सोनी की सोनी-सोनी कुंवारी चूत 3

Soni ki soni soni kunwari chut-3

पिछली घटना को काफ़ी दिन हो चुके थे।

अकेलेपन का लाभ लेते हुए हम चुम्माचाटी कर लेते थे, पर कभी इतना वक्त नहीं मिलता था कि चुदाई हो पाये।

सोनी के तेवर अब बदलने लगे थे। अक्सर जब भी मौका मिलता वो ही पहल करने लगी थी, ना ही मैं उसे टालता था।

कई बार उसने ब्लु फ़िल्म की भी मांग की, मैंने उसे कई अच्छी-अच्छी एचडी फ़िल्मस डाउनलोड करके दी।

हम अब खुल कर बात करते, मैसेज में भी सेक्स चैट करना रोज़ का काम हो गया था।

मेरी अच्छी कट रही थी।

पर अच्छा वक्त बहुत जल्दी निकल जाता है..

मेरी छुट्टियां खत्म होने को थी और मुझे वापस अहमदाबाद जाना था और अब तक मुझे सोनी को चोदने का मौका नहीं मिला था।

क्या करूँ? कुछ समझ नहीं आ रहा था।

एक दिन उसी ने मुझे मूवी के लिए ईन्वाइट किया, मैंने फ़ट से हाँ कर दी।

उसने शाम को मुझे कहाँ जाना है वो और टाईम मैसेज में बता दिया।

मैंने ओके कर दिया, और फिर सोचने लगा यही तो मौका है।

मुझे एक तरीका मिल गया।

मैंने जल्दी से निखिल को फ़ोन किया और रात को ही उसके पुराने फ़्लेट की चाबी और साथ ही कोन्डम के दो पैकेट भी ले आया, ताकि वो कुछ होने का बहाना ना बना पाये।

उसने मुझे दोपहर का वक्त दिया था, जब मैं थियेटर पहुँचा तो वो वहाँ पहले से ही पहुँच चुकी थी।

हालाँकि उसने चेहरे पर दुपट्टा बांध रखा था पर मैं उसे पहचान गया।

मैंने बाईक पार्किग में लगाई और जल्दी से उसके पास पहुँचा। तब उसने दुपट्टा निकाल दिया।

मैंने उसे गौर से देखा, उसने सफ़ेद टी-शर्ट पहनी थी जिसके आरपार मैं उसकी सफ़ेद-लाल ब्रा आराम से देख पा रहा था और टाईट जीन्स केप्री पहन रखी थी।

इतना देर से क्यों आयें? मैं कब से खडी हूँ। वो मुँह बनाकर बोली।

टाईम से तो पहुँचा हूँ यार। मैंने जवाब दिया।

फिर मैंने बात बदलते हुए कहा – वैसे मेरा माल आज काफ़ी जच रहा है।

वो मुस्कुराने लगी।

मैंने पूछा- घर पर क्या बोला है?

‘मूवी का ही बोला है, पर फ़्रेन्डस के साथ जा रही हूँ बोला था।’ उसने जवाब दिया।

तो आज अचानक मूवी का प्लान कैसे बना लिया?

पता था तुम भूल जाओगे, आज तेरे माल का जन्मदिन है – उसने कहा।

ओह सॉरी-सॉरी, हेप्पी बर्थडे जान, मैं भूला नहीं था बस विश करना भूल गया था – मैंने बात संभालते हुए कहा।

तुम तो रहने ही दो, चलो टाईम हो गया है – वो बोली।

फिर हम अन्दर गये।

ये फ़िल्म दो हफ्ते से चल रही थी तो कुछ ही लोग थे इस स्क्रिन में।

हमारी सीटे आगे थीं, पर जब मूवी शुरू हुई तो हम उठकर पीछे आ गये। इस लाईन में कोई नहीं था, और आगे उस कोने में एक कपल बैठा था।

जब हम सीट पर जा बैठे तो मैंने सोनी से कहा- करीब आओ एक बात बताऊँ, वो करीब आई तो मैंने उसके होंठों को चुम लिया – हेप्पी बर्थडे, वो जवाब मे बस मुस्कुराई।

वो मेरी बाई तरफ़ की सीट पर थी, उसने मेरा बाजू पकड़ रखा था और कंधे पर सर रखा हुआ था।

कुछ देर बाद मैं उसकी जांघों पर हाथ फ़िराने लगा और धीरे-धीरे करते उसकी चूत पर जा पहुँचा।

यह कहानी आप HotSexStory.xyz में पढ़ रहें हैं।

पर मोटी जीन्स केप्री होने की वजह से मुझे दिक्कत हो रही थी। तो मैं उसे छोडकर चुचों पर हाथ अजमाने लगा, वो मस्त होने लगी और वो आगे बढकर मेरे होंठों को चुसने लगी, मैं भी उसका साथ देने लगा।

थोड़ी देर यही चलता रहा। मुझे इस गुफ़ा मे एन्ट्री मारनी है – मैंने उसकी चूत पर हाथ रख कर कहा।

अभी? यहाँ कैसे? उसने पूछा – सब मुझे पर छोड दो मैंने जवाब दिया।

अब मूवी की किसको पडी थी, हम बाहर निकल आये। मैंने पार्किग से बाईक ली और चल पडे निखिल के पुराने फ़्लेट की ओर। उसने चेहरे पर दुपट्टा बांध लिया।

