नीचे वाली भाभी की जोरदार चुदाई

(Niche Wali Bhabhi Ki Jordar Chudai)

नमस्कार दोस्तों,कैसै है आप सब। में आशा करता हुँ कि आप लोग अच्छे होंगे
। यह मेरी पहली कहानी है जिसमे मैनें नीचे वाली भाभी की चुदाई की है ।मेरा नाम बाबु भाई(बदला हुआ नाम) है।मै भोपाल से हुँ। बात तब कि है जब मै18 साल का था । पहले मै अपने बारे में बता देता हूँ। मैं दिखने में सामान्य हुँ। मेरे लंड का साइज 6.5 इंच हैं। मेरे घर के नीचे एक परिवार आया था किराये पर । उनके
परिवार मे तीन लोग थे। पति,पत्नी और एक बच्चा । जब मैनें पहली बार भाभी
को देखा तो मैं देखता ही रह गया । एकदम गोरी ,बङे-बङे चुच्चे और बङी चुतङ। मतलब उनका साईज 36-30-38 । मैने पहले ही दिन-से सोच लिया था कि भाभी कि एक बार चुदाई तो करनी है ।

मैं भाभी को रोज देखता था। मैं रोज़ सोचता था कि भाभी को कैसे पटाऊ। मेरी हर तरकीब फेल हो रही थी। मगर भगवान के घर देर हैं अंधेर नहीं। मेरा उन लोगो से अच्छी बात बन गयी ।भाभी के पास मेरा नम्बर भी था । एक दिन भाभी का फोन आया और कहने लगी कि
भाभी-बाबु तुम मुझे मार्केट तक ले जा सकते हो क्या?
मै-जी भाभी जरूर ।
फिर हम दोनों मेरी बाईक से निकल गए । मैं बार-बार brake लगा रहा था । फिर
उन्होनें सामान लिया और हम लोग आ गए । मैं अपने आप को बोहोत लकी मान रहा था। उसके बाद से हमारी बात चालू हो गई। हम फोन पे भी बात करने लगे । वो एक दिन मुझसे पुछती हैं कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड हैं क्या तो मैने भी बोला की ‘नहीं है कोई भी ‘। एक दिन उन्होनें मुझे अपने घर पर बुलाया । मेंने थोड़ा सोचा की जाना सही है कि नही? फिर मैं सोचा कि जो होगा देखा जाएगा। मै तुरन्त चला गया । मै गया तो कहने लगी कि
भाभी- आ गए तुम ?

मै- आप बुलाए और हम ना आए ऐसा हो सकता है क्या । फिर वो कहने लगी कि -बैठो मै चाय लाती हुँ। जब वो चल रही थी तो मैं उसकी गांड देख रहा था।
हम दोनों ने चाय पिया और बात करने लगे। फिर उन्होनें मुझसे पुछा कि-
तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंद है? तो मैने भी मौका देखकर बोल दिया कि-आप हो ना

वो शर्मानै लगी और कहने लगी – मै तुम्हे इतनी अच्छी लगती हुँ? मैने कह
दिया – आप तो मुझे पहले दिन से ही पसंद हो बस बोल नहीं पाता था। फिर वो एक दम चुप हो गई तो मैं उनके पास गया। फिर मैने उनके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- क्या आप मुझे पसंद करती हो?
फिर वो मेरी तरफ देखी और मेरी पास आ गई और मुझे चुमने लगी और कहने लगी-
मैं तो तुमसे बोहोत प्यार करती हुँ। हम दोनों 15 मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे। फिर हम दोनों बेडरूम चले गए । मै उसे चुमने लगा । वो मेरे उपर चड़े जा रही थी। मेने उसके ब्लाउज़ के ऊपर से चूचे दबाने लगा। फिर उसने मेरे कपङे उतारे और मैने उसके उतारे।

वो सिर्फ काली ब्रा और काली पेंटी मे थी । मै उसे चुम ही रहा था ।एक हाथ से मम्मे दबा रहा था
और दूसरें हाथ से चुत मे उंगली कर रहा था । वो कराहने लगी। वो ‘आह आह आह आह आह ‘ करने लगी थी। फिर उसके ब्रा और पेंटी उतारे। वो मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी। वो मेरा लंड देखकर कहने लगी-इतना बङा मेरे पति का तो बोहोत छोटा हैं । फिर वो उठी और चुसने लगी। मै भी उसकी चुत
चाट रहा । हम दोनों एक साथ झङ गए। थोङी देर उसे चुमता रहा और दुध दबाता रहा । फिर मेरा लंड खड़ा हो गया । मै झटसे चुत के पास गया और लंड चुत पर रगड़ने लगा । वो तड़पने लगी थी। वो कहने लगी की मुझे और मत तड़पाओ। लंड को धीरे-धीरे डालने लगा। चुत पे लंड जाते ही वो कहनें
लगी-आराम से करो दर्द हो रहा है।मैं थोडा रुका और चुमने लगा। फिर थोड़ी देर बाद धीरे धीरे चोदने लगा। मै उसे चोदे जा रहा था। वो कहने लगी-चोदो
मुझे,फाङ दो मेरी चुत को,आह आह आह ।

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पूरे रूम में आवाज़ आ रही थी। 20-25 मिनट बाद मै झड़ गया तब तक वो दों बार
झड़ चुकी थी। फिर थोड़ी देर मैं उसके ऊपर लेटा रहा। मेरा फिर से मूड बन गया। वो बोलने लगी कि अब नहीं मगर मैं कहाँ मानने वाला था। मैं उसके गांड पे हाथ फेर रहा था। वो बोलने लगी की ‘तुम अब क्या पीछे कुछ करोगे’ । मैने बोला की ‘हाँ’ तो वो मना करने लगी। उसे बोहोत मनाने के बाद वो मान गयी मगर उसने शर्त रखी थी की अगर ज्यादा दर्द होगा तो नहीं करने देगी। मैने उसे समझाया कि थोड़ा दर्द होगा बस थोड़ा झेल लेना। मैने वैसलीन उठाई और उसके गांड पर लगा दिया। फिर मैं उसे किस करने लगा और उसके चूचे दबाने लगा। वो गरम होने लगी। मैने उसे बोला की घोड़ी बन जा। वो तुरन्त घोड़ी बन गई। मै लंड डालने लगा धीरे धीरे। जैसे थोड़ा अन्दर गया तो वो आगे होने लगी। मैने उसे कस के पकर के रखा। फिर मैं उसे थोड़ी देर चुमता रहा जब तक वो सामान्य ना हुई।

फिर मैने एक झटका दिया तो वो रोने लगी। बोलने लगी की इसे बाहर निकालो। मैने उसे कस के पकर के रखा था। मैने फिर एक आखरी झटका दिया तो वो चिल्लाने लगी। मैं थोड़ी देर उसे कुछ नहीं किया। जब देखा की वो सामान्य हो गयी हैं तो झटके देने लगा। वो हर झटके पर ‘आह आह आह आह बाबू, चोदो मुझे, मेरी गांड फार दो, मैं तुम्हारी हुँ’ । पुरे घर पे आवाज गूजने लगी। 15-20 मिनट बाद मेरा निकलने वाला था तो मैने पुछा कि कहाँ निकालू। वो बोलने लगी की अन्दर ही निकाल दो फिर मैं उसके गांड में झड़ गया। फिर हम एक दूसरे को पकर कर सो गए। एसे करते करते शाम के चार बज गई । उसके बाद हमें जब भी मौका
मिलता है तब हम चुदाई करते है । आप सभी को अगर कहानी पसंद आए तो मुझे मेल
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