भाभी को दो बच्चों की माँ बनाया-2

Bhabhi ko do bacho ki maa banaya-2

फिर कुछ देर हम चुप रहे और बाहर कोहरा बहुत हो गया था जिसकी वजह से अब मुझे रोड बड़ी मुश्किल से दिखाई दे रहा था और हम अभी पानीपत भी नहीं पहुंचे थे और कोहरे के कारण मुझे अपनी गाड़ी की स्पीड भी थोड़ी कम करनी पड़ी. तभी अचानक हमारे साथ से एक गाड़ी थोड़ी तेज़ स्पीड में निकली और हमने उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन उसी टाइम वो गाड़ी चलते चलते एकदम से उसके आगे चल रही गाड़ी से जा टकराई और यह देखकर मैंने अपनी गाड़ी को वहीं पर रोक लिया.

रवीना : यह क्या हुआ?

में : शायद ज़्यादा कोहरे की वजह से सामने वाली गाड़ी में ठुक गई होगी.

रवीना : क्यों ऐसे तो हमारा भी आक्सिडेंट हो सकता है?

में : डर तो मुझे भी इसी बात का है हम एक बार पानीपत पहुंचकर फिर देखते है अगर कोहरा कम हुआ तो आगे चलेंगे, नहीं तो पानीपत किसी होटेल में रुक जाएँगे?

रवीना : क्या होटेल में वो भी एक पराए मर्द के साथ?

में : अरे यार अब आप बच्चों जैसी बातें कर रही हो और क्या में अभी भी पराया मर्द हूँ?

रवीना : और नहीं तो क्या, मर्द तो पराए ही हो.

में : हाँ ठीक है, अच्छा जी.

रवीना : में तो बस तुमसे मजाक कर रही थी.

में : हाँ यह हुई ना बात, अब चलें नहीं तो सब होटल बंद हो जाएँगे और हमे इस कार में ही रात गुज़ारनी पड़ेगी.

रवीना : ठीक है चलो ऐसा ही करेंगे, वैसे भी समय भी ज़्यादा हो गया है 10:30 हो गए है.

में : ठीक है जी, चलो चलते है.

मैंने फिर 20-30 की स्पीड पर गाड़ी चलानी शुरू कर दी. हम लगभग 30 मिनट में पानीपत पहुंचे और तब तक मेरे लंड का उसके बूब्स को देख देखकर बहुत बुरा हाल हो गया था और अब उसने चैन को बिल्कुल नीचे कर लिया था और मुझे बिल्कुल मस्त नजारा मिल रहा था और शायद उसने भी मेरी इस बात पर गौर किया, क्योंकि वो मेरा खड़ा लंड कई बार देख देखकर दूसरी तरफ मुहं करके मुस्कुरा रही थी.

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में : ओह धन्यवाद भगवान, हम पानीपत तो पहुंच गए और यहाँ पर शहर में कोहरा बहुत कम है.

रवीना : ओह मुझे तो बहुत नींद आने लगी है जल्दी से चलो कोई ठीक ठाक सा होटल ढूँढ लो और फिर हम वहां पर चलकर आराम करते है.

में : हाँ ठीक है.

फिर मैंने एक होटल में अपनी गाड़ी को मोड़ लिया और पार्किंग में खड़ा कर दिया. मैंने कहा कि फिर हमे दो कमरे लेने पड़ेंगे ना.

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रवीना : अरे नहीं नहीं, दो नहीं एक ही ले लेंगे, तुम्हारा पेट्रोल का खर्चा भी तो हो रहा है और रूम का किराया में दे दूंगी और में नहीं चाहती कि तुम्हारा कोई खर्चा हो.

में : हाँ, लेकिन सोच लो एक पराए मर्द के साथ रात गुज़ारनी पड़ेगी और वो भी एक रूम में. फिर में हंसने लगा और मेरे साथ वो भी हंसी और अब हम होटल के अंदर पहुंचे और एक कमरा बुक किया और वहीं पर उन्हें हमारे खाने को कमरे में पहुंचाने के लिए कहा. हम रूम में पहुंचे और वो फ्रेश होने चली गई और जब वापस आई तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि उसने अपनी ब्रा और पेंटी को उतार दिया और उसने सिर्फ़ वो पतला सा सलवार सूट पहना हुआ था, जिसकी वजह से उसके निप्पल उसके बिल्कुल टाईट सूट में बिल्कुल साफ चमक रहे थे, जिनको देखकर मेरे लंड की अब और भी ज्यादा हालत खराब थी.

