लम्बे इन्तजार के बाद मिलन के क्षण-2

Lambe Intjar Ke Baad Milan Ke Pal-2

अब दूसरा हाथ में सलोनी के दूसरे निप्पल पर ले आया और उसे भी दबाने, छेड़ने लगा। मस्तायी हुई सलोनी स्मूच करते करते धीरे से बोली- थूको ना!

जो मुझे अच्छे से सुनाई नहीं पड़ने के कारण मुंह हटाना चाहा ताकि वो साफ़ बोल सके। पर उसने मेरे सर को कस कर पीछे से पकड़ लिया और जोर से दबाती हुई स्मूच करने लगी और फिर से बोली- थूको ना, प्लीज. मेरे मुंह के अंदर थूको ना स्मूच करते करते!
ऐसा बोल कर वो भी थोड़ा थोड़ा सा मेरे मुंह में थूकने लगी, तो मैं समझा कि सलोनी अब ये खेल खेलना चाहती है।

बस फिर क्या, मैं भी लग पड़ा उस क्रिया में… और सच में यह भी एक अलग ही तरह का आनन्द था जो उस दिन महसूस हुआ। एक दूसरे के मुंह के अंदर थूकते हुए स्मूच करना, चूसना, चाटना। बस अलग ही दुनिया में खो जाओ; आँखें बंद, पास की दुनिया में क्या चल रहा है कोई मतलब नहीं। बस लगे पड़े हैं एक दूसरे में।

यही करते करते उसके निप्पल को जोर जोर से भींचने लगा, दबाने लगा, मसलने लगा। कभी तो निप्पल को जोर से मसल देता। कभी जोर से अंदर की तरफ चुच्चों के अंदर तक धंसा देता और फिर जोर जोर से गोल गोल घुमाता और कभी दोनों निप्पल पकड़ के बाहर की तरफ पूरा खींच के गोल गोल घुमाता।

सलोनी को इतनी मस्ती में झूलते हुए मैंने कभी नहीं देखा था, एक समय तो ऐसा आ गया कि मस्ती में वो बेहोश सी हो गयी और गिरने लगी; मैंने उसे पकड़ कर संभाला और अपने गले से लगा कर रखा, पर अब उसने कोई भी हरकत करना बंद कर दी। वो पूरी तरह से मेरे हाथों के भरोसे खड़ी थी।

उसने अपना चेहरा मेरे कंधे पर टिका के रखा था, शरीर का भार पूरा मुझ पर डाल दिया पर मैं फिर भी इस आनन्द को रोकना नहीं चाहता था, मैंने उसके निप्पल से हल्के हल्के खेलना जारी रखा।
और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सलोनी ने नशा कर रखा हो और अब उसमें खड़ी रह पाने या बोलने की भी ताकत नहीं है।
हाथ हटा दूँ तो फिर से गिरने को हो जाए।

फिर वो कुछ बुदबुदाने लगी जो साफ़ सुनाई नहीं पड़ रहा था, तो मैंने अपना कान पास में ले जाकर सुनने की कोशिश की।
“मयआआआआंक, आआआज मुझे खाआआ जाओओओ, मत छोड़ना मुझे… मसल के रख दो… 4 महीने से इन्तजार कर रही थी इसका! अब मत छोड़ना मुझे प्लीज!”
और फिर नशे में ही मेरा गला पकड़ के बोली- रुक क्यों गए, करो ना, और करो।

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नशे में ही झूलती हुई मेरी गर्दन पकड़ के झूमती हुई आवाज में बोलने लगी- रुक क्यों गए, करो ना, करते रहो ना, जोर जोर से करो ना। जोर जोर से करो। और जोर से करो। जितना जोर है पूरा लगा दो, रगड़ के रख दो आज मुझे, जानवर बन जाओ, जबरदस्ती करो, मैं मना करूँ तो भी रुकना मत; कभी मत रुकना; करते रहना; करते रहो… करो ना प्लीज… कुछ करो ना प्लीज।

