पति के दोस्त से चुदी

(Pati ke dost se chudi)

हेलो दोस्तों, मैं अंजली. आप लोगो को मैं तो याद ही हुंगी. मैंने अपने और अपने पति रजत के बारे में मतलब सेक्सी व्रतांत के बारे बहुत बार बताया है. आज भी मैं आपको अपने बारे में बता रही हु. मैंने रजत को इस बारे में पहले तो नहीं बताया, लेकिन कई साल बाद रजत को उस बारे में बताया. दोस्तों, मैं आपको पहले एक बार फिर से अपने बारे में बता देती हु. मैं एकदम गोरी – चिट्टी पंजाबी औरत हु और मेरी फिगर ३६-३०-३८ है. मेरी गांड पीछे से उभरी हुई है और मेरी सोसाइटी के सारे मर्द मेरे दीवाने है.

ये बात है उस समय की है, जब रजत ने अपने दोस्तों को घर पर डिनर के लिए बुलाया था. रजत का एक दोस्त था रणजीत. रणजीत हरियाणा से और लम्बा – चौड़ा गबरू जवान था. उसकी शादी होकर टूट चुकी थी. रजत ने बताया था, कि उसकी बीवी उसको शादी के कुछ ही महीनो बाद अपने घर चली गयी थी. रजत कह रहे थे, कि कुछ सेक्स प्रॉब्लम है. रणजीत को देख कर मुझे ऐसा कुछ नहीं लगा. जब वो घर आया, तो मैं तो बस देखती ही रह गयी. रजत तो अच्छी कदकाठी वाले है और उनकी हाइट ६ फिट से ऊपर है. लेकिन, रणजीत उनसे भी ज्यादा फिट थे और लम्बे – चौड़े भी.

मेरा रणजीत को इस तरह से देखना, शायद उनको अजीब लगा. लेकिन मेरी तरफ देख कर रजत मुस्कुरा रहे थे. रजत मेरे पास आये और बोले – इसका नंबर भी लगाने का इरादा है क्या? मैंने रजत की तरफ देखा, तो प्यार से एक थप्पड़ मारा और बोली – अभी तो नहीं. बाद में पता नहीं. लेकिन सच में, मेरा दिल रणजीत की पर्सनालिटी पर फिसल चूका था. मैं पूरी पार्टी में उसे ही घुर रही थी और शायद वो भी मेरी हवस को समझ गया था. रजत अपने दोस्तों के साथ बिजी थे और दारु भी काफी ज्यादा पी चुके थे. मैं अब बोर होने लगी थी और फिर ऊपर अपने की तरफ जाने लगी. रणजीत सब को छोड़ कर और उनकी नजरे बचा कर मेरे पीछे – पीछे रूम में आ गया और मेरे कमरे में घुस गया.

मैंने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया हुआ था. मैं कपड़े बदल रही थी. मैंने साड़ी उतार कर पलंग पर डाली हुई थी और उस समय, मैं सिर्फ ब्लाउज में थी और पेटीकोट में थी. मुझे बहुत गर्मी लग रही थी, तो मैंने अपनी ब्लाउज के बटन खोल रखे थे. रणजीत बहुत आराम से कमरे में घुसा और बिना किसी आवाज़ के कमरे का दरवाजा बोल्ट कर दिया. फिर वो मेरे पीछे आया और मेरी कमरे में हाथ डालकर मुझे पकड़ लिया. उसने मुझे अपने से चिपटा लिया. मैंने उसको बिना देखे ही कहा – आप यहाँ क्यों आ गये? आपके दोस्त क्या बोलेंगे? उनको बुलाकर, आप अपनी बीवी के साथ कमरे में मस्ती कर रहे हो?

वो चुप रहे और मैं उनके खड़े लंड का तनाब अपनी गांड पर महसूस कर रही थी. उन्होंने अपने होठो को मेरी गर्दन पर रख दिया. मुझे कुछ अलग अहसास हुआ, तो मैंने बोला – आज कुछ अलग है. तुम्हारालंड पहले से कुछ मोटा हो गया है. फिर, उनके चूसने से मैं गरम होने लगी थी. अचानक कुछ दिमाग में आया और मैं एकदम से पलटी, तो मैं चौक गयी. मैं रजत की नहीं, रणजीत की बाहों में थी. रणजीत केवल अंडरवियर में थे. उनके लंड का उभार बहुत ज्यादा बड़ा था और उनकी छाती के बाल उनकी मर्दानगी बया कर रहे थे. मैं तो उनको देख कर मदहोश सी हो गयी थी. लेकिन फिर एकदम से होश में आई.