रवीना : जाओ तुम भी फ्रेश हो जाओ तब तक खाना आ ज़ाएगा.

में : हाँ, में भी वहीं सोच रहा हूँ.

फिर जब में बेड से उठा तो रवीना मेरे सामने वहीं पर मुझसे 7/8 फीट की दूरी पर खड़ी थी और जैसे ही में उठा तो मेरा लंड बिल्कुल सीधा उसकी तरफ निशाना साधे खड़ा हुए था और लंड को देखकर वो हल्की सी मुस्कुराई और में एकदम से बाथरूम में चला गया और फिर उफ़फ्फ़ उसकी ब्रा, पेंटी वहीं पर लटकी हुई थी.

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मैंने उसकी ब्रा, पेंटी को सूँघा और पता नहीं कब मेरा हाथ लंड पर चला गया और मैंने उसकी पेंटी को सूंघते सूंघते मुठ मारना शुरू कर दिया और जब मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला था तभी रवीना की आवाज़ आई खाना आ गया है, जल्दी से बाहर आ जाओ मुझे बहुत भूख लगी है और में अब ज्यादा इतंजार नहीं कर सकती. फिर में तभी रुक गया और दो मिनट में मुहं हाथ धोकर बाहर आ गया और अब में भी अपना अंडरवियर वहीं पर छोड़ आया और सिर्फ़ लोवर पहनकर बाहर आ गया और मेरे बाहर आते ही.

रवीना : क्या बात है अंदर ऐसा क्या कर रहे थे? ज़्यादा गरम तो नहीं हो गए थे और फिर हंसने लगी.

में : ना ना नहीं, कुछ नहीं बस पानी गरम नहीं था और इसलिए बाहर आने में थोड़ा समय लग गया.

दोस्तों लेकिन वो बहुत समझदार थी, वो अब तक सब कुछ समझ चुकी थी और वो दोबारा मुझे देखकर मुस्कुराने लगी तो उसने मुझसे कहा.

रवीना : अच्छा चलो आ जाओ खाना खाते है.

में : अरे आप तो खा लेते जब आपको भूख लगी थी तो.

रवीना : अरे यार में हर रोज़ ही अकेली खाती हूँ किसी के साथ खाने का मौका कभी कभी मिलता है.

में : हाँ ठीक है.

फिर में भी अब बेड पर बैठ गया और हम दोनों ने एक एक रज़ाई ओढ़ ली और आमने सामने बैठकर खाने लगे. में तो खाना खाते खाते भी में उसको देख रहा था उसके बूब्स बड़े ही मुलायम आकर्षक दिख रहे थे और बहुत बड़े भी थे और मेरा लंड तो बस उसके रसीले गुलाबी होठों को छूने को तरस रहा था और में उसके बूब्स को देखते हुए उन्हे चूसने की बात सोच रहा था कि तभी वो बोली कि इनको देखने से तुम्हारा पेट नहीं भरेगा पहले आराम से खाना खा लो.

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दोस्तों में उसके बूब्स में इतना खोया हुआ था कि मैंने तुरंत कह दिया कि अगर देखने से पेट नहीं भरेगा तो एक बार चूसने दो. इनका दूध पीकर मेरा पेट भर जाएगा. फिर मेरे मुहं से यह बात सुनते ही उसने मेरी तरफ बहुत गुस्से से देखा और खड़ी होकर वॉशरूम में चली गई और में अब और कुछ बोल ही नहीं पाया, लेकिन मुझे लगा कि यह तो अंदर जाकर शायद रोने लगी होगी. तभी वो कुल्ला करके वापस आ गई और मुझे गुस्से से देखते हुए ही बोली कि जल्दी से खाना खाओ मुझे अब सोना है और में भी चुपचाप बीच में ही खाना ऐसे ही छोड़कर उठ गया.

रवीना : अरे खाना तो पूरा खाओ, ऐसे नहीं उठते.

फिर मैंने उसके कहने पर एक और रोटी खाई और फिर से उठ गया और बर्तन टेबल पर रख दिए और कुल्ला करके वापस आ गया. फिर मैंने देखा कि वो बिस्तर में नहीं थी और जैसे ही में पीछे मुड़ा तो वो बिल्कुल मेरे सामने खड़ी हुई थी और मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली कि अभी क्या कह रहा था चूसने दो? और फिर वो मेरे बाल पकड़ खींचने लगी और फिर बोली कि चूसेगा क्या इनको, बोल ना अब क्या हुआ? मैंने बोला नहीं नहीं आप तो बुरा मान गई, मेरा यह मतलब नहीं था.

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