नीलू की एक रात की कीमत-2

Neelu ki ek raat ki kimat-2

अब अंकित उसके दूधिया बदन को अब बहुत ध्यान से देखने लगा क्योंकि ऐसा नाज़ुक, मुलायम बदन उसने अब तक कभी नहीं देखा था. वो नीलू को जगह जगह चूमने लगा और वो कभी उसके बूब्स को चूम लेता तो कभी उसकी निप्पल से सहला देता. कभी बीच बीच में वो पूरा उभार अपने मुहं में सामाने की कोशिश करता, लेकिन नीलू के बूब्स संतरे के समान के थे जो उसके मुहं में समा ही नहीं रहे थे और अब उसके मुहं से लार गिरने लगी और फिर वो दोनों हाथों से नीलू के बदन को मसलने लगा. अब तो नीलू पूरी तरह बेबस हो गयी थी और उसने अब विरोध करना भी छोड़ दिया था. दूसरे ही पल अंकित ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और पलंग पर लाकर लेटा दिया और खुद भी नंगा होकर उसके ऊपर झुक गया. नीलू बहुत दिनों से प्यासी थी जिसकी वजह से वो बिल्कुल नग्न होकर अंकित की हरकतों का मज़ा लेने लगी और अंकित अपनी जीभ से उसके सारे बदन को चाटने, चूमने लगा.

अंकित उसके हृष्ट पुष्ट संतरे जैसे बूब्स को चूस चूसकर अब बहुत थक चुका था. वो धीरे धीरे नीचे की तरफ खिसकने लगा और उसकी मदहोश कर देने वाली जांघो पर आ पहुँचा. उसने उस पर दो तीन दीर्घ चुंबन रसीद कर दिए. फिर वो उन टांगों को चाटते चाटते जांघो के बीच अपना मुहं घुसाकर नीलू की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा. उसे उसकी चूत का नमकीन सा स्वाद लगा और उसे जोश के साथ साथ अब बहुत मस्ती आने लगी वो और ज़ोर ज़ोर से अपनी जीभ को अंदर की तरफ घुमाने लगा. दोस्तों नीलू की चूत इस सुख से पहली बार परिचित हो रही थी इसलिए वो उससे कुछ कह नहीं सकी और वो अंकित की इस हरकत से इतनी उत्तेजित हो रही थी कि वो उसी उत्तेजना में अपना सारा बदन उछालने लगी और उसके मुख और साँसों से गरम गरम हवा बाहर निकालने लगी. अंकित रसिया था और वो एक रसिक की तरह नीलू के अंगों में प्यार जगा रहा था और नीलू गरम होती जा रही थी.

तभी वो बोली कि प्लीज़ अब बस करो मुझसे और सहा नहीं जा रहा है, अंकित ने अब यह बात सुनकर चाटना एकदम से बंद कर दिया और अपने लंड को एक हाथ से पकड़कर नीलू की चूत के ऊपर रगड़ने लगा जिसकी वजह से नीलू तड़प रही थी और वो प्लीज़ आह्ह्ह्हह अब बस करो, आहह सीईईइईई करने लगी. अंकित ने उसके दोनों पैरों को फैलाया और थोड़ा सा झुककर एक हल्का सा धक्का सा मार दिया और फिर लंड चूत में जाते ही नीलू आईईससस्स उह्ह्ह्ह माँ मर गई कर उठी और अंकित ज़ोर ज़ोर से धक्के पे धक्के लगाने लगा और उसके हर एक धक्को पर वो आईईईहह आआआआहह करने लगी क्योंकि ज़िंदगी में उसे ऐसा सुख कभी नहीं मिला था.

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फिर करीब पंद्रह मिनट तक धक्कों का प्रहार करते ही नीलू ने अपने दोनों पैरों को अंकित की कमर पर फंसाकर वो भी अब नीचे से धक्के मारने लगी और वो दोनों एक दूसरे को झूला झूलाने लगे. वो दोनों चरम पर थे कि तभी अचानक अंकित झड़ गया और गरम गरम सा एक झोंका नीलू को अपनी चूत में महसूस हुआ और अंकित ने गरमा गरम लावे से नीलू की चूत को भर दिया. नीलू अंकित को चूमने लगी और कहने लगी कि अंकित आज पहली बार में पूरी तरह से संतुष्ट हुई हूँ.

वो कहने लगा कि भाभी मेरा दिल अभी भरा नहीं है. तो वो बोली कि तुम्हे रोका किसने है, लेकिन मुझे तो अभी बहुत भूख लगी है, में कुछ खा लेती हूँ और उसके बाद हम प्यार करते है और इधर अंकित ने स्कॉच की बॉटल निकाली और पीने लगा और नीलू चखना लेकर पास में बैठ गयी. थोड़ी देर बाद अंकित ने नीलू को फिर से अपनी बाहों में भरकर बिस्तर पर लेटा दिया और अबकी बार उसने सहलाना, पुचकारना छोड़ दिया, फिर भी उसने नीलू को अपनी बाहों में लेकर अपने सुर्ख होंठ उसके होंठो पर रख दिए और चुंबन का आदान प्रदान करने लगा और फिर दोनों हाथ से उसके कठोर बूब्स को दबोचने लगा, जिसके कारण नीलू के मुहं से आह उह्ह्हह्ह की आवाज निकलने लगी.

