मैंने अपने अब्बू से अपनी चुत कैसे चुदवाई-1

(Maine Apne Abbu Se Apni Chut Kaise Chudwayi-1)

दोस्तो, मैं आपकी सेक्सी दोस्त बिलकीस, दिल्ली से!
मेरी पिछली कहानी
मेरे घर में सेक्स का नंगा नाच
में आपने पढ़ा कि कैसे हमारे ही घर में काम करने वाले एक कारीगर ने मुझे कमसिन उम्र में ही चोद कर कली से फूल बना दिया और करीब 2 साल तक ये सब चलता रहा, दो साल तक फरीद मुझे चोदता रहा, मेरी अम्मी की जानकारी में!
पहले तो छुप छुपा कर ही फरीद मुझे चोदता था, मगर धीरे धीरे मेरी और अम्मी की शर्म खुलती गई, क्योंकि फरीद अक्सर मुझे अम्मी के सामने ही बुला कर ले जाता, कमरे के अंदर क्या हो रहा है अम्मी सब जानती थी। अम्मी के सामने ही फरीद अक्सर मुझे चूम लेता, मेरे छोटे छोटे मम्में दबाता, और यही सब कुछ वो अम्मी के साथ भी करता है।

मैं देखती कि कैसे अम्मी उसकी की हर बदतमीजी को हंस कर टाल जाती।
और अब तो हालात ये हो गए कि फरीद अम्मी के कमरे ही मुझे चोदता, अक्सर दरवाजा खुला होता और अम्मी आते जाते अपनी ही बेटी को किसी गैर मर्द से चुदते हुये देखती। ये बात मुझे बाद में पता चली के अम्मी ने किसी वक़्त फरीद से वादा किया था कि वो अपनी सबसे प्यारी चीज़ फरीद को तोहफे के तौर पर देंगी, और अम्मी की सबसे प्यारी चीज़ मैं थी, जिसे उसने अपनी आशिक को गिफ्ट कर दिया था. और आशिक भी खुश था कि उसे पहले एक शादीशुदा औरत मिली चोदने को और बाद में एक बिल्कुल कच्ची कली।

खैर अब आगे की बात करते हैं।

अब मैं बड़ी क्लास में हो गई थी, पूरी जवान हो चुकी थी। बाकी फरीद के तजुर्बेकार हाथों ने मेरे जिस्म को बड़े अछे से तराशा था। अच्छे खान पान की वजह से और कच्ची उम्र में ही चुदाई ने मेरे बदन को बहुत जल्दी एक भरपूर औरत का रूप दे दिया था। अब मुझे अपनी अम्मी के कपड़े बिल्कुल फिट आने लगे थे, बल्कि उनकी ब्रा तो मुझे टाईट आती थी और मेरी ब्रा उनको ढीली आती थी। कद काठी और रंग रूप में भी मैं निखर चुकी थी। अम्मी और मुझमें फर्क करना मुश्किल था, मगर फिर मेरी अम्मी मुझसे ज़्यादा हसीब है, आज भी।

एक दिन मैं स्कूल से आते हुये बारिश में भीग गई, जब घर पहुंची तो जल्दबाज़ी में अम्मी की नाईटी उठा कर पहन ली, मगर नाईटी के नीचे मैंने कुछ नहीं पहना था।
मैं किचन में जाकर अपने लिए खाना लगाने लगी, अभी मैं अपनी प्लेट में खाना डाल ही रही थी कि तभी किसी ने मुझे आकर पीछे से पकड़ लिया।

मुझे लगा फरीद होगा, इस लिए मैं कुछ नहीं बोली, ना ही चौंकी। पकड़ने वाले ने एक हाथ से मेरे मम्में दबाये और दूसरे हाथ से मेरी चूत को सहला दिया।
मगर जैसे ही मैं पलटी, मेरे हाथ से खाने की प्लेट नीचे गिर गई, मैं तो देख कर हैरान ही रह गई, यह फरीद नहीं, ये तो अब्बा थे।

अब्बा भी बहुत भौचक्के से रह गए- अरे, मैं समझा तुम्हारी अम्मी है!
कह कर वो बाहर को चले गए।

बेशक मुझे भी हैरानी हुई, मगर अब्बा के हाथ मुझे अपने जिस्म पर फिसलते बहुत अच्छे लगे।
मैंने किचन साफ की और दोबारा अपने लिए खाना डाल कर अपने रूम में आ कर बैठ कर खाना खाने लगी, मगर मेरे दिमाग में वो 5 सेकंड का अब्बा का मेरे कोमल अंगों को सहलाना ही मेरे दिमाग में घूम रहा था। चाह कर भी मैं उस बात को अपने दिमाग में नहीं निकाल पा रही थी.

खाना खाकर मैं खुद ही फरीद के पास गई, वो बैठा काम कर रहा था।
मैंने उसे कहा- फरीद, क्या तुम मेरे बदन को सिर्फ सहला सकते हो?
बेशक उसने सहलाया, मगर मुझे वो मजा नहीं आया, जो अब्बा के हाथों में था। थोड़ा सहला कर उसने चोद कर मुझे वापिस भेज दिया, मगर मुझे तो आज उसकी चुदाई में भी कोई खास मजा नहीं आया।

तो क्या मैं अब किसी दूसरे मर्द को चाहती थी, और दूसरा मर्द भी कौन, मेरे अपने अब्बा!
अपनी ही अम्मी की सौत!
मगर इस में भी क्या बुराई थी? अम्मी ने भी अपने यार के सामने मुझे खुद ही पेश किया था। अगर मैं उनका यार बाँट सकती हूँ, तो शौहर क्यों नहीं।

