चाची को चोदने की लालसा-2

Chachi ko chodne ki lalsa-2

हमारे साथ में हर कभी मेरी चाची भी आ जाती थी और हर कभी खेलते मस्ती करते समय में उनके जिस्म को जानबूझ कर छू लिया करता, लेकिन वो इस बात का बिल्कुल भी विरोध नहीं करती थी और मैंने कई बार उनको पीछे से पकड़कर उठा भी दिया था, जिसकी वजह से उनके गोरे मुलायम पेट के साथ साथ मुझे उनके बूब्स को भी छूने का मौका मिल जाता था, जिसकी वजह से में खुश हो जाता और हम लोगो को खेलते मस्तियाँ करते करीब रात के 8-8:30 का समय हो जाता था.

उसके बाद घर पर आकर हाथ मुहं धोकर खाना खाने के बाद हम लोग फिर से पार्क में आ जाते थे. में वहां पर स्केटिंग किया करता था और वहीं पर कई बार थककर में अपनी चाची के पास जाकर बैठ जाता था और वो मुझसे बातें हंसी मजाक किया करती थी, क्योंकि मेरी उनके साथ बहुत अच्छी बनती थी, लेकिन फिर मैंने एक दिन महसूस किया कि वो कुछ दिनों से मुझसे कुछ ज्यादा ही खुल गयी थी.

वो अब हर कभी मुझसे लड़कियों के बारे में बातें करने लगी थी वो तब मुझसे पूछती थी कि लड़कियों में मुझे क्या अच्छा लगता है और फिर मैंने उन्हे बताया भी था कि मुझे लड़कियों के बूब्स बहुत ही अच्छे लगते है और उन्हे दबाने का मेरा बड़ा मन करता है.

वो मुझसे पूछा करती थी कि क्यों तेरी तो वहां पर कोई गर्लफ्रेंड जरुर होगी जिसके साथ तू सेक्स के साथ साथ दूसरे मज़े भी लेता होगा, लेकिन मैंने उन्हे तब बता दिया था कि में अब तक वर्जिन हूँ. मैंने अभी तक किसी के साथ सेक्स नहीं किया है, क्योंकि मुझे अब तक ऐसा कोई भी मौका ही नहीं मिला. एक दिन की बात है में उस दिन हर दिन की तरह स्केटिंग कर रहा था और में कुछ देर बाद बहुत थक गया था, इसलिए में अब उनके पास जाकर बैठ गया था जिस जगह पर चाची बैठी हुई थी वहां पर बहुत अँधेरा था और वो सभी लोग थोड़ा दूरी पर खेल रहे थे.

उन्होंने इन बातों का फायदा उठाकर धीरे से मेरे एक हाथ पर अपना एक हाथ रख दिया और वो उसको धीरे धीरे सहलाने लगी थी, दोस्तों सच कहूँ तो तब मेरी समझ में कुछ भी नहीं आया था और में चुपचाप बैठकर उनकी उस हरकत को देखता रहा और उसके मज़े लेता रहा, क्योंकि उनके नरम हाथ का स्पर्श मुझे बड़ा अच्छा लगा.

फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर उसी समय अपने एक बूब्स पर रख दिया तो में अब उनकी उस हरकत की कांपने लगा, लेकिन वो धीरे धीरे मेरे हाथ को ऊपर से दबाकर मेरे हाथ से अपने बूब्स को दबाने लगी थी और अब मुझे उनके कड़क बूब्स का स्पर्श महसूस होने लगा.

थोड़ी देर के बाद मैंने भी बिना कुछ सोचे समझे हिम्मत करके उनके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और में लगातार कुछ देर तक वो काम करता रहा और वो लगातार मेरी तरफ मुस्कुराकर देखती रही, लेकिन तभी किसी के हमारे पास आ जाने के डर से उन्होंने मेरा हाथ अब अपनी छाती से हटा दिया. अब उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम मेरे साथ और भी कुछ करना चाहते हो तो अभी यहाँ पर नहीं आज रात को तुम मेरे रूम में आ जाना.