मैंने भी उसकी इस हालत का फायदा उठाया और पास में पड़ी चुन्नी उठाई, उसकी आँखों पर कस के बांध दी ताकि उसे कुछ दिखाई न पड़े।
उसके हाथ मेरे कमीज के बटन ढूँढने लगे, एक एक करके उसने सारे बटन खोल दिए फिर कमीज नीचे गिरा दी और मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी, मेरे निप्पल  को अपने नाखूनों से कुरेदने लगी।

मैंने उसे उल्टा घुमा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया, उसके हाथ दीवार पर टिका दिए और पेटीकोट का नाड़ा खींच के नीचे गिरा दिया।
उसके हाथ मेरी बेल्ट को खोलने में लग गए और फिर पैंट भी नीचे गिरा दी गयी।
और वो पैंटी में और में अंडरवियर में बचे थे।

उसके हाथ दीवार पे टिका के, गर्दन को पीछे से पकड़ा और दबा के सीधे दीवार की तरफ कर दिया और उसके कान के पास जाके धीरे से बोला- ऐसे ही खड़ी रहना, वरना तेरी चूत और चुचों का वो हाल करूँगा कि 10 दिन तक हाथ नहीं लगाने देगी।
पर इससे तो वो और मस्ती में आ गयी और बोली- करो ना, वैसा हाल करो न प्लीज, आज वैसा ही हाल कर दो मेरा!

इसी बात पर मैंने उसकी दांयी चुच्ची पे हाथ से जोर का चांटा मारा और उसका निप्पल बुरी तरह से मसल दिया।
और ऐसा ही दूसरे चुच्चे और निप्पल के साथ किया।

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उसकी सिसकारियाँ तो बढ़ती ही जा रही थी, बीच बीच में बोलती जा रही थी- हाँ ऐसे ही, और जोर से, और जोर से मारो।
मारते मारते उसकी गर्दन पर पीछे से बाल साइड में किये और उसकी गर्दन पर चूम लिया और दोनों हाथों से उसके निप्पल और चुच्चों से खेलना जारी रखा। वो मस्ती में घोड़ी की तरह से अपनी कमर हिलाने लगी और अपना पिछवाड़ा और पीछे निकाल के मेरे लण्ड पर रगड़ने लगी और अपनी कमर को घुमाने लगी।

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जैसे ही उसे मेरे कड़क लण्ड का एहसास हुआ, उसने अपनी गांड को और पीछे कर लिया और जोर से मेरे लण्ड पर दबा कर गोल गोल घुमाने लगी।
मैंने उसकी गर्दन पर, कंधे पर, गर्दन के नीचे किस करना जारी रखा, और उसने अपनी गांड रगड़ना।
फिर अचानक उसे पता नहीं क्या हुआ कि उसे अपनी पैंटी खुद ही उतार दी और मेरी अंडरवियर उतारने लगी।
तो मैंने भी इस काम में उसकी मदद की और दोनों पूरे नंगे हो गए।

उसकी नंगी गांड का स्पर्श पाकर तो मेरा लण्ड और भी टनटना गया, जिसका एहसास शायद उसे भी हो गया। वो अचानक से पीछे मुड़ी, घुटनों के बाल नीचे बैठी, मेरा लौड़ा पकड़ा और गप्प से मुंह में ले लिया और एक हाथ से अपनी आँखों से दुपट्टा हटा लिया।

फिर एक हाथ से मेरे टट्टों से खेलने लगी, दूसरे हाथ से लौड़ा पकड़ के मुंह के अंदर बाहर करने लगी, कभी तो लौड़ा गले तक मुंह में ले लेती और फिर बाहर निकाल के उसी लसलसे पानी को लौड़े पर चुपड़ देती और अच्छी तरह से मसाज करते हुए लौड़े को काफी देर तक मुठियाती।
फिर लौड़े का सुपारा मुंह में लेती तो लोलीपोप की तरह उसे चूसती ही रहती।

