माधुरी के मधुरस का स्वाद-1

Madhuri bhabhi ki chudai ki kahani-1

सबसे पहले मेरे सारे चाहने वालो को मेरा नमस्कार और मेरी सारी कहानी पसंद करने के लिए आप सब का आभार प्रकट करता हु आज भी एक नई कहानी के साथ हाजिर हु मगर ये कहानी आधी से सच और आधा फसाना है जो दिल मे उतरकर लबो पर आया है।
दोस्तो मेरी कहानी पड़कर एक भाभी का मैसेज मेरे पास आया उसका नाम मधु था।

बस जगह चेज कर रहा हु वो रहने वाली दिल्ली की थी। थोरे दिन तो मैने उससे बात की मगर मुझे लगा वो फेक आईडी है इसलिए उससे पिचर मांगे थोड़ी नाटक करने बाद उसने अपनी पिचर मुझे भेजी क्या खूबसूरत थी उसकी उम्र 34 साल की थी उसका फिगर 32-30-36 का है शुरू में तो वो मधु बहुत भाव खारही थी मगर मेने भी मन मे सोचलिया था इसका सारा भाव इसकी चुद से बदला लेकर वसुलुगा इसलिए मैंने भी अपना जाल डालना शुरू किया ऐसे ही बात करते हुए मेने उससे मिलने का बोला मगर यहां भी मधु अपना ईगो बताने लगी मेने जैसे तैसे उसे प्यार से पटाया और उससे मिलने के लिए दिल्ली गया और वहां होटल में जाकर उसे कॉल किया जब वो रूम में आई तो ऐसा लगा जैसे गर्मी के मौसम में पानी की बहार उसके बदन की खुश्बू फूलो की खुशबू से भी ज्यादा अच्छी लग रही थी उसके आते ही मेने उसको गले लगाया और उसको किसस किया फिर मेने उसको खाने का बोला तो मधु ने कहा खाना तो तैयार है आप के पास बस उसे खोलकर खाना है।

धीरे धीरे कब हम एक दूसरे के और करीब आ गए पता ही नहीं चला। एक दूसरे की सांसें हम दोनों महसूस कर रहे थे, हमारे हाथ एक दूसरे को टच कर रहे थे। हमे एक दूसरे से चिपकना अच्छा लग रहा था। उसने अपनी आंखें बंद करके मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया।

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अब मधु का हाथ मेरे लंड के ऊपर तक आ चुका था। मेरा लंड तो पहले से ही सलामी दे रहा था, मधु ने मेरे खड़े लंड का उभार महसूस किया और मेरे सुलगते लंड के ऊपर सहलाने लगी। वासना के लाल डोरे उसकी आँखों में साफ दिखाई दे रहे थे। उसके मखमली हाथों ने मेरा आपरेशन चालू कर दिया। हम दोनों ही एक दूसरे से कुछ भी नहीं बोल रहे थे।
धीरे धीरे उसने मेरे पैंट की चैन खोल कर मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और लंड के टोपे को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी अपने हाथ से उसके नंगे पेट को सहलाने लगा। धीरे धीरे हाथों को मैंने उसकी चुची पर रख दिया, मुझे ऐसा लगा कि रूई का कोई गोला मेरे हाथ में आ गया है। मुझे अच्छी तरह मालूम है कि औरत को अगर ठीक से गर्म कर दिया जाए तो वो अपनी चुत हथेली में रख कर परोस देती है।

अब मैंने भी देर न करते हुए उसके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिये और उसकी चुची को प्यार से मसलने लगा। उसकी चुची तनी हुई थी। मैं एक एक करके उसकी चुची की घुंडियों को मसल रहा था। आग दोनों तरफ सुलग रही थी। मेरे लंड की गर्मी से वो बहुत उत्तेजित हो रही थी। धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी ऊंची घाटियों से होता हुआ गहराई की तरफ जाने लगा। मेरा हाथ उसकी चुत को छूने के लिए मचल रहा था। साड़ी के अंदर से काफी कोशिश करने के बाद भी जब मेरा हाथ अंदर नहीं गया तो मधु ने अंगड़ाई लेते हुए अपनी वासना भरी नजरों से मुझे देखा और अपने हाई हील्स सैंडल्स उतार कर अपने दोनों पैर ऊपर कर लिए। अब मेरे लिए मेरी मंजिल दूर नहीं थी। मेरा हाथ नीचे से सीधे सरकते हुए उसकी पेंटी तक पहुँच गया। जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी गीली पेंटी के ऊपर से उसकी फूली हुई चुत पर रखा, उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरे लंड को जोर से दबा दिया।