में तुम्हे वहां पर पूरे मज़े दूंगी जिसको तुम पूरी जिंदगी याद रखोगे. फिर मैंने उनसे कहा कि यह सब काम कैसे हमारे बीच हो सकता है आपके कमरे में तो इस समय अंकल भी होंगे? तब उन्होंने बताया कि वो अभी कुछ देर पहले अपने किसी जरूरी काम से कहीं बाहर गए हुए है और वो दो दिन बाद वापस आएँगे तब तक में अकेली ही रहूंगी, इसलिए अब हम अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते है.

फिर मैंने उनकी पूरी बात को सुनकर बहुत खुश होकर उसने कहा कि हाँ ठीक है और फिर हम दोनों वापस खेलने लगे, लेकिन अब मेरे दिमाग़ में बस वही बातें घूम रही थी और मेरा किसी भी काम में अब मन नहीं लग रहा था.

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मेरे मन में तो अपनी चाची के साथ उनकी चुदाई के वो विचार बार बार आ रहे थे, क्योंकि मुझे इतने लंबे इंतजार के बाद उस दिन अपनी चाची के साथ इतना आगे भी कुछ काम करने का मौका मिला था और में उस बात को मन ही मन सोच सोचकर पागल हुआ जा रहा था.

फिर रात को खाना खाने के बाद में अपने कमरे में सोने चला गया और में घर के सभी लोगों के सोने का अब इंतज़ार करने लगा था और फिर सभी लोग जैसे ही सो गये वैसे ही में अपने कमरे से उठकर चाची के कमरे में चला गया. मैंने देखा कि उस समय उनके कमरे में छोटा सा कम रौशनी वाला एक बल्ब जल रहा था और उस समय मेरी हॉट सेक्सी चाची करवट लेकर लेटी हुई थी. में हिम्मत करके उनके करीब चला गया और अब मैंने उनके गले में हाथ डाल दिया और में उन्हे सहलाने लगा.

अब मैंने देखा कि वो नींद में नहीं थी और अब उन्होंने करवट लेकर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और वो मुझे चूमने लगी थी और में भी जोश में आकर उनके किस का जवाब अपनी तरफ से देने लगा था, बहुत देर तक हम दोनों एक दूसरे के होंठो को चूसते चूमते रहे. फिर उन्होंने उसी समय मेरा एक हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख दिया और वो अपने बूब्स को ज़ोर से दबाने लगी थी और अब में उनका वो इशारा तुरंत समझ गया और में भी उनके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा था. फिर धीरे धीरे मुझे अपने आप में गरमी का अहसास होने लगा था और में बहुत गरम हो गया और मेरा लंड भी तब तक तनकर खड़ा हो चुका था और वो मेरी पेंट से बाहर आने के लिए अब बहुत तड़पने लगा था.

मैंने अब बिल्कुल भी समय खराब करना उचित नहीं समझा और मैंने तुरंत ही उनका ब्लाउज पूरा उतार दिया और उसके बाद मैंने उनकी ब्रा को भी उनके गोरे सेक्सी बदन से अलग कर दिया था, जिसकी वजह से अब उनके वो दोनों बूब्स मेरे सामने बिल्कुल नंगे थे वो बड़े ही आकर्षक नजर आ रहे थे जिनको देखकर मेरी लार टपकने लगी थी.

में उनको देखकर ललचा रहा था और अब में एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और दूसरे बूब्स को दबा भी रहा था मेरे ऐसा करने से चाची के मुहं से अब गरम होने की वजह से सिसकियाँ निकलना शुरू हो गयी थी. मैंने दोनों बूब्स को बारी बारी से चूसते चूसते उनकी साड़ी भी अब उनके जिस्म से अलग कर दिया था और उसी की बाद उनके पेटीकोट और पेंटी को भी मैंने अब उतार दिया था जिसकी वजह से अब चाची मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी और उनकी चूत मुझे बिना कपड़ो के साफ साफ नजर आ रही थी, लेकिन मैंने फिर ध्यान से देखा कि आज उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था शायद उन्होंने पहले से ही अपनी चूत के बालों को साफ कर लिया था, जिसका मतलब साफ था कि वो भी मुझसे आज अपनी चूत की चुदाई के पूरे मज़े लेना चाहती थी.