मम्मी की चूत का भोसड़ा बनवाया-1

Mummy ki choot ka bhosda banwaya-1

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सचिन है और में आगरा के एक कॉलेज में दूसरे साल की अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ, वैसे मेरा घर मुंबई में है. मेरे पापा एक सॉफ्टवेर इंजीनियर है और वो सिंगापुर में नौकरी करते है, मेरी माँ का अपना एक बुटीक है और मेरे पापा 6-7 महीनों में दो तीन दिन के लिए घर पर आते है.

दोस्तों मेरी माँ मुंबई में अकेली रहती है और वो बहुत खुले विचारों की है, मेरी माँ का फिगर बहुत मस्त है और उनके बूब्स 36 कमर 30 और कूल्हे 38 इंच के है, मम्मी की लम्बाई 5.6 इंच है और माँ का वजन 55 किलो है और मेरी माँ की उम्र 37 साल है.

दोस्तों में और मेरे कुछ दोस्त हमारे होस्टल में एक दिन एक ब्लूफिल्म की सीडी ले आए. वो फिल्म माँ बेटे की चुदाई पर थी, उस फिल्म में एक माँ अपने बेटे और उसके दोस्त से अपनी चूत को चुदवाती है. फिर हम सभी वो सब देखकर एक प्लान बनाने लगे कि हम सब अपनी अपनी माँ को मिलकर इस सेमेस्टर की छुट्टियों में जरुर चोदेंगे, हम 7 दोस्त है जिनमें से 4 आगरा के है और एक जयपुर और 1 दिल्ली का है.

अब सबसे पहले हम सभी ने अपने आगरा वाले दोस्तों की माँ को मिलकर बहुत जमकर चोदा. फिर मेरे दोस्तों ने मेरी माँ को चोदने का प्लान बनाया, मेरी माँ उन सभी की माँ से ज्यादा सुंदर है और में यह बात भी जानता था कि मेरी माँ बड़ी आसानी से चुदने के लिए मान जाएगी, क्योंकि मेरी मम्मी की चुदाई 6-7 महीनों में 1-2 दिन होती, इसलिए मम्मी की चूत हमेशा प्यासी ही रहती होगी और वो भी अपनी चुदाई के लिए तरसती होगी.

फिर हम सभी 7 दोस्त मुंबई में मेरे घर पर पहुंच गये. मैंने अपने घर की घंटी बजाई तो बहुत देर इंतजार करने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो मेरा एक दोस्त दोबारा अपनी एक ऊँगली से दरवाजे को खटखटाने लगा और तभी अचानक से दरवाजा खुल गया और मेरे दोस्त की उंगली मेरी मम्मी की नाभि में घुस गई और माँ के मुहं से उई की आवाज़ निकल गयी, क्योंकि माँ ने आकर दरवाजा खोल दिया और फिर मेरे दोस्त ने शरमाते हुए माँ की नाभि से उंगली को बाहर निकाल लिया, मेरी मम्मी ज्यादातर साड़ी पहनती है और उनकी नाभि हमेशा बाहर निकली रहती है.

फिर हम सब लोग मेरे रूम में आ गये तो मेरे दोस्त ने अपनी उंगली मुझे सुंघाई उसकी उंगली से मम्मी की नाभि की महक आ रही थी और मेरे दोस्त बोल रहे थे, वाह क्या पटाका माल है, क्यो रे तूने कभी आंटी को नहीं चोदा? तो मैंने बोला कि मन तो बहुत करता था, लेकिन कभी ऐसा कोई मौका हाथ ही नहीं लगा.

फिर में हम सबके लिए कोल्ड ड्रिंक्स लेकर मेरे कमरे में ले आई और अब कोई उनके गुलाबी होंठो को देख रहा था तो कोई उनकी गोल और गहरी नाभि को तो कोई माँ के तने हुए बूब्स को अपनी आखें फाड़ फाड़कर देख रहा था.

फिर मैंने अपने दोस्तों का परिचय मेरी माँ से करवाया और मैंने अपने सभी दोस्तों के नाम माँ को बताए और में बोला कि यह बाबा, जीतू, विपुल, नितिन, नीतू, चेतन, अजय है और फिर हम सभी बातें करने लगे. माँ ने पूछा तुम्हारे पेपर कैसे हुए? तो मैंने कहा कि हर बार की तरह बहुत अच्छे हो गए और हम सभी यहाँ पर अपनी छुट्टियाँ मनाने आए है.

