बुआ की प्यारी लड़की की चूत मारी-1

Bua ki pyari ladki ki choot mari-1

हैल्लो दोस्तों, में राहुल में लुधियाना का रहने वाला हूँ और में  सेक्सी कहानियाँ पिछले 4-5 सालों से पढ़ता आ रहा हूँ और एक दिन ऐसे ही कहानियाँ पढ़ते हुए मैंने अपनी भी एक सच्ची घटना को आप लोगों तक पहुँचाने के बारे में विचार किया, जिसमें मैंने अपनी बुआ की लड़की को चोदकर उसकी चूत के बहुत मज़े लिए. पहले तो उसने मेरे साथ यह सब करने से साफ मना किया और मुझे नखरा दिखाने लगी, लेकिन बाद में मैंने उसको अपनी बातों में फंसाकर अपनी तरह पूरी तरह से आकर्षित कर लिया.

उसके बाद उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और मुझे अपनी चुदाई के वो मज़े दिए, जिसको में आज भी भुला ना सका और वो दिन मुझे आज भी बहुत अच्छी तरह से याद है. दोस्तों यह मेरी आज पहली कहानी है, लेकिन फिर भी में उम्मीद करता हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी, क्योंकि हम दोनों ने बहुत मन लगाकर उस दिन चुदाई की और बहुत मज़े लिए.

दोस्तों यह बात करीब 4 साल पहले की है. तब मैंने अपने कॉलेज के एग्जाम दिए थे और एग्जाम देने के बाद में बिल्कुल फ्री था और वो जून का महिना था तो उस समय सभी स्कूल्स में भी छुट्टियाँ होती है. दोस्तों मेरी बुआ जिनकी एक लड़की है, जिसका नाम शालू है, उसकी भी उस समय छुट्टियाँ चल रही थी, इसलिए वो अपनी छुट्टियाँ बिताने हमारे घर पर आई हुई थी. दोस्तों उस समय उसका शरीर बहुत ज्यादा बढ़कर उभर चुका था और उसके बदन को देखकर नहीं लगता था कि वो इतनी कम उम्र की है और वो तब तक पूरी तरह से जवान हो चुकी थी.

उसके बूब्स का आकार उस समय 32-26-34 था और उसका वो गोरा रंग जिसको देखते ही हर किसी का उसके बूब्स को दबाने को मन करता और उसकी उस पतली सी कमर पर वो बड़े बड़े बूब्स हो तो आप खुद ही सोच सकते हो कि उन्हें दबाने का कितना मन करता होगा, क्योंकि वो अपने चेहरे से लेकर पैरों तक एकदम परी की तरह सुंदर थी, जिसको देखकर किसी भी देखने वाले का मन उसकी तरफ ललचाने लगे और कोई भी उसकी चुदाई के लिए कभी भी मना नहीं कर सकता और मेरे साथ भी दोस्तों कुछ ऐसा ही हुआ और मैंने उसकी कुंवारी छोटी आकार की चूत के मज़े लिए.

अब सीधे कहानी पर आते है. दोस्तों जैसा कि आप लोग जानते ही है कि पंजाब में जून के महीने में कितनी गर्मी पड़ती है और दोपहर को करीब करीब सभी लोग आराम करते है और उस भरी गरमी में बाहर निकलना सभी का बहुत मुश्किल क्या नामुमकिन रहता है, इसलिए हम सब लोग भी दोपहर के समय एक बेड पर कूलर को चलाकर उसके आगे सो जाते है. दोस्तों उस दिन हम 4-5 लोग एक साथ सो रहे थे और शालू भी उस समय हमारे साथ ही सो रही थी और उस समय शालू कूलर की तरफ अपना मुहं करके सो रही थी और मेरे पैर कूलर की तरफ थे और वो भी उस समय मेरे साथ ही लेटी हुई थी.