आज अब्बा मुझे कुछ ज़्यादा ही प्यारे लगने लगे थे।

रात को जब हम सब खाना खाने बैठे तो मैं अपने अब्बा के बिल्कुल सामने बैठी, और बार बार उन्हें ही देखती रही, मगर अब्बा मेरे से नज़रें चुरा रहे थे।
खाने के बाद मैंने अम्मी को दोपहर वाली बात बता दी।
तो अम्मी ने कहा- तो क्या चाहती है तू?
मैंने कहा- मैं तो कुछ नहीं चाहती।
अम्मी बोली- देख तुझे फरीद दे तो दिया, तो तू उस से मज़े कर, और मुझे तेरे अब्बा से मज़े करने दे।

मैं चुप रही मगर मैं दिल ही दिल में सोच रही थी कि काश अब्बा भी मुझ पर मेहरबान हो जाएँ।
छोटी उम्र से चुदने के कारण अब मुझे किसी भी मर्द में सिर्फ उसका मजबूत लंड ही नज़र आता था। मुझे अब अपने किसी भी रिश्ते की कोई परवाह नहीं रही थी।

मेरा भाई मेरे साथ ही सोता था, कई बार मैंने उसके सोते हुये उसकी निकर के ऊपर से ही उसकी लुल्ली पकड़ कर देखी, कभी कभी उस से खेली और वो खड़ी हो गई। मैंने एक दो बार कोशिश की किसी तरह उसकी लुल्ली उसकी निकर से बाहर निकाल लूँ और उसके साथ खेल कर देखूँ, उसे चूस कर देखूँ, मगर कामयाब नहीं हो सकी। हाँ इतना ज़रूर करती के मैं अक्सर उसके साथ बहुत चिपक कर सोती, ताकि मेरे मम्में उसके बदन से लगें, और वो मेरे जिस्म की नरमी महसूस करे।

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बड़ा भाई तो मुझ पर बहुत ही रोआब रखता था, अक्सर मुझे डांटता सा रहता था। उससे मैं थोड़ा डरती ज़रूर थी, मगर मैं उसकी लुंगी में हिलते हुये लंड को देख कर उसे भी छूना चाहती थी। बड़े भाई से तो मुझे कोई खास उम्मीद नहीं थी, मगर इतना मुझे ज़रूर लगता था कि मेरा छोटा भाई एक दिन मुझे चोदेगा।

मेरा सारा ध्यान अब अपने अब्बा पर ही था, क्योंकि मैंने बहुत बार अपने अब्बा को दारू के नशे में मेरी अम्मी की माँ चोदते देखा था, क्या ज़बरदस्त, और जोरदार चुदाई करते हैं अब्बू। फरीद भी अच्छा चोदता है, मगर उसमें वो दम नहीं है जो अब्बू में है।
और मैं तो चाहती यही थी कि जो भी मुझे चोदे मुझे तोड़ कर रख दे, और ये काम सिर्फ अब्बू ही कर सकते थे। मुझे पता था कि अक्सर अब्बू रात को बहुत ज़्यादा शराब पी कर आते हैं, और जिस दिन उन्होंने बहुत पी होती है, उस दिन तो अम्मी की खैर नहीं होती।

उसके बाद मैं इस बात का खास ख्याल रखने लगी कि कब अब्बा घर आते हैं, कब जाते हैं, मैं उनकी हर बात का ख्याल रखने लगी। अक्सर मैं अम्मी को काट कर अब्बा के हर वक़्त नजदीक रहने की कोशिश करने लगी और अब्बा भी इस बात को नोटिस करने लगे हैं कि जिस दिन से उन्होंने गलती से मेरे जिस्म को सहला दिया था, उस दिन से मैं उनके ज़्यादा नजदीक आ गई थी।

मगर मुझे अभी तक वो नहीं मिला था मुझे जो मैं चाहती थी। मगर कभी कभी आप जो सोचते हो, वो आपको इतनी आसानी से भी मिल जाता है, जितना आपने सोचा नहीं होता।

एक दिन अम्मी की तबीयत ठीक नहीं थी तो खाना मैंने ही बनाया। उस दिन अब्बू रात को देर से घर आए, और उन्होंने बहुत शराब पी रखी थी। मुझे लगा कि इससे अच्छा मौका मुझे और नहीं मिलेगा, अगर मैं फिर से उन मजबूत मर्दाना हाथों को अपने बदन पर सहलाते हुये, घुमाते हुये महसूस करना चाहती हूँ, तो आज ही मुझे कुछ करना पड़ेगा।

मैंने जानबूझ कर अम्मी की वही नाईटी पहनी जो उस दिन पहनी थी, जिसमें अब्बू ने मुझे पकड़ लिया था। भाई तो दोनों खाना खा कर सो चुके थे, मैंने अब्बा को खाना दिया, मगर उन्होंने बहुत थोड़ा सा खाया और अपने कमरे में जाकर लेट गए।

मैंने बर्तन किचन में रखे और फिर जाकर अम्मी को देखा, उनका बदन बुखार में तप रहा था, मैंने अम्मी से कहा- अम्मी आप मेरे रूम में सो जाओ, यहाँ अब्बा ए सी चलायेंगे तो आपको और ठंड लगेगी।
और मैंने अम्मी को समझा कर अपने रूम में ले जा कर लेटा दिया।

उसके बाद मैं बाथरूम में गई, अपने बाल ठीक से बनाए, थोड़ा सा मेकअप किया और बड़े आराम से जा कर अब्बा के साथ लेट गई। मगर अब्बा तो सो चुके थे, ज़ोर ज़ोर से खर्राटे मार रहे थे। मैं थोड़ा मायूस सी हो गई कि यार ये क्या बात हुई, मैं तो कुछ और ही सोच कर आई थी, मगर यहाँ तो लगता है मुझे कुछ भी नहीं मिलने वाला।

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