माँ को लंड पर नचाने की रिश्वत-1

Maa ko land par nachane ki rishwat-1

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी लोगो को अपनी जिंदगी की एक सच्ची घटना सुना रहा हूँ जिसको में बहुत समय से आप लोगों तक लाने के बारे में सोच रहा था, लेकिन आज बहुत हिम्मत करके ले आया और आज सुनाने जा रहा हूँ.

अब में कहानी शुरू करने से पहले अपनी माँ के बारे में बताता हूँ. दोस्तों मेरी माँ बहुत ही सेक्सी थी और उसका बदन, फिगर बहुत ही आकर्षक 38-30-40 था. अब मुझे भी जवानी का नशा छाने लगा था और में भी लड़कियों की तरफ आकर्षित होता था में अपने घर में अपनी माँ को भी देखता था और उनका उभरा हुआ, सुडोल बदन बड़े बड़े बूब्स मस्त थे और जब भी वो चलती थी तो उनके बूब्स और कूल्हों को हिलते हुए देखकर बड़ा मज़ा आता था.

दोस्तों मेरी माँ जब साड़ी पहनकर चलती तब उसके बड़े बड़े गोल गोल तरबूज से कूल्हे मटकते थे, जिनको देखकर में पागल होता था और में हमेशा उनके बारे में सोचता था. दोस्तों मेरी माँ दिखने में बहुत ज़्यादा सुंदर थी और कई बार तो मेरे पापा उनको चिढाते भी थे कि क्या कहर बरसा रही हो जानेमन और क्या तुम्हे बाहर कोई देखकर परेशान तो नहीं करता, तुम कहो तो में तुम्हारे साथ यहीं पर रहा करूँ? तो वो उनको डांट देती थी उनके लंबे लंबे बाल काली काली बड़ी आँखे काजल लगाने के बाद तो वो और भी सुंदर दिखती, उनकी लम्बाई भी अच्छी होने की वजह से उनका मोटापा नज़र नहीं आता था. दोस्तों कई बार छाती से उनका आँचल सरकने पर मैंने उनके उभरे हुए गोरे बूब्स की गोलाईयाँ देखी, जिसकी वजह से मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी सनसनी होती थी.

एक बार मैंने बाथरूम के एक छोटे से छेद से माँ को नहाते हुए देखा, जब वो अपनी ब्रा उतारकर नंगी खड़ी थी और बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मैंने देखा कि माँ के बूब्स बड़े आकार के और गोलाइयाँ लिए हुए थे और वो अपने बूब्स को अपने ही हाथों से ज़ोर से दबा दबाकर मज़े ले रही थी, जिसको देखकर मेरे बदन में सनसनी हो रही थी.

एक बार रात को मैंने माँ के साथ पापा को सेक्स करते हुए देखा, तो उस दिन से मेरा लंड माँ को देखकर उनके बारे में सोचने से ही खड़ा हो जाता था और में सोचता था कि में भी अपनी माँ के साथ ऐसा ही करूँ.

टीवी पर मैंने एक बार देर रात को एक फिल्म भी देखी थी और में हमेशा माँ के सेक्सी बदन के बारे में सोचता था, एक बार पापा कोई काम से दो दिनों के लिए बाहर चले गये, जिसकी वजह से अब घर पर में और मेरी माँ अकेले ही थे. उस दिन में माँ के कूल्हों को देखता रहा कि वो कैसे उनके कूल्हें मटकाती है? और मौका लगाने पर बूब्स को भी देखता, मैंने एक दो बार माँ से चिपकने और उनको धक्के देने की कोशिश भी की तो माँ हंस देती. अब में अपनी माँ की तरफ बहुत आकर्षित हो रहा था और में माँ के बूब्स, जांघे, कूल्हें और उनकी चूत को चोदने के लिए पागलों की तरह उत्तेजित हो रहा था.

एक दिन रात को टीवी पर एक सेक्सी फिल्म आ रही थी और उसमें एक बलात्कार का द्रश्य था और वो बड़ा लंबा था, करीब बीस मिनट से ज़्यादा ही दिखाया था और उसमे बलात्कार को पूरी तरह दिखाया गया था कि गुंडा कैसे हेरोईन के कपड़े एक एक करके ज़ोर जबरदस्ती करके उतार रहा था और उस लड़की ने बहुत भाग दौड़ विरोध किया उसके बावजूद भी उसका बलात्कार कर दिया और उसने अपनी काम वासना को पूरा किया था.

में इससे बहुत ही चकित हो गया था और तभी मैंने देखा कि मेरी माँ बाथरूम से नहाकर अपने बेडरूम में सिर्फ़ गाउन पहनकर चली गई और वो गाउन उनकी गांड के बीच की दरार में फँसा हुआ था, जिसे देखकर मुझे और सेक्स इच्छा बढ़ गयी और माँ का वो भीगा हुआ बदन मुझे बड़ा ही सेक्सी लग रहा था. वो अपने रूम में चली गयी और वो मुझसे बोली कि तुम लाइट को बंद करके सो जाना, लेकिन मेरी आखों के सामने तो अब भी वो बलात्कार का द्रश्य ही घूम रहा था.