अब तक रणजीत मेरी आँखों में उनको लेकर हवस को पढ़ चुके थे और उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लेकर एकदम से दबा दिया और मेरा ब्लाउज निकाल दिया और ब्रा का हुक भी खोल दिया. मेरे ३६ इंच के चुचे एकदम से बाहर आ गये. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. रणजीत ने सब कुछ एकदम से किया था. मेरे कुछ सोचने से पहले ही, रणजीत ने अपने होठो को मेरे होठो पर रख दिया और मस्ती में चूमने लगे. उनके चूमने का अंदाज़ बहुत ही कामुक था और मैं एकदम से गरम हो गयी. उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ा और अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया.

बाप रे… क्या गरम लंड था.बी बहुत ही बड़ा और एकदम कड़क. अब मुझे समझ आ गया, कि उनकी बीवी उनको क्यों छोड़ गयी. वो सेक्स की दीवानी नहीं होगी और रणजीत की जबरदस्ती नहीं सह पायी होगी. लेकिन उसमे उसकी कोई गलती नहीं थी. रणजीत थे ही इतने हॉट एंड सेक्सी. अब रणजीत ने एकदम से मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया और मेरी पेटीकोट को पकड़ कर खीच लिया. उन्होंने अपने अंडरवियर को उतार दिया और उनका लंड मेरी आँखों के सामने झूलने लगा. बाप रे… कम से कम ९ इंच का होगा और ३-४ इंच चौड़ा भी होगा. एकदम सीधा और किसी बेट की तरह. फिर उन्होंने मेरी टांगो को खीचा और मेरे टांगो को फैला लिया और अपनी जीभ पेंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर रख दी.

बार रे… क्या मस्त चूम रहे थे वो और फिर एकदम से एक ऊँगली पेंटी के ऊपर से ही मेरी चूत में डाल दी. आआआआ मेरे मुह से जोरदार चीख निकली आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मर गयीआआआआआआ ईईईईईईस्सस्सस… फिर उन्होंने एकदम से मेरी पेंटी को खीच लिया और मुझे नंगा कर दिया. मेरी साफ़ और चिकनी गुलाबी चूत को देख कर उनके चेहरे की मुझे नज़र आ गयी और उन्होंने एकदम से मेरी चूत पर अपनी जीभ लगा दी. उन्होंने अपने दोनों हाथो से मेरी चूत को खोला और अपनी जीभ को एकदम से अन्दर घुसा दिया. मैं तो एकदम से तड़प उठी और मेरी मुह तेज स्स्स्सस्स्स्स आआआआ निकल पड़ा और मैं ने अपने हाथो से उसके बालो को पकड़ कर खीच लिया.

मैं तो जैसे मरने ही वाली थी. मैं रणजीत को कहा … और मत करो. डाल दो अब. और नहीं सहा जा रहा. रणजीत उठे और अपने लंड को लेकर मेरी चूत पर घिसने लगे और घिसते – घिसते एकदम से उन्होंने अपने लंड को धक्का दे दिया. बाप रे… उनका लंड एकदम से तेजी से मेरी चूत को चीर कर मेरी बच्चेदानी से जा टकराया. मेरे मुह से  आआआआआआआ आआआआआआआआअ मर गयी………. निकला. लेकिन, मैंने अपने हाथो से अपने मुह को बंद कर दिया. रणजीत मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे और तेजी से धक्के मार रहे थे.

मुझे तो पता नहीं क्या होने लगा था. मैं कई बार झड़ चुकी थी और अब उनके धक्के नहीं सह पा रही थी. फिर रणजीत के धक्को की स्पीड तेज हो गयी और उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत में ही उतार दिया. उनका माल इतना सारा था, जैसे उन्होंने सालो से चूत का स्वाद नहीं लिया था. बहुत गरम था और फिर उन्होंने एकदम से अपना लंड बाहर खीच लिया और मुझे बिस्तर में नंगा ही छोड़ कर बाथरूम में चले गये. फिर वो लंड को साफ़ करके बाहर आये और कपड़े पहन कर नीचे चले गये.

मैं थोड़ी देर में उठी. लेकिन मुझे दर्द कफी होने लगा था. मैंने अपने कपड़े लिए और बाथरूम में नहाने के लिए चली गयी. मैं थोड़ी में कपड़े चेंज करके नीचे गयी और देखा रजत के सारे दोस्त जा चुके थे और वो सोफे पर सोये. मैं उनको वहीं छोड़ कर वापस रूम में आ गयी और सो गयी. मैं सुबह उठी, तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. उस रात मेरी रजत से भी अच्छी चुदाई हुई थी. रणजीत से सेक्स का मौका मुझे फिर नहीं मिला. लेकिन, आज भी मुझे जब रणजीत का लंड याद आता है, तो मैं एकदम से गीली हो जाती हु.