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एक हल्की सी चीख मेरे मुंह से निकली, साथ ही उसके मुँह से भी सॉरी निकला। मैं उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को सहलाने लगा। चुत की दरार पेंटी के ऊपर से साफ महसूस हो रही थी।
अब हम दोनों के हाथों की रफ्तार ट्रेन की रफ्तार से भी ज्यादा तेज हो चली थी। मधु ने थोड़ा सा हिलडुल कर अपनी पेंटी उतारने का इशारा किया। मधु ने बिल्कुल नए फैशन की पेंटी पहनी हुई थी। पेंटी में एक तरफ हुक थे और दूसरी तरफ गांठ वाली डोरी थी। अगले ही पल मधु के चुत के पर्दे को मैंने अलग कर दिया अब उसकी चुत की दरार ओर मेरे हाथों के बीच कोई फासला नहीं था। वो मेरे लंड को पागलों की तरह हिला रही थी। जैसे मधु मेरा लंड आज चबा कर खा ही जाती। मधु की चुत एकदम साफ थी, लगता था कि उसने एक या दो दिन पहले ही वैक्स कराई है। उसके दाने को जैसे ही मैंने सहलाया उसकी कामुक सिसकारी निकल गई और साथ ही उसने अपनी टाँगें थोड़ी ओर फैला दी।

अब मैंने उसकी चुत में धीरे धीरे उंगली घुसाना शुरू किया। मुझे कोई खास दिक्कत नहीं आ रही थी उसकी चुत गुफा में घुसने की। अपनी उंगली मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। अब उसकी चुत काफी ज्यादा पनिया गई थी, वो भी काफी कोशिश कर रही थी कि मेरे लंड का पानी छुट जाए लेकिन मधु को क्या मालूम था कि मैं एक जिगोलो हूँ और जिगोलो का पानी इतना आसानी से छूट नही सकता है जो भी हो, हम दोनों उस हसीन पल का आनन्द उठा रहे थे। अब मधु का बदन ऐंठने लगा था, वो धीरे से कान में फुसफुसाई- और तेज़ करो। मैंने अपने होंठों पर उंगली रख कर उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने हाथ की स्पीड बढ़ा दी। मधु के मुँह से धीरे धीरे उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाजें आने लगी। मैंने अपना दूसरा हाथ उसके होठों पर रखा और उसकी गुफा में अपने इंजन की रफ्तार बढ़ा दी। अब हमारी गाड़ी मंजिल पर पहुंचने के करीब ही थी। मधु ने बिना किसी की परवाह किये हुये मुझे अपने से कस के चिपका लिया और अचानक मेरी हथेली पर ऐसा लगा कि कोई अंडा फूट गया हो।

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मधु करीब दो मिनट तक मुझसे कस के चिपकी रही। मधु की चुत से निकले हुए पानी को मैं अपने हाथों से उसकी चुत ओर जांघों पर धीरे धीरे मलता रहा।
अब मधु के चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव साफ दिखाई दे रहे थे लेकिन मेरा लंड गर्म पकोड़े की तरह फूल गया था। मगर उसे थोड़ा रेस्ट करने दिया फिर हम एक दूसरे से बात करने लगे जब मैंने बताया कि मैं एक जिगोलो हूँ तो वो बहुत खुश हुई। मैं उसके पीछे खड़ा होकर उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा और साथ ही उसकी गर्दन और कान के अंदर अपनी जीभ फिरा रहा था।मधु ने पलट कर मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरा साथ देने लगी।

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