मैंने सोचा कि आज माँ के साथ ऐसे ही करके मज़ा लिया जाए और मेरे दिमाग़ में शैतानी और सेक्स का भूत सवार हो गया जिसकी वजह से अब में सोच रहा था कि माँ सो जाए तो में आगे कुछ करूँ, जब बहुत देर हो गयी और मुझे लगा कि अब माँ सो गयी होगी. मैंने भी सभी लाइट को बंद किया और में माँ के रूम में चला गया और मैंने उस फिल्म की तरह एक बड़ी रस्सी भी अपने साथ रख ली, ताकि में माँ को उस द्रश्य की तरह बाँध दूँ, मैंने बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया, जिससे आवाज़ बाहर नहीं जाए और सभी खिड़कियाँ भी पहले से ही बंद थी, क्योंकि अंदर ए.सी. चल रहा था.

अब में माँ को सोते हुए देख रहा था रूम में लाल रंग का छोटा बल्ब जल रहा था, जिसकी रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था और गहरी नींद में सोते समय माँ का गाउन कुछ ऊपर उठा हुआ था जिससे उनकी गोरी गोरी सेक्सी जांघे मुझे साफ दिख रही थी और जब वो सांस ले रही थी तो उनके बूब्स ऊपर नीचे उठ रहे थे, जिसकी वजह से उनके बूब्स और भी ज्यादा सेक्सी लग रहे थे. अब में माँ के पास में बेड पर जाकर लेट गया और सोचने लगा कि कैसे क्या करूं? मैंने धीरे से माँ के ऊपर अपना एक हाथ रख दिया और बूब्स को सहलाया जिसकी वजह से मेरे बदन में करंट सा लगने लगा और माँ ने कुछ देर बाद मेरा हाथ हटा दिया.

में वापस नींद का बहाना करके में के ऊपर पैर रखकर सोने लगा और उनसे एकदम चिपक गया. मैंने उनका गाउन थोड़ा और ऊपर कर दिया, जिसकी वजह से वो अब उनकी जाँघो से ऊपर था. मैंने अपने एक हाथ को एक बार से उनके बूब्स पर रख दिया और गाउन का एक बटन भी खोल दिया, तभी माँ की नींद खुली तो उन्होंने पूछा क्या हुआ? और उन्होंने मुझे अपने से दूर कर दिया, लेकिन में से उनसे चिपक गया और बोला कि मुझे तुम्हारे साथ सोना है और मैंने उनके बूब्स को भी ज़ोर से दबा दिया, उसके बाद में उनके गाउन को और भी ऊपर करने लगा.

तभी वो जल्दी से उठी और बोली कि यह क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि कुछ नहीं, जो सब करते है, माँ ने अपने गाउन को नीचे किया और बोली तुम यहाँ पर क्या कर रहे हो? तो में हंसते हुए बोला कि वही जो एक आदमी को एक औरत के साथ करना चाहिए और तुम जैसे पापा के साथ मस्ती करती हो. अब माँ बोली कि नहीं यह सब ग़लत है, तो में बोला कि क्या ग़लत है और क्या सही यह मुझे ना बताओ, अब बस चुपचाप तैयार हो जाओ, पापा के साथ भी रोज करती हो तब तुम्हे कुछ नहीं होता और आज में तुम्हारे साथ मज़ा लूँगा और में जैसा कहता हूँ तुम वैसा करती जाओ समझी.

मेरे मुहं से ऐसे शब्द सुनकर माँ तो बिल्कुल डर गई और माँ बोली कि तुम मेरे बेटे हो और में तुम्हारी माँ हूँ. यह काम माँ बेटे के बीच में नहीं हो सकता, जब तुम बड़े हो जाओगे तब तुम्हारी शादी होगी और तब यह सब तुम्हे मालूम होगा, यह गंदी बात है. मैंने कहा कि में आज करूँगा और मैंने माँ को बेड पर धक्का देकर लेटा दिया और माँ अपने पैरों को खींचने लगी, तभी में माँ के ऊपर चढ़कर लेट गया और उनको अपनी बाहों में भर लिया.

अब वो एक बार से मुझे अपने ऊपर से उतारकर अलग हो गई और मेरे ऊपर भी अब पूरा जोश आ गया और मैंने उनके दोनों पैरों को खींचकर बेड पर सीधा लेटा दिया, लेकिन वो अब विरोध करने लगी थी और में उनके ऊपर चढ़कर बैठा हुआ था और वो अपने आपको मेरे चंगुल से छुड़ाने के लिए हर एक कोशिश करने लगी, लेकिन उनकी वो हर कोशिश नाकाम हो रही थी.