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तभी थोड़ी देर के बाद मेरे पैर पर मुझे कुछ मुलायम मुलायम सा महसूस हुआ, जिसको छूकर मुझे बहुत अजीब सा महसूस हुआ और बहुत सोचने विचार करने के बाद दोस्तों में अब पूरी तरह से समझ चुका था कि वो शालू के बूब्स थे, पहले तो मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया कि में अब क्या करूं, लेकिन कुछ भी कहो दोस्तों मुझे उसके बूब्स को छूने में बहुत मजा आ रहा था, वो सब में आप लोगों को किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता और मेरे पैर उसके मुलायम बूब्स पर छुते ही मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था, इसलिए अब मेरे शैतानी दिमाग में शरारत सूझने लगी और फिर मैंने भी जानबूझ कर अपने पैर से ही उसके बूब्स को दबाना, सहलाना शुरू कर दिया. मैंने ऐसा बहुत देर तक किया, लेकिन उसकी तरफ से कोई भी विरोध नहीं हुआ, क्योंकि वो इन सभी बातों से बिल्कुल अंजान होकर गहरी नींद में सो रही थी.

दोस्तों उस दिन के बाद से में हर रोज यह मौका ढूंढने लगा था कि कैसे में उसको छूकर महसूस करूं? और अब में हर दोपहर को जानबूझ कर सबसे आखरी में सोने के लिए आता और उसके पास ही जाकर जगह बनाकर सो जाता था, लेकिन अब पैर से उसके बूब्स दबाने से आगे मेरी हिम्मत आगे नहीं बढ़ रही थी, इसलिए में थोड़ा डरता हुआ यह काम करके खुश होने लगा था. एक दिन रात को अचानक से लाईट चली गई तब घर में इनवरटर भी नहीं था, इसलिए में ऊपर छत पर चला गया.

थोड़ी देर बाद शालू भी छत पर आ गई और मैंने छत पर ही अपने सोने के लिए एक चादर बिछाई हुई थी तो वो भी उस चादर पर मेरे पास आकर लेट गई और आते ही कुछ देर में वो गहरी नींद में सो गई. दोस्तों एक तो ज्यादा गरमी की वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी, उसके ऊपर से शालू अब मेरे साथ सो रही थी, इसलिए अब मेरी नींद बिल्कुल ही उड़ गई और उस समय वहां पर हम दोनों के अलावा कोई भी नहीं था और मैंने उस बात का धीरे धीरे फायदा उठाना शुरू किया.

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दोस्तों शालू उस समय मेरे सीधी तरफ सो रही थी और फिर मैंने थोड़ी देर बाद अपनी करवट बदली और मैंने अपने एक हाथ को उसके पेट पर रख दिया और कुछ देर बाद उसकी तरफ से कोई भी हलचल ना देखकर धीरे धीरे मैंने अपने हाथ को ऊपर की तरफ बढ़ाया और उसके गरम बूब्स पर रख दिया. वाह दोस्तों क्या मस्त मुलायम मुलायम बूब्स थे उसके, में अब बहुत जोश में आ रहा था और साथ में हल्के हल्के दबा भी रहा था और अब मेरी यह बात सोचकर गांड भी फट रही थी कि अगर वो जाग गई तो में क्या करूंगा, लेकिन उसकी तरफ से कोई हलचल नहीं थी. अब में थोड़ा सा फ्री होकर उसके बूब्स को दबा रहा था, उसका जब बहुत देर किसी भी तरह का कोई विरोध नहीं हुआ.

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तब मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके सूट के अंदर डाल दिया और अब मेरा हाथ सीधा उसकी ब्रा तक चला गया और मैंने छूकर महसूस किया कि उसकी ब्रा भी बूब्स की तरह बहुत मुलायम थी, में बहुत देर तक उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने सहलाने लगा, लेकिन अब भी उसकी तरफ से कोई हलचल नहीं थी, जिसकी वजह से मेरी हिम्मत अब ज्यादा बढ़ गई. फिर मैंने अपने हाथ को उसकी ब्रा के नीचे से उसके बूब्स पर रख दिया, में उसके छोटे छोटे निप्पल को छूने लगा था और मुझे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था और अब तक मेरा लंड बिल्कुल सख्त हो चुका था और मेरा दिल कर रहा था कि में अभी उसकी सलवार को खोलकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दूँ, लेकिन ऐसा करना उस समय मुमकिन नहीं था. फिर में अपने होंठो को उसकी गर्दन के पास ले गया और मैंने उसको गर्दन पर किस किया.