इस बीच उसके हल्के हल्के दांत सुपारे पर चुभते तो वो भी अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने सलोनी को हटाने की कोशिश की तो उसने जैसे सुना ही नहीं और चूसती रही। मैंने उसे बताया कि अब कभी भी पानी निकल सकता है और पानी शायद उसे अच्छा न लगे, पर वो सब अनसुना करते हुए लौड़े को मुठियाती रही और झटके दे देकर चूसती रही।

और फिर वही हुआ जिसका डर था, लंड से वीर्य की पिचकारी छूट गयी पर मेरी उम्मीद के विपरीत उस समय भी सलोनी मेरे लौड़े को मुठियाते हुए चूसती रही। उसने पूरा पानी मुंह में भर लिया। और फिर मुंह खोल के सारा वीर्य लौड़े पे गिरा के मसाज करने लगी।

मसाज ख़त्म होने के बाद मेरी तरफ शरारती मुस्कान के साथ देखने लगी और फिर किस करते हुए धीरे धीरे ऊपर आने लगी।
जैसे ही मेरे दाहिने निप्पल के पास पहुंची, उसे अपने नाखून से हल्के हल्के कुरेदने लगी। शायद मुझे आज जन्नत का एहसास दिलाने का सोच रखा था उसने।

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मैंने उसको थोड़ा रुकने को बोला तो उसने मेरे निप्पल को मुंह से टच किया और अपनी जीभ से उसके साथ खेलने लगी, और फिर पागलों की तरह चूसने लगी कभी इस निप्पल को तो कभी उस निप्पल को… और बीच बीच में हल्का सा काट लेती।

अब तो मेरा भी सब्र जवाब देने लग गया, मैंने खींच के उसके बाल पकड़े और पलंग पर पटक दिया, उसकी टांगें फैलाई और लगा दी अपनी जीभ उसके चूत के दाने पे। और एक बार तो पूरा दम लगा के रगड़ दिया जीभ से दाने को।
सलोनी अपनी कमर को जोर से उछालने लगी और मेरे सर को पकड़ के दबा दिया अपनी चूत के ऊपर… ऊपर से उसकी सिसकारियाँ… सच में मन कर रहा था कि चूसता ही रहूँ चूत को।
फिर मैंने दाने को छोड़ कर चूत के आस पास चूमना चाटना शुरू किया पर चूत को नहीं छुआ।

थोड़ी देर तो सलोनी इन्तजार करती रही कि अब उसकी चूत पे आऊंगा पर जब उसे लगा कि ऐसे काम नहीं बनेगा चूत चुसवाने का, तो वो अपनी कमर उठा उठा कर मेरे मुंह के सामने लाने लगी। मेरे मुंह पे लगाने की असफल कोशिश करने लगी।
पर मैंने जब इसके बाद भी उसकी चूत को नहीं छुआ तो गुस्से में उसने मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ा और जोर से चिल्लाते हुए अपनी चूत के ऊपर दबा दिया, सर को दबाये हुए ही वो अपनी चूत को मेरे मुंह पे बड़ी बेसब्री से रगड़ने लगी और कभी मेरे बाल पकड़ के मुंह को चूत के ऊपर रगड़ने लगी।

अब सलोनी के मुंह से संतुष्टि से गुर्राने की आवाजें आने लगी और करीब 2 मिनट के बाद उसका शरीर अकड़ता हुआ सा महसूस हुआ और फिर मेरी सलोनी कमर उछाल उछाल के झड़ने लगी, सर पकड़ के चूत पे मारने लगी और कुछ ही पलों में एक संतुष्टि भरी मुस्कान लिए साँसों को काबू में करने की कोशिश करते हुए शान्ति से लेट गयी।

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