भाभी की सेक्स की भूक मिटाई मैंने-3

Bhabhi Ki Sex Ki Bhukh Mitai Maine-3

तभी मैंने कहा कि ठीक है और मैंने वैसा ही किया फिर अंदर घुसते ही दरवाज़ा बंद करके कुण्डी लगा दी और कमरे में बैठ गया। तभी थोड़ी देर बाद भाभी नहाकर बाहर आई.. उन्होंने ब्लाउज और पेटिकोट पहना हुआ था और उनके बालों से पानी टपक रहा था जो ब्लाउज को गीला कर रहा था और उनकी ब्रा के दर्शन भी करवा रहा था। में तो घर से ही लंड खड़ा करके आया था और ये सब देखकर मेरे लंड महाराज और भी कड़क हो गये।

फिर मैंने झट से उनको बाहों में भर लिया और गालों को थोड़ी देर चूमने के बाद में उनका पेट को चाटने और चूमने लगा वो मेरे बालों में उंगलियाँ घूमाती हुई बोली कि इसमे क्या रखा है ऊपर आओ ना और तेज़ी से मुझे अपने होठों से लगा लिया उम्म्म ऊऊ ऐसी आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था।                                                                     “Bhabhi Ki Sex Ki Bhukh”

में तो इतना गरम हो गया कि समझ में ही नहीं आ रहा था कि कहाँ से शुरू करूँ और कैसे करूँ? तभी भाभी मेरा उतावलापन समझ रही थी। फिर उन्होंने मुझे रोका और कहा कि अभी तो सारा दिन है हमारे पास आराम से करेंगे.. अब में तुम्हारी ही हूँ। फिर मुझे अलग करके उन्होंने अपनी साड़ी जो टेबल पर रखी थी वो पहनने लगी थोड़ी ही पहनी होगी की मैंने उन्हें रोका और कहा कि

में : भाभी तुम्हारे गीले बालों से तुम्हारा ब्लाउज और ब्रा गीले हो गये हैं इन्हें चेंज कर लो।

भाभी : मेरी एक ब्रा धुल गयी और दूसरी ये भीग गयी अब तीसरी कहाँ से लाऊँ।

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में : में ला सकता हूँ तीसरी ब्रा।

भाभी : वो कैसे?

तभी मैंने अपनी जेब में रखी हुई उनकी वही ब्रा निकाली जो उन्होंने मुझे मजाक़ में दी थी.. भाभी हंस पड़ी और मुझे सीने से लगा लिया।

में : अब में आपकी ये भीगी हुई ब्रा उतारूंगा और ये पहनाऊँगा जो में लाया हूँ।

भाभी : नहीं में खुद चेंज कर लूँगी.. तुम क्यों परेशान होते हो?

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में : भाभी इस परेशानी के लिए ही तो में कब से तैयार हूँ.. इतना कहकर मैंने भाभी के ब्लाउज के बटन खोल दिए और उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाने और चूसने लगा। फिर मैंने उन्हें खुद से चिपका लिया और उनकी पीठ पर हाथ ले जाते हुए उनकी ब्रा को खोल दिया.. उनके दोनों बूब्स जब बाहर आ गये थे। वो मेरे सामने तनकर खड़े थे।                                              “Bhabhi Ki Sex Ki Bhukh”

फिर मैंने उन्हें बारी बारी से मुँह में भरकर बहुत चूसा.. मेरी उंगलियों और हाथों के निशान उन पर बन गये थे। भाभी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी और कह रही थी वाह तुम मेरे कितने अच्छे देवर हो उई माँ रे। अब मैंने उनके पेट को चूमते हुए पेटिकोट को ऊपर उठाया और भाभी को वहीं बेड पर लेटा दिया.. उनकी जांघें मोटी और भरी हुई थी.. रंग गोरा और हाथ फैरने पर उन्हें करंट सा लग जाता था।

फिर जब में उनकी जांघों को सहलाते हुए इनकी चूत में उंगली डालता तो ऐसा लगता कि उनकी चूत के अंदर पानी उबल रहा हो। में उत्तेजित हुआ जा रहा था और अपने कपड़े उतारकर फेंक चुका था। फिर में भाभी की चूत में ऊँगली कर रहा था और भाभी मेरे लंड को हाथ में लेकर चमड़ी को आगे पीछे कर रही थी। फिर थोड़ी देर बाद भाभी सीधी होकर मेरे लंड को चूसने लगी।

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में : ओह भाभी उफ़फ्फ़ ओह क्या नशा है भाभी उम्म्म और में भाभी के बालों में उंगलियाँ डालकर सहला रहा था और उनके शरीर को भी छेड़ रहा था।                                                                       “Bhabhi Ki Sex Ki Bhukh”

भाभी : अब तुम तैयार हो जाओ और मुझे आसमान की सैर करवाओ.. में भी तो देखूं इस लंड में कितनी जान है ओह अह्ह्ह। तभी मैंने भाभी से कहा कि में पहले नीचे लेटता हूँ तुम ऊपर से सवारी करो। तभी भाभी ने वैसा ही किया उनकी चूत पहले से ही खुली हुई थी.. मैंने लंड को सीधा किया और भाभी को उस पर बैठा लिया उनकी चूत बिना किसी परेशानी के एक बार में ही मेरा पूरा लंड निगल गयी और मुझे पता भी नहीं चला कि कब मेरा लंड उनकी चूत की गहराइयों में डूब चूका था।

भाभी : ओहं अह्ह्ह्ह मर गयी मजा आ गया है देवर जी बड़ी गुदगुदी हो रही है देवर जी और तेज़ करो और तेज़।

तभी में नीचे से और तेज़ी के साथ धक्के मारने लगा और वो ऊपर से अपना संतुलन बनाकर पूरा पूरा लंड चूत के आखरी छोर तक ले जा रही थी और में उनकी कमर पकड़ कर उन्हें सहारा दे रहा था.. जिससे वो बड़ी आसानी से लंड को चूत से बिना बाहर निकाले अंदर बाहर कर रही थी और पूरे कमरे में आवाज़ें गूँज रही थी.. फूच स्लूप उम्म्म।                                                    “Bhabhi Ki Sex Ki Bhukh”

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तभी थोड़ी देर बाद हमने पोज़िशन बदली। अब भाभी नीचे और में उनके ऊपर था। मैंने अपना तना हुआ लंड उनकी चूत से निकाला और एक हाथ से गीला लंड पकड़ा और सीधे उनकी चूत के मुँह पर निशाना लगा दिया और एक ही झटके में पूरा लंड चूत के अंदर और भाभी सातवें आसमान पर और मुझे भी इतना मज़ा आ रहा था कि समझ ही नहीं आ रहा था कि कहाँ कहाँ पर गुदगुदी हो रही है बहुत देर तक हम उसी पोज़िशन में अंदर बाहर करते रहे।

भाभी : ऐ मेरे छोटे से देवर तुम कितने बड़े हो गये हो.. मुझे पता नहीं चला ओह्ह्हहू तुम मेरे राजा हो ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह कहते कहते भाभी का शरीर अकड़ गया और कमान बनकर छूट गया और वो झड़ गई। तभी मैंने भी अपनी स्पीड बड़ाई और थोड़ी देर में ही सारा वीर्य भाभी की चूत में ही छोड़ दिया। हम दोनों इस चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट थे और भाभी मुझे बहुत देर तक चूम रही थी और फिर में उनके बूब्स का चूस चूसकर मजा ले रहा था। फिर हमारा ये प्यार बहुत दिनों तक चलता रहा और में उनकी चुदाई करता रहा ।                              “Bhabhi Ki Sex Ki Bhukh”

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