तभी बाबा ने कहा कि आंटी आपकी बुटीक कैसी चल रही है? तो माँ बोली इस बार कुछ बिक्री ज्यादा रही है और जीतू ने पूछा आंटी आपकी बुटीक में क्या क्या आईटम मिलता है? माँ बोली ज्यादातर औरतो के आईटम है, उनके अंदरगारमेंट्स, ज्वलेरी, लॅडीस गारमेंट्स. फिर अगले दिन मुझे और मेरे 5 दोस्तों को एक काम से तीन दिन के लिए पुणे जाना था, इसलिए बाबा और जीतू माँ के साथ घर पर रुक गये, वो तीनों हमे ट्रेन में छोड़कर घर आ गए, जब वो घर जा रहे थे तो मैंने कहा कि जीतू कहीं चुदाई ना कर दे? फिर जीतू बोला फ़िक्र मत यार चूत को फाड़ देंगे.

उसके बाद तीसरे दिन में और मेरे 5 दोस्त पुणे से लौट आए, लेकिन माँ अभी सो रही थी, बाबा और जीतू ने बताया कि इन दो दिनों में तेरी माँ ने बहुत जमकर अपनी चूत को चुदवाया है और फिर उन्होंने वो सारी कहानी हमे बता दी. फिर वो लोग बोले उस दिन हम तुम सभी को ट्रेन में छोड़कर घर पर आ गए और माँ हमारे लिए खाना बनाने लगी.

उस दिन बहुत गरमी थी तो माँ ने अपने सारे गहने उतार दिए और वो किचन में खाना बनाने लगी और इधर मेरे दोस्त मम्मी की चुदाई का प्लान बना रहे थे और माँ भी यह सभी बातें महसूस कर रही थी और फिर माँ ने जीतू को आवाज़ लगाई कि किचन में ऊपर रखे डब्बे को उतार दे तो उसने अपनी तरफ से बहुत बार कोशिश की, लेकिन वो डब्बा नहीं उतरा और तभी उसने माँ से कहा कि वो उनको ऊपर उठाता है और वो डब्बा उतार ले.

फिर माँ बोली कि ठीक है और फिर जीतू में मम्मी को पेट की तरफ से पकड़कर ऊपर उठा दिया, इससे मम्मी की गहरी नाभि जीतू के मुहं तक आ गई और मम्मी की नाभि की महक जीतू की नाक में जा रही थी और मम्मी की नाभि की महक जीतू को बिल्कुल पागल कर रही थी तो जीतू ने मम्मी की नाभि पर अपने होंठ चला दिए और उसने माँ की नाभि का चुंबन ले लिया और मम्मी ने भी अपनी नाभि को अंदर खींच लिया, जिससे जीतू ने मम्मी की वो हरकत कोई भी विरोध ना होते हुए देख उनकी नाभि को चूस लिया.

फिर जीतू ने माँ को नीचे उतार दिया और तभी मम्मी ने हंसते हुए उससे कहा कि चल अब हट बदमाश मुझे खाना बनाना दे और जब खाना बन गया, तब वो दोनों सेंटर टेबल पर आ गये और माँ खाना लगाने लगी. मम्मी के दोनों हाथों में दो सब्जियो से भरे हुए कटोरे लगे हुए थे. तभी बाबा बोला कि आंटी क्या आप सलाद में डालने के लिए नींबू नहीं लाई.

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माँ हंसते हुए बोली कि मेरी नाभि से निकाल लो तो बाबा समझ नहीं पाया और उसने देखा कि मम्मी की नाभि में नींबू घुसा हुआ था. तब माँ बोली कि मेरे दोनों हाथों में यह कटोरिया थी, इसलिए मैंने यह नीबू अपनी नाभि में फंसा लिया, प्लीज तुम ही निकाल लो.

