मकान मालकिन बनी लंड की दीवानी-2

Makan malikin bani lund ki deewani-2

मैंने आंटी के शरीर को हाथ लगाते ही वो बोली हाँ कितना अच्छा लग रहा है, मेरे बदन की थकान जैसे कि तुमने खत्म कर दी. फिर वो बोली कि थोड़ा और नीचे दबाना और मेरे पेटीकोट को भी उतार दो. इससे तुम्हे मालिश करने में आसानी होगी और मुझे भी आराम मिलेगा.

दोस्तों मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने कुछ नहीं किया तो इस पर आंटी बोली कि सोच क्या रहे हो पेटीकोट को उतार दो और फिर दोबारा ऐसा सुनते ही मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और उसे नीचे सरका दिया. फिर आंटी की गोरी और गोल-गोल गांड मेरी आँखों के सामने थी और मैंने उनकी गांड के आस पास मालिश शुरू कर दी और में उनकी गांड को धीरे-धीरे मसल रहा था और आंटी भी सिसकियाँ ले रही थी, उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था.

वो बोली कि ज़रा ज़ोर से मसलो ना, दर्द बहुत ज़्यादा है और आज तुम्हे ही मेरे जिस्म के दर्द को खत्म करना है. फिर मैंने ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया और अब मुझे भी ऐसा करने से बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड जो सांप की तरह खड़ा था, उनके पैर में रगड़ रहा था. फिर आंटी बिल्कुल नासमझ बनते हुए बोली कि यह क्या है मेरे पैरों के पास?

मैंने कहा कि आंटी यह मेरा लंड है, तो इस पर आंटी ने कहा कि अपना लंड अपनी आंटी को नहीं दिखाओगे और एक बार जी भरकर में भी तो देखूं कि मेरे बंटी का लंड कैसा है? और यह कहते हुए वो एकदम उठ गयी. दोस्तों आंटी ने पेटीकोट के नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी, इसलिए उनकी चूत उनके झांटो के बीच से साफ साफ दिखाई दे रही थी.

फिर आंटी ने मेरी पेंट को खोल दिया और अब में केवल अंडरवियर में था और फिर उन्होंने मेरी अंडरवियर को पकड़ा और उसे भी नीचे कर दिया. मेरा लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हुआ था और उनकी चूत को सलामी दे रहा था. फिर मेरे खडे लंड को देखकर आंटी बोली कि बाप रे तुम्हारा लंड कितना बड़ा है और यह तो एकदम तनकर खड़ा है और क्या अपनी आंटी के जिस्म को देखकर तुम भी बेताब हो गये? क्यों बंटी क्या कभी किसी लड़की को चोदा है? और इस 8 इंच के लंड का क्या फ़ायदा? अगर इसे इस्तेमाल ही ना किया हो और ऐसा कहते ही आंटी उसे अपने मस्त होठों से चूम लिया.

मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी. फिर आंटी ने धीरे से कहा कि क्या तुम मुझे चोदोगे? और अब वैसे भी इस लंड का इस्तेमाल होना चाहिए ना, क्योंकि ऐसे लंड को देखकर मेरी भी जवानी भड़क उठी है और आज सारी रात हम लोग चुदाई करते हुए बिताएँगे, क्यों बोलो चोदोगे ना अपनी आंटी को. फिर में आंटी की यह बात सुनकर एकदम खुशी से झूम उठा और मैंने थोड़ा घबराते हुए कहा कि क्यों नहीं. फिर आंटी बोली कि आज की रात मेरी जवानी तुम्हारे नाम हुई बंटी तुम आज जितना चाहो इसके मज़े ले लो, में तुमसे कुछ भी नहीं बोलूँगी.

फिर आंटी एकदम उठ खड़ी हुई, वो सिर्फ़ काले कलर की ब्रा में मेरे सामने खड़ी हुई थी और उनका अधनंगा जिस्म, सुडोल शरीर, मदमस्त चूत, सुंदर बूब्स और गुलाबी रसीले होंठ यह सब आज रात मेरे थे. दोस्तों मेरी तो जैसे आज लॉटरी लग गयी थी. फिर आंटी बोली कि आजा बंटी मेरे पास आ और मुझे मेरी ब्रा खोलकर नंगा कर दे और आज की रात हमारे बीच कोई दूरी ना रहे.