फिर मैंने हिम्मत करके उसको थोड़ा सा ज़ोर लगाकर अपनी तरफ घुमा लिया और अपने होंठ को उसके गुलाबी नरम होंठो पर रख दिए. अब मेरा एक हाथ उसके सर के ठीक नीचे था और दूसरा हाथ उसकी कमर पर था कुछ देर बाद मैंने दूसरे हाथ को उसकी उभरी हुई गांड पर रख दिया और महसूस किया कि उसकी गांड बहुत ही मुलायम थी. अब मैंने पीछे की तरफ से ही उसकी सलवार में अपना एक हाथ डाल दिया और अब मैंने उसकी गांड को सहलाना हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था, लेकिन दोस्तों मेरे इतना सब कुछ करने के बाद भी शालू बिल्कुल भी नहीं हिली थी और अब में समझ चुका था कि वो नींद में होने का नाटक कर रही है.

फिर कुछ देर बाद मैंने पीछे से हाथ को निकालकर आगे से उसकी चूत पर रख दिया, उसकी चूत बहुत गरम हो रही थी और जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया. तभी अचानक से उसने मेरे हाथ को अपने दोनों पैरों के बीच में ज़ोर से दबा लिया था, शायद उसे भी अब बहुत मजा आ रहा था और चूत पर मेरा हाथ छूने की वजह से वो अब ज़्यादा ही जोश में आ गई थी, लेकिन तब भी उसने अपनी आखें नहीं खोली और अब मैंने धीरे से अपनी एक उंगली को उसकी आकार में छोटी सी, गीली चूत में डाल दिया. दोस्तों चूत ज्यादा गीली होने की वजह मेरी ऊँगली फिसलती हुई सीधा अंदर चली गई और मैंने थोड़ी देर ऊँगली को लगातार आगे पीछे किया और मेरे कुछ देर ऐसा लगातार करने की वजह से वो बहुत गरम हो गई थी, क्योंकि अब उसके मुहं से हल्की हल्की मोनिंग करने की भी आवाजे मुझसे सुनाई दे रही थी.

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फिर मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया और उसके सूट के ऊपर से ही मैंने उसकी चूत में धक्के मारने शुरू कर दिए थे. दोस्तों मेरे यह सब करने की वजह से उसे भी अब बहुत मजा आ रहा था और फिर उसने मुझे पकड़कर बहुत टाईट हग कर लिया और अब वो खुद भी हल्के हल्के धक्के मारने लगी थी, वो भी अब जोश में आकर मेरा साथ देने लगी थी, लेकिन थोड़ी देर धक्के देने के बाद वो अचानक से शांत हो गई, शायद उसका पानी निकल गया था. उसके बाद हम दोनों अपने बीच में थोड़ी सी दूरी बनाकर सो गये, लेकिन दोस्तों इसके बाद दोबारा मुझे ऐसा कोई भी मौका नहीं मिला और ना ही मेरी इतनी हिम्मत हुई कि में खुद आगे बढ़कर उससे उस रात के बारे में बात कर लूँ.

दोस्तों कुछ दिन बाद उसकी छुट्टियाँ खत्म हो गई और वो वापस अपने घर पर चली गई. उसके चले जाने की बात को लेकर में बहुत दुखी हो रहा था और में मन ही मन सोच रहा था कि मैंने उससे बात क्यों नहीं की? अगर में उससे बात करता तो शायद में उसकी चूत मार सकता था. दोस्तों मेरे कुछ महीने ऐसे ही उसको याद करके गुजर गए और उन दिनों मैंने उसको बहुत बार याद किया और उसके साथ वो मज़े मस्ती को याद किया. फिर कुछ महीनों के बाद मेरी बुआ का मेरी मम्मी के पास फोन आया और उन्होंने कहा कि आप राहुल को शालू को ले जाने के लिए यहाँ पर भेज दो, वो जाने के लिए बहुत ज़िद कर रही है, लेकिन यहाँ पर कोई भी नहीं है, जो उसे आपके पास छोड़ जाए.

फिर उनसे पूरी बात करने के बाद मुझसे मेरी मम्मी ने कहा कि तुम जाकर शालू को यहाँ पर ले आओ, कुछ देर पहले मेरे पास तुम्हारी बुआ का फोन आया था. दोस्तों अब तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और में उनके मुहं से यह बात सुनकर खुशी खुशी अपनी बुआ के घर पर चला गया और में वहां पर दो दिन तक रुका और उसके बाद में शालू को अपने साथ में लेकर आ गया. फिर रास्ते में जब हम बस में बैठे हुए थे, तो मैंने अपने हाथ को घुमा लिया था, वो मेरे पास में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठी हुई थी.

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