गुजरात में पंजाबन भाभी की चुत गांड को चोदा-1

Gujrat Me Punjaban Bhabhi Ki Chut Gand Ko Choda-1

मेरी पिछली कहानी से आपको पता है कि मैं अब इंडिया में नहीं रहता. मगर यह मेरी इंडियन सेक्स स्टोरी है. मैं जब अमदाबाद में जॉब करता था, तब मैंने एक प्रोफ़ेशनल कोर्स में पार्ट टाइम एडमिशन लिया था, जिसकी क्लास शाम को होती थीं. मैंने एक हफ़्ते देर से दाख़िला लिया था.

मैंने क्लास में जाकर देखा कि उधर 20-22 लड़के और 5-6 लड़कियाँ थीं. ज़्यादातर लोग पढ़ाई या जॉब करते थे. पहले थोड़े दिन तो अविवाहित लड़कियाँ ही आई थीं. बाद में एक दिन मैं गया तो देखा कि एक औरत भी आई हुई थी.
सर ने उसका परिचय पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम जसप्रीत है. लेकिन वो खुद को प्रीति कहती थी और यही नाम कहलवाना पसंद करती थी.
वो क़रीबन 40 साल के आस पास की होगी और बैंक में जॉब करती थी.

मुझे उसके नाम से ही पता चल गया था कि वो पंजाबी है. क्योंकि न केवल उसके नाम से, बल्कि उसकी बड़ी सी गांड और बड़े बड़े मम्मे भी उसके पंजाबन होने mast chut ki chudai की गवाही दे रहे थे और बाक़ी उसकी बोलने के टोन से भी पता चल रहा था.

मेरा व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली है तो 1-2 लड़कियाँ मेरे पर 2 हफ़्ते में ही लाइन मारने लगी थीं. परन्तु एक दिन मेरी बीवी मेरी कार ले गई थी, तो जब वो मुझे लेने के लिए क्लास में आई तो सब को पता चल गया कि मैं शादीशुदा हूँ. उन तीन लड़कियों ने तो मेरी बीवी से बातें भी चालू कर दी थीं.. जो मुझे पटाने में लगी थीं. इसके बाद तो वे सब कोरी चुत देने में रूचि रखने वाली मुझसे किनारा करने लगीं और सब भोसड़ी वालियां मेरी जगह कुँवारा लंड ढूँढने लगीं.

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एक दिन हमारा ग्रुप डिस्कशन था. सबमें 5-5 के ग्रुप बनाए थे.. जिसमें मैं और प्रीति एक ही ग्रुप में थे. बाद में जब हमारे ग्रुप का टर्न आया तो मैंने बोला कि हमारे ग्रुप को प्रीति रिप्रजेन्ट करेगी. यह सुन कर वो थोड़ी चौंक गई और मुझे घूरने लगी, क्योंकि क्लास में उसको सब मैडम ही बुलाते थे. कारण ये था कि सब लड़कियों में वो एक ही औरत थी. हालाँकि मैंने स्वाभाविक ही बोला था, क्योंकि मैं एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करता हूँ और वहां सब एक दूसरे को नाम से ही बुलाते हैं.

मैं उसको टॉपिक ध्यान से समझा रहा था. हालाँकि हमारे ग्रुप में और भी एक लड़की थी, मगर इतनी मस्त आंटी को देख के उसको मैं इग्नोर कर रहा था. मैं जब भी प्रीति के सामने देखता, वो नीचे अपनी कॉपी में देखने लगती.

बातचीत के दौरान मैं उसकी आँखों में आँखें डाल के बात करता था. वैसे लड़कियों को पटाने का मुझे बहुत अनुभव है मगर किसी आंटी के साथ मेरा पहला प्रयत्न था. मेरी पहली गर्लफ़्रेंड भी कहती थी कि तुम्हारी आँखों में आँखें डाल के बात करने की अदा से सामने वाला तुरंत इम्प्रेस हो जाता है.

जब क्लास ख़त्म हुई, उसने मुझसे बोला कि तुमको तो हर विषय का अच्छा ज्ञान है.

मैंने बातों बातों में उससे पूछा तो उसने बताया कि वो वलसाड से अहमदाबाद अभी आई थी. उसके पति वापी में जॉब करते हैं और दस बारह दिन में एक बार आते हैं. फिर 3-4 महीने में उसकी भी ट्रांसफ़र अहमदाबाद हो जाएगी. उसकी एक बेटी काफ़ी सालों से हॉस्टल में माउंट आबू में थी, क्योंकि जॉब की वजह से वो ध्यान नहीं दे पाती.

