दोस्त की भाभी के साथ दीवाली मनाई-1

Bhabhi ke saath diwali manai-1

हैल्लो दोस्तों, में भी आप लोगों की तरह बहुत लंबे समय से सेक्सी कहानियाँ पढ़कर इनके मज़े लेता हूँ. मुझे ऐसा करने में बहुत ख़ुशी होती है और मैंने अब तक आप लोगों के भेजे हुए बहुत सारे सेक्स अनुभव को पढ़ा है और वो मुझे अच्छे भी लगे.

दोस्तो वैसा ही मेरा भी एक सच्चा सेक्स अनुभव है, जिसको में आज आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ और जिसमें मैंने अपने एक दोस्त की हॉट सेक्सी भाभी को चोदकर पूरी तरह से संतुष्ट किया. दोस्तों सच पूछो तो मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आया और अब में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आप लोगों को जरुर पसंद आएगी और अब में आप सभी को अपना परिचय भी करवा देता हूँ. मेरा नाम अमर है और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 23 साल और में एकदम गोरा दिखने में ठीक ठाक हूँ. मेरी हाईट 5.10 और में एक पढ़ा लिखा लड़का हूँ.

दोस्तों अब में आप लोगों को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधे अपनी सच्ची घटना पर आता हूँ. दोस्तों मैंने अभी अभी अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और उसके बाद में अपने घर पर बोर होने लगा था और इसलिए मैंने यह बात अपने एक बहुत अच्छे दोस्त को बता दी कि में बहुत बोर हो रहा हूँ. उसने मुझे उसके घर पर कुछ दिन रहने के लिए बुला लिया था. मैंने बहुत सोचकर अपने पापा से उसके घर पर चले जाने की इजाजत ले ली, लेकिन मुझे बहुत मुश्किल से उसके घर पर जाने की इजाजत मिली और में अगले दिन ही अपना बेग पैक करके मेरे दोस्त के यहाँ पर रहने के लिए चला गया, जो कि बेंगलोर में रहा करता था.

दोस्तों में सबसे पहले अपने दोस्त के परिवार के बारे में आप सभी को थोड़ा विस्तार से बता देता हूँ. उसके बाद अपनी कहानी सुनाऊंगा. मेरे दोस्त का नाम शेखर है, जो कि मेरे साथ इंजिनियरिंग कॉलेज में पढ़ता था और उसके घर में उसकी माँ जो कि 39 साल की है, एक बड़े भाई जिनकी उम्र 28 साल की है, उसकी भाभी जो कि 25 साल की है, उसकी बहन जो कि 20 साल की है.

फिर में उसके अगले दिन अपने दोस्त के घर पर पहुंच गया और मैंने अचानक से पहुंचकर उसको चकित कर दिया और मेरा दोस्त मुझे देखकर बहुत ख़ुश हो गया और उसने मुझे अपने गले से लगा लिया. फिर हम लोग अंदर चले गये और उसकी माँ ने भी मुझे अपने गले से लगा लिया, उफफफफ्फ़ वाह क्या स्पर्श था? उसकी माँ के बूब्स के उनके बूब्स 38 साईज़ के थे और उनके चूतड़ भी बहुत बड़े आकार के थे.

यह सब देखकर महसूस करके मेरा लंड बड़ा हो गया. फिर में उसके बड़े भाई जो कि एक सॉफ्टवेर इंजिनियर थे, उनका नाम राकेश था उनसे मिला और फिर में अपने दोस्त की भाभी से मिला, जिसको मैंने पहली बार देखते ही उसकी चुदाई के सपने देख लिए थे. में मन ही मन उसको देखकर सोचने लगा था कि मुझे कैसे भी करके इस सेक्सी माल को अपने लंड से चोदकर मस्त करना है यह बात सोचने लगा.

दोस्तों वैसे उनका नाम करिश्मा था, उनको देखकर मेरी आखें फटी की फटी रह गई. मेरी नजर उनके सुंदर गोरे चेहरे और गदराए बदन से हटने को तैयार ही नहीं थी, लेकिन फिर मुझे हटानी पड़ी. उन्होंने एक गुलाबी कलर की मेक्सी पहनी हुई थी और उनके वो खुले बाल और उनका वो 36-26-36 आकार का मस्त फिगर मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था. फिर में अपने दोस्त की बहन से मिला, जिसका नाम सविता था और घर में सभी लोगों का मुझसे परिचय होने के बाद में आराम करने चला लगा और फिर में अपने दोस्त की माँ के बूब्स को सोच सोचकर मुठ मारने लगा.

उसके बाद में बेड पर लेट गया और उतने में मेरा दोस्त मेरे पास आकर मुझसे कहता है कि कल दीवाली है और मुझे कुछ पटाखे लेने जाना है, इसलिए तू आराम कर और में लेकर आता हूँ, वो मुझसे यह बात बोलकर चला गया और फिर में शॉर्ट्स पहनकर अपने लंड को हाथ में लेकर हिला रहा था. तभी उतने में अचानक से भाभी रूम में आ गई, उनके हाथ में गरम कॉफी थी और उन्होंने मेरा लंड देख लिया था जो कि अब तक तनकर खड़ा हुआ था, क्योंकि वो अचानक से आई और में उस समय बहुत गरम था. मेरा लंड पूरा का पूरा खड़ा हुआ था और वो मेरे हाथ में था. फिर उसे देखकर उनकी आँख फटी की फटी रह गई और उसने मुझसे कहा.

भाभी : मुझे माफ़ करना में आपके लिए कॉफी लेकर आई हूँ आप पी लीजिए और इतना कहकर वो घूम गई.

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में : आप मुझे माफ़ करना भाभी, मैंने यह बोलकर अपनी नज़रो को नीचे झुका लिया.

भाभी : कोई बात नहीं है, इस उम्र में यह सब होता है.

दोस्तों मुझसे यह बात कहकर वो मुझे एक शरारती स्माईल देकर चली गयी और में उन्हें घूर घूरकर देखता ही रहा.

दोस्तों में कॉफी पीकर अब भाभी के बारे में सोचने लगा था कि में कैसे भाभी को पटाकर चोदूँगा? और मैंने फिर से भाभी के नाम की मुठ मारी और अपने लंड को शांत किया, जो उनको सोच सोचकर फनफना रहा था और फिर दोपहर के खाने का टाईम हो गया तो हम सभी लोग एक साथ एक ही टेबल पर बैठकर खाना खा रहे थे.

तभी राकेश भैया ने कहा कि कल रात उनको ऑफिस के काम से अचानक बाहर जाना है. दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश हो गया था और फिर में सोचने लगा कि अब तो में कैसे भी करके भाभी की चुदाई करके ही रहूँगा और फिर हम सबने खाना खत्म किया और सब अपने अपने काम में व्यस्त हो गए और में सारा दिन और रात को भाभी को कैसे चोदा जाए यह बात सोचकर उनकी चुदाई प्लान बनाने लगा था और रात को में एक बार फिर से भाभी के नाम की मुठ मारकर सो गया.

यह कहानी कुल तीन भागो में है, आगे की कहानी अगले भाग में-

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