वो मुझे मेरे सामने से आती हुई नजर आई, मैंने अपने दरवाजे को थोड़ा सा ज्यादा खोल दिया और जब वो मेरे एकदम पास आ गई, मैंने उससे कहा- तुम अंदर ही आ जाओ, इस इतनी तेज बारिश में कहाँ जाओगी? जब पानी रुक जाए तब तुम चली जाना, हम बैठ कर कुछ देर बातें करते है, आओ ना अंदर!
मैंने देखा कि वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.

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उसको भी मेरे साथ रहना, बातें करना अच्छा लगता था, वो बिना कुछ कहे कमरे के अंदर आ गई। उसके अंदर आते ही में बहुत खुश हो चुका था, क्योंकि आज मेरे मन की मुराद पूरी होने वाली थी और अब उसकी चुदाई का काम खत्म करके अपने मन की इस बहुत पुरानी इच्छा को पूरा करना चाहता था।

सुषमा अंदर आकर अपने बदन से पानी को साफ करने लगी, उसका वो पूरा गीला बदन जिसके ऊपर उसके कपड़े एकदम चिपके हुए थे, जिसकी वजह से मेरे सामने उसका एक एक अंग साफ साफ झलक रहा था. उसको इस हालत में देख कर मुझे ऐसा लगने लगा था जैसे वो मेरे सामने नंगी खड़ी हो क्योंकि गीले कपड़ो से मुझे उसका गोरा पेट, दोनों गोलमटोल बूब्स के ऊपर बंधी ब्रा, बड़े आकार के गले वाले सूट से उसके वो गोरे गोरे बूब्स उभरे हुए मुझे बहुत ही ललचा रहे थे और उसकी वो सलवार भी जांघों के अंदर तक जकड़ फंसी हुई थी।

वाह उसने क्या कयामत की जवानी पाई थी… उसके वो बड़े आकार के एकदम टाइट बूब्स, पतली कमर और वाह उसकी वो बड़ी गोल गांड… हाय देखकर ही मुझे मज़ा आ गया और मैं उसको घूर घूरकर देखने लगा। मेरे सब्र का बाँध टूट सा गया, मैंने हिम्मत करके बिना देर किए उसको पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने खड़े लंड से मैं उसकी गांड पर ज़ोर लगाने लगा, पहले मैं उसकी कमर और अब उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने, सहलाने लगा था और मेरा वो लंड एकदम तन कर उसके दोनों कूल्हों के बीच में सेट होकर ठीक जगह पर अंदर घुस गया और जोश में फनफनाने लगा।
मेरा मन करने लगा कि मैं उसी समय अपना लंड उसकी गांड के अंदर डाल दूँ… जोश की वजह से मेरे दिमाग़ में बिजली सी दौड़ने लगी थी और मेरा पूरा बदन काँप रहा था।

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सुषमा भी जैसे पहले से ही मेरे साथ यह सब करने के लिए तैयार थी इसलिए अब तो हम दोनों का वो खेल शुरू हो गया, जिसके लिए हम दोनों इतने लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे। मैं धीरे धीरे उसके गीले कपड़े एक एक करके उतारने लगा, कुछ ही सेकिंड बाद उसका वो गोरा, कामुक बदन मेरी आंखों के सामने बिना कपड़ों के एकदम नंगा मुझे अपनी तरफ आकर्षित करके ललचाने लगा था क्योंकि मैंने पहली बार उसको अपने सामने पूरी नंगी देखा था, वो मेरे जीवन का सबसे अलग दिन था, जिसके बारे में सोचकर आज भी रोमांच से भर जाता हूँ और मेरे पूरे शरीर का रोम रोम खड़ा हो जाता है।

फिर उसके गीले, चिकने बदन तो चूमते हुए मैं उसकी चूत की तरफ आगे बढ़ने लगा था और जैसे ही मैंने उसकी एकदम चिकनी उठी हुई चूत पर अपने होंठ रख कर चूमना शुरू किया तो सुषमा उस मस्ती, जोश की वजह से तड़प उठी और उसी समय सुषमा ने मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को आगे किया और वो अब अपनी चूत को मेरी नाक पर रगड़ने लगी थी। उस समय उसने सारी हदें तोड़ दी और मैं उसका वो जोश देख कर चकित था।

मैंने भी उसके दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसकी गांड को सहलाते हुए उसकी रस भरी चूत को चूमने, चूसने लगा, सुषमा की कामुक, गीली चूत की प्यारी खुशबू मेरे दिमाग़ में छाने लगी, मैं पागलों की तरह उसकी चूत और उसके आस पास के हिस्से को चूमने लगा, साथ ही बीच बीच में उसकी चिकनी गदराई हुई जांघों को भी चाट लेता।

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फिर वो मस्ती से भर कर सिसकारियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी- आह्ह्ह राजा ऊह्ह्ह्ह… प्लीज तुम इसके अंदर अपनी जीभ डाल कर चाटो।
अब तक उसकी नशीली चूत की उस मादक खुशबू ने मुझे बुरी तरह से पागल बना दिया था, मैंने उसकी चूत से अपने मुँह को उठाए बिना ही उसको खींच कर पलंग पर बैठा दिया और मैं खुद नीचे जमीन पर बैठ गया।
फिर मैंने उसकी दोनों जाँघों को पूरा फैला कर अपने दोनों कंधों पर रख लिया और फिर आगे बढ़ कर उसकी चूत के होंठों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

सुषमा मस्ती में आकर पागलों की तरह ना जाने क्या क्या बड़बड़ाने लगी थी और उसने अपने कूल्हों को आगे पीछे करके अपनी चूत को मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया था। अब उसके कूल्हे पलंग से बाहर आकर हवा में झूला झूल रहे थे और उसकी मखमली, मुलायम जांघों को पूरा दबाव मेरे दोनों कंधों पर था. मैंने अपनी जीभ पूरी उसकी चूत में डाल दी और मैं चूत के दाने को टटोलने के साथ साथ चूत के अंदर के हिस्से को भी सहलाने लगा।

सुषमा अब बहुत मस्ती में आकर तिलमिला उठी, वो अपने कूल्हों को ऊपर उठा उठा कर अपनी चूत को मेरे मुख पर दबाने लगी और सिसकारियाँ लेते हुए कहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरे राजा तुम यह क्या कर रहे हो? मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, तुम अब अपनी जीभ को अंदर बाहर करो ना! आह्ह्ह्ह हाँ… ऐसे ही चोदो मेरे राजा… ऊफ्फ्फ चोदो ऊईई, तुम अपनी जीभ से चोदो मुझे मेरी जान… आज मैं अब अपनी सारी कसर निकालूंगी, पिछले एक साल से यह सब करने के लिए बहुत तरस रही थी… हाँ मेरे राजा, चोदो तुम आज मेरी चूत को अपनी जीभ से!

 

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