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मैंने उनके नाइट गाउन को थोड़ा ऊपर करने के बाद पैरों पर बैठ गया और उनके नाइट गाउन को ऊपर उठाने लगा. उधर माँ विरोध करने लगी और इस तरह से उनके विरोध करने से मेरे ऊपर कोई असर नहीं पड़ रहा था, क्योंकि में भी आज़ अपना काम पूरा करना चाहता था. अब मैंने उनके नाइट गाउन के बटन खोले तो विरोध करने की वजह से उनके बटन टूट गये और ऊपर से गर्दन के पास से वो गाउन फट गया. वो मुझसे बड़ी थी इसलिए उनमे ताक़त भी ज़्यादा थी और उन्होंने मुझे धक्का दे दिया.

में बेड से नीचे गिर गया और मुझे चोट तो नहीं आई थी, लेकिन में नाटक करने लगा और तब वो घबराकर मेरे पास आई और मुझे देखने लगी और बोली कि ऐसे बुरे काम का यही फल होता है. मौका देखकर नींद का बहाना बनाकर मैंने उसको अपनी बाहों में बाँध लिया और अपनी छाती से पूरी ताक़त से भींच लिया.

जैसे ही वो चिल्लाने लगी तो मैंने अपने होंठ से उनके होंठ बंद कर लिए और चूसने लगा. वो बुरी तरह से छटपटा रही थी और मुझसे छूटने की पूरी कोशिश कर रही थी.

मैंने अपना पूरा बदन उन पर रख दिया और उनकी बड़े से बूब्स को दबाने लगा. कुछ देर उनके होंठ चूसने के बाद जब में थक गया तो मैंने उनके होंठ छोड़ दिए, लेकिन मुझे बहुत ही आनंद मिल रहा था और में साथ में डर भी रहा था.

तभी उन्होंने अचानक मुझे ज़ोर से एक तमाचा मेरे गाल पर मारा और वो मुझसे बोली कि बेशर्म नहीं आती क्या? और अब मुझे भी गुस्सा आ गया और मैंने उनका गाउन उतारकर अलग कर दिया जो बहुत विरोध के कारण चर्रर्ररर की आवाज़ के साथ फट गया था. वो अब सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और वो दूर जाकर बेड के एक कोने में खड़ी हो गयी और वो उस समय क्या मस्त सेक्सी लग रही थी? उनके बड़े बड़े बूब्स ब्रा से बाहर आने को तड़प रहे थे और उनकी गोरे गोरे पैर बहुत सेक्सी लग रहे थे और इस तरह से उनके विरोध करने से मेरे ऊपर कोई असर नहीं पड़ रहा था. अब वो चिल्लाई बोली कि तू अपनी माँ के साथ ज़बरदस्ती कर रहा है, कमीने तुझे बहुत पाप लगेगा, छोड़ दे मुझे भगवान तुझे कभी भी माफ़ नहीं करेगा, प्लीज छोड़ दे.

तब मैंने कहा कि तुम राज़ी हो जाओ ना, में कोई भी ज़बरदस्ती नहीं करूँगा और हम मिलकर सेक्स का आनंद लेंगे, प्लीज़ तुम्हारे साथ में पापा की तरह सेक्स का खेल खेलने के लिए मेरा मन बहुत तड़प रहा है और मैंने तुम दोनों को सेक्स का मज़ा लेते हुए देखा है, प्लीज़ मुझे अब ज्यादा ना तड़पाओ और तुम मेरे साथ क्यों नहीं कर सकती? मैंने तो तुम्हारे बूब्स बचपन में बहुत बार चूसे है और मेरा यह सारा शरीर भी तो तुम्हारी इस सुंदर चूत से ही तो बाहर आया है तो शर्म किस बात की? में अब उनकी तरफ बढ़ा और मैंने उनके बूब्स को दबा दिए.

दोस्तों माँ क्योंकि मुझसे कुछ तगड़ी थी और उन्होंने मुझे पकड़कर पलंग पर गिरा दिया और कमरे में पड़ी उस रस्सी से बाँध दिया, लेकिन जल्दी में वो ठीक तरह से बँधी नहीं थी इसलिए मेरे हाथ कुछ ही देर बाद खुल गए.

अब तो में भी पूरे जोश में आ गया और मैंने उनकी ब्रा को एक झटके में खोल दिया जिसकी वजह से उनके बूब्स बाहर उछलकर आ गये, वाह क्या बड़े बूब्स थे? उनको देखकर मज़ा आ गया और आज आपने इनके दर्शन कराए है, बचपन में दूध भी पिलाया था, प्लीज आज एक बार से पीने दो ना मेरी डार्लिंग माँ प्लीज. माँ अब से बेड के एक कोने में खड़ी होकर अपने दोनों हाथों से दोनों बूब्स को ढककर खड़ी थी और मैंने उनको बेड पर पटक दिया और उन पर चड़ गया.