मेरी स्पोर्ट्स बाईक की पिछली सीट ऊँची है तो वो आगे झुक कर मुझे कसके पकड़ कर बैठी थी, उसके चुचे मेरी पीठ से चिपके हुए थे। पुरे रास्ते मेरा लंड खड़ा रहा।

निखिल का फ़्लेट बिल्डिंग के दूसरे माले पर था, उस बिल्डिंग के ज्यादातर फ़्लेट बंद पडे रहते थे।

उस फ़्लोर पर तीन और फ़्लेट थे, दो पर ताले लटके थे, एक खुला था पर दरवाजा बंद था, हम जल्दी से अन्दर पहुँचे और दरवाजे की सारी कडीयां लगा दी।

वहाँ अब भी कुछ सामान पड़ा था, और थोड़ी बदबू भी थी, पर इससे हमे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, हम अन्दर वाले कमरे मे गये, वहाँ एक बिस्तर तो था पर गद्दा नहीं था, बस बिस्तर को धूल से बचाने के लिए एक बडी चद्दर डाल रखी थी।

मैं बिस्तर पर जाकर बैठ गया, और सोनी जो पास ही खडी थी उसका हाथ पकड़ कर खिंचा और गोद में बिठा लिया और फिर एक-दूसरे के होंठों का स्वाद लेने लगे।

हमारी जीभें आपस में खेलने लगीं, कभी मैं उसे मुँह में ले कर चूसता तो कभी वो।

अब मैंने जल्दी से उसकी टी-शर्ट निकाल दी और फिर चुमते-चुमते लेट गये, वो मेरी ऊपर थी।

मैं उसके बालों मे हाथ फ़िरा रहा था, उसने बस एक बक्कल से अपने बाल बांध रखे थे, मैंने वो निकाल दिया, उसके बाल मेरे चेहरे पर आने लगे, जिसमे से बहुत अच्छी खुश्बु आ रही थी।

फिर मैं हाथ फ़िराते हुए उसकी पीठ पर ले गया और ब्रा खोल दी, उसके मम्मे आजाद हो गये, मैं उनको जोर-जोर से चुसने-चाटने लगा, वो सिसकारियाँ लेने लगी।

इतने में ही वो अकडने लगी, मुझे लगा जैसे वो झड़ रही हो।

मैंने थोड़ी देर बाद उसकी केप्री खोल दी, और उसने खुद ही उसे निकाल दिया।

मैंने अपनी टी-शर्ट पहले ही निकाल दी थी पर पैंट नहीं निकाली थी। वो उसे निकालना चाहती थी पर मेरा ध्यान उसके चुचों पर था, फिर परेशान होकर उसने कहा – अरे यार, खोलो ना इसे।

उसे देखकर मेरी हँसी छुट गई। मैंने खुद ही पैंट और चड्डी निकाल दी।

मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया, वो गौर से उसे देखने लगी।

मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और वहाँ अपने हाथों का जादू बिखेरने लगा।

वहाँ पहले से ही गीला था।

उसकी हालत खराब हो रही थी, मेरा भी यही हाल था।

मैंने उसे लंड मुँह में लेने को कहा पर वो मना कर रही थी।

मैंने थोड़ा जोर दिया तो वो झुक के लंड के सुपाडे पर चूमियाँ देने लगी, वो थोड़ा हिचकिचा रही थी।

थोड़ी देर करने के बाद उसने छोड दिया, मैंने भी कुछ नहीं कहा। फिर मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी।

उसकी छोटी सी चूत बहुत प्यारी लग रही थी। मैं जमीन पर घुटनो के बल बैठ गया और उसके पैर खोल दिये, मैंने जैसे ही वहाँ झुककर होंठ लगाये वो उछल पडी और अपने पैरों के बीच मेरा सर दबा दिया।

मैं कुछ्देर बाद उठा और कोन्डम लगा कर चुदाई के लिए तैयार हो गया।

मैं खड़ा हो कर बिस्तर पर बैठ गया और उसको अपनी तरफ़ खींच लिया, फिर मैं अपने लंड को उसकी चूत की दरार पर रगडने लगा, वो पागल होने लगी। जब मैंने लौडा अंदर डालने की कोशिश की तो चूत टाईट होने की वजह से दिक्कत हो रही थी।

उसने अपने हाथों से मेरा लंड पकडा और छेद में अच्छे से लगा दिया, तब ही मैंने एक जोर का झटका दिया तो लंड चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया, उसकी चीख़ निकल गई।

फिर मैंने थोड़ा रुक-रुक के चार-पाँच झटके दिये और उस दौरान उसके मुँह पर हाथ रख दिया था, क्यूँकि मुझे डर था की सामने वाले फ़्लेट में कोई सुन ना ले।

मैं थोड़ी देर रुका और हल्के-हल्के शोट मारना शुरू कर दिए, जब लंड अन्दर-बाहर हो रहा था तब मैंने देखा कि उस पर खून लगा था, पर मैंने उसे कुछ नहीं बताया।

धीरे-धीरे मैंने धक्को की गती बढ़ा दी, वो मज़े लेकर चुदने लगी। वो एक और बार झड़ गई, कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। मैं काफ़ी थक गया था तो उसके बगल में ही लेट गया, हम दोनों ही थके थे। उसकी साँसे तेज चल रही थी।

कहानी जारी है ..

HotSexStory.xyz में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!