फिर बाबा माँ की नाभि से नींबू निकालने लगा, लेकिन वो नींबू बहुत टाईट हो गया था, इसलिए बाबा की उंगलियां माँ की नाभि से नींबू नहीं निकाल पाई. फिर जीतू ने माँ से कहा कि आंटी आप इधर आइए, में यह चाकू आपकी नाभि में डालकर नींबू निकाल देता हूँ और जीतू ने मम्मी की नाभि से वो नींबू बाहर निकाल दिया. फिर वो तीनों खाना खाते हुए बातें करने लगे और अब मम्मी भी उनके साथ बहुत ज्यादा खुल गई और वो बाबा से कहने लगी कि क्यों आज तक तुमने किसी लड़की के जिस्म को भी नहीं छुआ?

बाबा हंसने लगा और बोला नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं. फिर माँ बोली कि तो फिर मेरी नाभि को छूते समय तुम्हारे हाथ क्यों काँप रहे थे? यह बात सुनकर वो तीनो हंसने लगे. फिर उस रात को ज्यादा गरमी हो गई और मम्मी ने ए.सी. चला दिया.

फिर भी गरमी थी, इसलिए वो जीतू और बाबा से बोली कि बहुत गरमी है, इसलिए में तो नहाने जा रही हूँ और वो नहाने चली गई, मम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और माँ नंगी होकर अपनी चूत के बाल साफ करने लगी, मेरे दोनों दोस्त दरवाजे के एक छेद से सब देख रहे थे. उसके बाद मम्मी के बाहर निकलने से पहले वो दोनों वापस आ गए.

फिर मम्मी अपने रूम में गई और उन्होंने जालीदार ब्रा और पेंटी पहनी और फिर माँ ने अपनी नाभि में मालिश की और एक चैन को पहन लिया और फिर वो अपनी मस्त जवानी को कांच में देखने लगी और वो जैसे ही पलटी और उनका एक पैर फिसल गया. उनके चिल्लाने की आवाज़ को सुनकर मेरे दोनों दोस्त ऊपर उनके कमरे में आ गये और माँ को लेकर वो नीचे ड्रॉयिंग रूम में आ गये, जीतू ने माँ की कमर पर मूव लगाई और माँ कुछ देर में सही हो गई.

उसके बाद माँ ने जीतू से फ्रिज में रखी बियर लाने को कहा और फिर जीतू तीन गिलासो में बियर ला रहा था, थोड़ा सा असंतुलित हो जाने से कुछ बियर माँ के गोरे पेट पर गिर गई और उस बियर ने माँ की नाभि को भर दिया. फिर माँ जीतू से बोली कि जाओ कपड़ा लेकर आओ वरना मेरी पेंटी में इसका दाग लग जाएगा और जीतू कपड़ा लेने चला गया, लेकिन पास में लेटे हुए बाबा ने माँ की नाभि से उस बियर को चूस लिया और वो लगातार उनकी नाभि को चूसता रहा और माँ के मुहं से हल्की सी सिसकियाँ निकलने लगी और फिर जीतू आ गया.

फिर माँ बोली अब कपड़े की ज़रूरत नहीं है, बाबा ने मेरी नाभि में भरी बियर को चूस लिया. फिर बाबा बोला देखा तू तो आंटी की नाभि को अपने हाथों से छू पाया और मैंने तो इसको चूम भी लिया और चूस भी लिया. तब जीतू बोला कि बेटे हम भी तुम्हारे उस्ताद है, हमने तो आंटी की नाभि को पहले ही किस कर लिया था और उन दोनों की बात सुनकर माँ हंसने लगी.

फिर बाबा ने टी.वी. को चालू किया तो टी.वी. पर डीवीडी की वजह से एक ब्लूफिल्म आ रही थी, जिसमें दो आदमी एक औरत को चोद रहे थे तो जीतू बोला आंटी हमे भी प्लीज जन्नत का सुख दे दो. फिर माँ बोली कि हाँ ले लो मेरे बच्चों, में तो बहुत सालों से प्यासी हूँ, आज तुम मेरी चूत को फाड़ दो. अब बाबा ने माँ की ब्रा और पेंटी को खोल दिया, जिसकी वजह से माँ अब उन दोनों के सामने पूरी नंगी पड़ी थी और बाबा माँ के बूब्स को चूसने लगा और जीतू माँ की चूत को और बाबा माँ के बूब्स की निप्पल को खींचकर चूस रहा था