में उनकी तरफ बढ़ा और वो घूम गयी, में उनसे बिल्कुल चिपका हुआ था. फिर मैंने काँपते हुए हाथों से ब्रा का हुक एक एक करके खोल दिया और इसके बाद मैंने आंटी के कंधे से ब्रा की डोरी को नीचे कर दिया और ब्रा को उतार कर फेंक दिया और अब आंटी पूरी तरह से नंगी थी. फिर मैंने आंटी को बेड पर लेटा दिया और उनके रसीले होठों को अपने होठों के बीच दबाकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, इससे आंटी भी जोश में आ गयी और उल्टा उन्होंने मुझे नीचे कर दिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी और मेरे होठों को चूसने लगी. आंटी ने अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल दिया और अंदर तक घुमाने लगी और अब हम दोनों एक दूसरे के मुँह को अपनी जीभ से चूसे रहे थे.

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दोस्तों आंटी के क्या रसीले होंठ थे? मुझे ऐसा लग रहा था कि हम लोग एक दूसरे के होठों के रस को चूस डालेंगे, तो आंटी के बाल मेरे चेहरे पर बिखरे हुए थे और वो मेरे मुँह को अपनी जीभ से चूसे जा रही थी और इसके बाद मैंने उनके बूब्स को मसलना शुरू किया, वाह क्या मुलायम बूब्स थे आंटी के, साली ने क्या जिस्म पाया था. ऐसे जिस्म को तो मन करता है कि में चोदता ही रहूँ, में अपने दोनों हाथों से आंटी के बूब्स को मसल रहा था.

आंटी जोश में आ गयी और बोली कि मेरे राजा और ज़ोर से मसलो, जितना मसलोगे मुझे उतना ही मज़ा आएगा, हाँ ले लो इनको अपने मुँह में और पी लो इनका रस और यह कहते हुए आंटी ने मेरे सर को पकड़कर अपने बूब्स पर दबा दिया. फिर मैंने भी उनके बूब्स को मुँह में ले लिया और छप छप की आवाज़ से चूसना शुरू कर दिया. अपनी जीभ से उनके निप्पल को चाटा और उनके निप्पल एकदम खड़े थे और अब आंटी सिसकियाँ लेने लगी और उनकी सिसकियों की आवाज़ पूरे कमरे में भर गयी और आंटी की सिसकियों की आवाज़ से माहौल और भी गरम हो रहा था.

फिर वो बोलने लगी कि हाँ एक एक करके दोनों को चूस लो और मेरे यह बूब्स तुम्हारे होठों के लिए तरस रहे है, प्लीज आज अपनी आंटी को खुश कर दो और फिर में जोश में आकर और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और बीच बीच में अपने दातों से उन्हे दबा भी देता था. फिर आंटी बोल उठती अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्हह्ह थोड़ा धीरे तू बड़ा ज़ालिम है, लेकिन सच पूछो तो ऐसे दातों के बीच जब तुम मेरे बूब्स को दबाते हो तो मेरी कामुकता और भड़क उठती है और अब मुझसे नहीं रहा जाएगा, चल बंटी अब मेरी चूत को चोदने को तैयार हो जा और यह कहकर आंटी ने अपने दोनों पैर फैला दिए और एकदम चित हो गयी.

उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और उसके ऊपर से चमड़ी को नीचे कर दिया और बोली कि चल बंटी घुसा दे अपने लंड को मेरी चूत में और घपाघप मेरी चूत मारना शुरू कर दे. एक हाथ से आंटी ने मेरे लंड को पकड़ा और फिर अपनी चूत में घुसा दिया और आंटी एकदम दर्द से कराह उठी उूउफफफ्फ़ माँ आई मर गयी उह्ह्ह अह्ह्ह्ह इतना मोटा लंड मेरी चूत में डलवाने से मेरी चूत फट जाएगी, अह्ह्हहह सच बंटी तू बड़ा ज़ालिम है और आज तूने अह्ह्ह्हह्ह् आईईईईईई मुझे बहुत खुश कर दिया और मैंने जरा भी नहीं सोचा था कि एक 18 साल का लड़का एक 36 साल की औरत को इतनी अच्छी तरह से चोद सकता है और आज से मेरी जवानी तुम्हारी गुलाम हो गयी है, बस आज से दस दिन और दस रातें केवल मेरी चुदाई होगी और में तुझसे इतना चुदवाउंगी कि मेरी चूत फट जाए.

फिर में उनकी यह बात सुनकर जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर आंटी की चूत को चोदने लगा. आंटी भी अपनी गांड को उठा उठाकर धक्के मार रही थी और हम दोनों एक जिस्म हो गये, कभी में आंटी के ऊपर होता तो कभी आंटी मुझे नीचे कर देती और वो मुझे लगातार चूमे जा रही थी और जोश में वो काँप रही थी और हम जिस बेड पर हम चुदाई कर रहे थे, वो भी अब ज़ोर ज़ोर से हिल रहा था और पूरे कमरे में बेड की चूं चूं की आवाज़ और आंटी के सिसकियों की आवाज़ गूँज रही थी, लेकिन हम दोनों चुदाई में मस्त थे.

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