सोनी की सोनी-सोनी कुंवारी चूत 4

Soni ki soni soni kunwari chut-4

मैं एक और राउन्ड खेलना चाहता था, पर वक्त नहीं था।

मैं उठा और कोन्डम को निकाल दिया, उस पर थोड़ा सा खून लगा था, मैंने सोनी को दिखाया और कहा – तो, तुमने वर्जिनीटी खो दी और कोन्डम खिड़की के कोने में रख दिया, और चद्दर से लंड साफ़ किया।

फिर हम दोनों ने कपडे पहने और निकल लिये, सोनी को चलने में तकलीफ़ हो रही थी। फिर भी हम जितना जल्दी हो पाये बाईक पर बैठे और मैंने घर की तरफ़ बाईक तेजी से दौडा दी।

सोनी के लिये रास्ते में एक मेडीकल स्टोर से कुछ दर्द निवारक दवाई भी ले ली।

मैंने सोनी को घर से कुछ दूर उतारा और खुद एक दोस्त के घर की ओर चल पड़ा ताकि हम अलग-अलग घर पहुँचे।

तीन दिन के बाद मुझे वापस जाना था अहमदाबाद, तब तक जितना हो पाये उतने मज़े लिये। फिर मैं अहमदाबाद चला गया, कभी-कभी एक दो दिन के लिये घर आता रहा।

फिर गर्मियों में वापस आ गया।

अक्सर हम लोग गर्मियों में छत पर सोने जाते थे और सोनी भी ऊपर ही सोने आया करती, हालाँकि उसके माता पिता कभी ऊपर सोने नहीं आते थे पर सोनी कभी अकेली नहीं होती थी।

एक ऐसे ही दिन की बात है, मैं और मेरा भाई ऊपर सोये थे, मैं और सोनी हमेशा की तरह देर रात तक चैट कर रहे थे।

मैंने उसे मिलने को कहा तो उसने कहा कि मिलना तो वो भी चाहती है पर आजकल उसका बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, और जब भी बाहर जाती है कोई न कोई उसके साथ होता है।

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मैंने मिलने की जिद्द पकडी तो उसने कहा – इतना ही है तो मेरी छत पर आ जाओ, है हिम्मत? बोलो?

अब बात इज़्ज़त पर आ गई थी तो मैंने भी हाँ कर दी। रात के करीब सवा एक बज रहे थे।

उसके पास के चार घर आपस में सटे हुए है तो हम आसानी से एक छत से दूसरी छ्त पर जा सकते हैं।

मैं जल्दी से नीचे उतरा, चुपके से दरवाज़ा वगैरह खोला और आखिरी घर के पास चला आया, उनकी ऊपर जाने वाली सीढीयाँ बाहर से जाती थी, और हमेशा खुली रहती थी।

मैं उसके घर की पास वाली छत पर पहुँचा जो उसकी छत से थोड़ी नीची थी। पहुँचकर मैसेज किया तो वो डर गई, और मुझे वापस जाने को कहने लगी। वो अपनी बहन के साथ सोई थी।

मैंने जाने से मना कर दिया और उसे बुलाने लगा, फिर वो मान गई और नीचे उतर आई। उसने ढीलीढाली टी-शर्ट और पयजामा पहन रखा था।

जैसे ही वो आई मैंने उसे दबोच लिया, और उसकी गाँड पर हाथ फ़िराने लगा। उसने कोई विरोध नहीं किया।

क्यों, किसकी हिम्मत की बात कर रही थीं। उसने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कराई।

हम दीवार से सटकर खड़े हो गये, फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए, मैं उसका रसपान करने लगा, और टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसके मम्मे दबाने लगा।

मेरा लंड खड़ा हो गया और क्योंकि मैंने ढिला सा ट्रेक पहन रखा था, उसका तंबु बन चुका था, मेरा लंड उसकी चूत को छुने लगा, मैं भी जानबूझकर लंड रगडने लगा।

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वो मस्त होने लगी, फिर अचानक वो मुझसे अलग हुई और मेरा ट्रेक नीचे उतारकर मेरे लंड को चूसने लगी।

मुझे लगा इसने किसी और से भी चुदवा लिया है, और उससे ही इसे में इतनी हिम्मत आई है।

पर खैर, अब मैं जन्नत मे घुम रहा था, वो लंड को आगे-पीछे करके चूस रही थी।

फिर वो खडी हुई तो मेरे होंठ चूसने लगी, मैंने उसके पयजामे और पैंटी में हाथ डाल दिया, वहाँ सब गीला हुआ पड़ा था।

फिर मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर उठा दी, पर निकाली नही, और ब्रा को भी उठाना चाहा पर नहीं निकली, तो उसे नीचे सरका दिया, और उसके मम्मे को चूसने लगा, वो हल्की-हल्की सिसकारी ले रही थी।

उसके मम्मे अब थोड़े और बडे लग रहे थे। मैं कभी चूसता तो कभी काट लेता, उसकी मुँह से आह निकल जाती।

फिर जब मैंने उसके पायजामे का नाड़ा खोलने की कोशिश की तो उसने मुझे रोक लिया, और कहा कि ऊपर-ऊपर से जो करना है कर लो, बाकी फिर कभी कर लेना।

मैं भी मान गया, क्यूंकि मुझे भी यहाँ कोई रिस्क नहीं लेना था, पकडे जाने का भी डर था।

तो मैंने उसे लंड चूस कर माल निकाल देने को कहा।

वो मान गई और नीचे बैठ कर मेरा लंड चूसते हुए आगे-पीछे करती रही, फिर जब मैं झड़ने वाला था तब मैंने उसे बता दिया, वो लंड मुँह से निकाल कर जोर-जोर से हिलाने लगी, और तब तक हिलती रही जब तक झड़ नहीं गया।

फिर वो खडी हुई तो मैं जाने से पहले एक जोरदार चुम्बन देना चाहता था, वो भी ये बात समझ गई और हम फिर एक-दूसरे में खो गये।

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तभी एक आवाज़ आई – सोनी।

हम डरकर अलग हो गये, ये उसकी बहन थी। मैं कुछ देर चुपचाप खड़ा रहा, फिर बिना कुछ बोले वहाँ से नौ-दो-ग्यारह हो गया।

मुझे लगा अगले दिन पक्का कोई हंगामा होनेवाला है, पर कुछ नहीं हुआ। पता नहीं क्यों?

मैंने कई बार कहानियों में पढा है कि जब ऐसी हालत में कोई लडकी या औरत आपको पकड़ ले तो उसको भी चोदने का मौका मिल जाता है।

मुझे लगा शायद ऐसा कुछ ही हो जाये, पर अफ़सोस मेरे साथ ये नहीं हुआ।

पर इस घटना से मेरी और सोनी की कहानी नहीं अटकी।

आगे क्या हुआ ये अगली बार ..

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