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पन्द्रह दिन ऐसे ही निकल गए. इसके बीच हम बहुत खुल चुके थे. एक दिन रविवार को एक्स्ट्रा क्लास थी क्योंकि कभी बाहर से लेक्चरर आते थे. आज क्लास दस से चार बजे तक की थी. बीच में एक घंटा लंच ब्रेक होता था.

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मैंने बाजू के रेस्टोरेंट में लंच लेने का सोचा, तो मैंने उससे पूछा- तुम मेरे साथ लंच को चलोगी?
वो बोली- मैं सुबह पराँठे सब्ज़ी बना के ही आई हूँ. अगर तुम चाहो तो मेरे घर पर लंच पर मुझे ज्वाइन कर सकते हो.
मैंने सोचा चलो आज पंजाबी ज़ायक़ा ले लेते हैं.

वो एक फ़्लैट में किराए पे रहती थी. उसके पास अपनी एक्टिवा थी, मैं अपनी बाइक लेके उसको फ़ोलो करने लगा. उसने बोला कि जब मैं कॉल करूँ तब ऊपर आ जाना. मैं सोच में पड़ गया कि खाना खाने बुलाने में पड़ोसियों को क्या प्रॉब्लम हो सकती है. मेरे दिमाग़ में बत्ती जली कि इसका कोई और प्लान तो नहीं है?

थोड़ी देर में उसने कॉल किया- कोई देख नहीं रहा, आ जाओ.. घर का दरवाज़ा खुला है.
मैं तुरंत ऊपर चला गया. घर काफ़ी अच्छा था.
उसने बोला- तुम फ़्रेश हो लो, मैं खाना लगा देती हूँ.

मैंने टॉयलेट में जाकर अपने लंड को हिला कर बोला- बेटे, आज तुमको पंजाबी चूत दिलाता हूँ.
बाहर आते वक्त मैंने अपना निक्कर थोड़ा नीचे कर दिया. ताकि वो मेरे लंड की भाषा आसानी से पढ़ सके.

खाना काफ़ी ज़ायक़ेदार था. खाना खाने के बाद मैंने बोला- यार आज बहुत धूप है और लेक्चर भी बोरिंग है. मैं तो घर जाकर आराम करता हूँ.
वो बोली- मेरा भी मन नहीं कर रहा, अगर तुम चाहो तो यहीं 1-2 घंटे रुक जाओ.. क्योंकि धूप बहुत है और तुम बाइक लेके आए हो.. टीवी देख लो.
तो मैंने टीवी चालू कर दिया.

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वो थोड़ी देर में कपड़े चेंज करके आई. उसने पंजाबी सूट पहना हुआ था और दुपट्टा नहीं होने की वजह से मम्मे उसकी ब्रा को फाड़ने को बेताब थे. उसको देखके मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने तकिया मेरे लंड पे लगा दिया.

अब हम दोनों चाय पीने लगे. मैंने जानबूझ कर अपने पैर को चौड़े कर दिए तो गोल पिलो नीचे गिर गया. अब मेरा टेंट उसके सामने था. हम दोनों के हाथ में चाय थी तो कोई पिलो उठा भी नहीं सकता था.

उसकी नज़र मेरे लंड पे पड़ी और वापस टीवी देखते मुस्कुराने लगी. वो कनाख़ियों से मेरे लंड को बीच बीच में देख रही थी और मैं भी, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, ऐसे टीवी देख रहा था.
ये बहुत अच्छा तरीक़ा है, अगर वो चुदवाना नहीं चाहती तो भी आपके पास बहाना होगा ही कि जानबूझ कर नहीं किया.. बस सामने वाली का रिस्पोंस देखो.

मैंने उसको देखा और बाद में मेरे लंड को.. और उसको पता चल गया कि उसकी चोरी पकड़ी गई है. अब लोहा गरम था. मैंने उसके पैरों को अपने पैरों से सहलाया. वो टीवी देखती रही. थोड़ी देर में रिस्पोंस देने लगी. मैंने उसकी गद्देदार जाँघों पर हाथ रख दिया. वो कुछ नहीं बोली, तो मैंने उसके बालों को पीछे कर के उसकी गर्दन पे किस कर दिया.

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