अंकित को अबकी बार तो स्कॉच का नशा पूरी तरह चढ़ गया था और इसके कारण उसका लंड पहले से फुकारे मारने लगा और दूसरे ही पल अंकित नीलू पर सवार हो गया और उसने एक ही निशाना लगाकर एक ही धक्के में अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया फ़क्कककक और फिर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और अब के प्रहार में नीलू को कुछ वजन लग रहा था और फिर भी उसे उस चुदाई में पहले से अधिक आनंद मिल रहा था और साथ ही साथ उसे दर्द भी बहुत हो रहा था.

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बीच बीच में अंकित रुक जाता और फिर स्कॉच के दो तीन पेग मारकर वो वापस आया. वो अपनी मंज़िल की तरफ दौड़े जा रहा था और कुछ ही पलों में वो अब रुक गया और बिल्कुल निढाल हो गया. उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गयी और करीब चार पांच बार चूत के अंदर बाहर करने से अब नीलू भी बहुत थक चुकी थी और उसके बदन का एक एक अंग थक गया था. फिर वो नीलू को ज़बरदस्ती चोदने लगा. नीलू ने उसके सामने बहुत हाथ पैर जोड़े, लेकिन उसके ऊपर उसकी बातों का कुछ भी असर नहीं हुआ जिसकी वजह से नीलू ने अब अपना शरीर बिल्कुल ढीला छोड़ दिया, लेकिन अंकित ने जैसे ही अपना मोटा और लंबा लंड बाहर निकालकर फिर से नीलू की चूत में प्रवेश कराया नीलू दर्द से एकदम करहाने लगी, शराब के नशे से अंकित का लंड बहुत कठोर हो गया था और अब वो उसकी गद्देदार चिकिनी चूत पर जोरदार धक्के लगाने लगा. नीलू से सहन नहीं हो रहा था और अंकित आज उसको एक अलग तरीके से चोदना चाहता था.

उसने नीलू से कहा कि मेरे पास एक तरीका है उससे तुम्हे दर्द बिल्कुल भी नहीं होगा और में एक अलग आसन से तुम्हे चोदना चाहता हूँ और अब तुम मेरी बात मान लो तुम्हे तकलीफ़ नहीं होगी. दोस्तों नीलू सब कुछ समझती थी कि अंकित को चूत चोदने की बहुत सारी कला आती है इसलिए वो अंकित से बोली कि तुम्हे जैसा अच्छा लगे वैसा करो और यह बात सुनकर उसने नीलू को पेट के बल लेटा दिया जिसकी वजह से नीलू का मुहं नीचे और पीठ ऊपर हो गयी और अब अंकित पीछे से नीलू की चूत में अपने लंड से जोरदार प्रहार करने लगा, लेकिन अब नीलू को पहले जैसा दर्द नहीं हो रहा था और अंकित अपनी मनमानी करने में लगा हुआ था.

तभी उसे एक शरारत सूझी और पीछे से करते करते वो कभी कभी नीलू के दोनों चूतड़ के बीच के छेद पर भी अपना मोटा और लंबा लंड छुआ देता और एक दो बार ऐसा स्पर्श किया, लेकिन नीलू कुछ नहीं बोली. अंकित अब जान गया कि अब उसे क्या करना है और वो उसकी गांड के छेद में भी अपने लंड को घुसाने का प्रयास करने लगा और एक बार थोड़ा थोड़ा, करते करते उसने ज़्यादा ही लंड उसकी गांड में घुसा दिया. नीलू एक बार ज़ोर से चीखी और फिर कुछ देर के बाद मना करने लगी तो अंकित बोला कि ग़लती से गांड के छेद में घुस जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, लेकिन अंकित यह सब ग़लती से नहीं करता था बल्कि यह उसकी एक सोची समझी साजिश थी.

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अब उसने मुहं से ढेर सारा थूक निकाला और अपने लंड पर लगाकर थोड़ा पीछे हटकर एक ज़ोर का धक्का मारा जिसकी वजह से नीलू एकदम से कांप उठी. उस कठोर लंड के उसकी नाज़ुक चूत के अंदर जाते ही वो बहुत ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी और उसने अंकित को ऐसा करने से मना किया, लेकिन वो तो वासना के नशे में चूर था. दूसरी बार उसने धक्का मारा, लेकिन नीलू से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने एकदम से पलटकर ज़ोर का धक्का दिया तो अंकित नीचे गिर पड़ा और उठा ही नहीं. उसने नीचे उतरकर देखा तो अंकित के सर से खून निकल रहा था. अंकित ने अपना सर दोनों हाथों से पकड़ लिया. उसने फटाफट अंकित के सर पर एक पट्टी को बाँध दिया और नीलू बहुत घबराई सी अपने कमरे में जाकर सो गयी.

फिर वो सुबह उठी देखा तो अंकित अपने कमरे में नहीं था. केवल वहां पर एक चिट्ठी पड़ी हुई थी जिसमे लिखा हुआ था कि भाभी वो दो हज़ार रुपये आकाश ने नहीं भेजे थे, वो मेरे रुपये थे और तुम्हे पाने के लिए मैंने चाल चली थी. में तुम्हारी जवानी को एक बार पाना चाहता था और में अब तक नहीं जानता कि में तुम्हारे पास ना जाने कैसे आ गया, प्लीज तुम मुझे माफ़ कर देना. तभी नीलू के हाथों से वो चिट्ठी नीचे ज़मीन पर गिर पड़ी और वो एकदम भौंचक्की रह गयी और मन ही मन बड़बड़ाने लगी कि मेरी चुदाई करके तुमने मुझे बहुत खुश किया उसके सामने यह कीमत कुछ भी नहीं.

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