दोस्त की बहन प्रिया की चुदाई-1

Dost ki bahan priya ki chudai-1

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पृथ्वी है और मेरे परिवार में हम तीन लोग है (में, मेरे पापा और माँ) में 22 साल का हूँ और फिलहाल बी.ए IInd ईयर में हूँ और में दिखने में ठीक-ठाक हूँ. मेरे एक खास दोस्त है जिसके घर मेरा काफ़ी आना जाना रहता है. उस दोस्त की दूसरे शहर में नौकरी लग गई है, तो अब वो बाहर ही रहता है. उस दोस्त की एक छोटी बहन प्रिया भी है, जो वैसे तो मुझे भैया ही कहती है, लेकिन उसकी ख़राब नियत हमेशा ही मुझ पर लगी रहती है. वो मेरे कॉलेज में ही पढ़ती है, वो अक्सर मुझे दूसरी लड़कीयों के साथ देखकर मुझसे नाराज़ हो जाती थी और कहती थी कि वो लड़की ठीक नहीं है, ये लड़की ऐसी है, वो लड़की वैसी है, मुझे उसका बर्ताव कई बार ठीक नहीं लगता था.

मैंने एक बार उससे साफ साफ कह दिया कि में इन लड़कीयों से दोस्ती कोई शादी करने के लिए थोड़ी ना करता हूँ, में तो बस मस्ती करना चाहता हूँ इसलिए काफ़ी लड़कीयों से दोस्ती कर लेता हूँ कि किसी ना किसी के साथ तो सेक्स करने का मौका मिल ही जायेगा. तो उसने नीचे निगाहें करते हुए कहा कि क्या आप सिर्फ़ सेक्स ही करना चाहते है, तो मैंने कहा कि हाँ. अभी हमारी उम्र शादी की जिम्मेदारीयों को लेने की नहीं है, लेकिन शरीर की ज़रूरत को भी तो पूरा करने का मन होता है.

उसने कहा कि तो उन लड़कीयों में ऐसा क्या है जो मुझमें नहीं है, में सुनकर हैरान हो गया कि ये तो पागल हो रही है. मैंने कहा कि तुम मेरे दोस्त की बहन हो, में तुम्हारे साथ ये सब नहीं करना चाहता तो उसने कहा कि मुझे भी अपनी ज़रूरत को पूरा करने के लिए किसी ना किसी से दोस्ती तो करनी ही पड़ेगी और ना जाने कहीं वो मुझे बदनाम ना कर दे या बाद में मेरे भविष्य के साथ खिलवाड़ ना करे, इसलिए में आपकी प्रिया बनकर आपकी और अपनी सेक्स की ज़रूरत को पूरा करना चाहती हूँ और में जानती हूँ कि आप मेरा बुरा कभी नहीं चाहोगे और आप मेरा पूरा ख्याल भी रखोगे.

उस दिन के बाद से हम कॉलेज में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड की तरह रहने लगे और जब भी मौका मिलता तो हम उसका पूरा फ़ायदा उठाने की कोशिश करते थे. फिर 2 घंटे के बाद अक्सर कई क्लास रूम खाली हो जाते है जिसमें में अपनी प्रिया को ले जाता हूँ और फ्रेंच किस करते हुए बूब्स दबा दबा कर मज़े करता हूँ, कई बार तो उसकी पेंटी में भी हाथ घुसकर फिंगरिंग का मज़ा लेता रहता हूँ.

उस समय उसकी चूत पूरी गीली हो जाती है और मेरा लंड तो उसमें घुसने को तड़प जाता है, लेकिन मजबूरी है कि वहां में उसको चोद नहीं पाता हूँ और उसके घर जाकर उसको चोदना भी मुमकिन नहीं होता है और कॉलेज के आस-पास होटल या कही और जाने में भी ख़तरा होने के कारण बस तड़प तड़प कर ऊपर की ही मस्ती से काम चलाना पड़ रहा था.

फिर एक दिन कॉलेज में मैंने उसे मिलने बुला लिया, वहां पहुँच कर पता चला कि उस दिन किसी बात की छुट्टी थी जो मुझे पता नहीं था तो मौके का फायदा उठाते हुए उसे में कॉलेज के पीछे ले गया और उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया, वो भी पूरा मेरा सहयोग कर रही थी. फिर मैंने उसकी कमीज़ को ऊपर करके उसकी ब्रा के हुक खोलकर उसके बूब्स को पहली बार मुँह में भरकर चूसना शुरू किया. उसके बूब्स इतने मुलायम थे और चूसते हुए उसके निप्पल खड़े हुए थे और सच में एक हाथ से उसके बूब्स दबाने में और एक बूब्स को चूसने में जो मज़ा आ रहा था वो बताना बहुत मुश्किल है.

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इस बीच उसका हाथ मेरे सिर से होता हुआ मेरे लंड पर आ चुका था, जिससे मुझे लंड को पेंट के अंदर रख पाना मुश्किल हो रहा था, क्योंकि लंड कुछ ज़्यादा ही टाईट हो गया था. फिर मैंने चैन खोलकर उसके हाथ में अपना लंड दे दिया, जिसे वो कुछ देर तो अपने हाथ से रगड़ती रही फिर नीचे घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूसने लगी. मैंने सिर्फ लंड चुसवाने के बारे में सुना था, लेकिन सच में इसका मज़ा जन्नत से बढ़ कर था, मेरे लिए सहन करना मुश्किल हो रहा था तो मैंने उससे चोदने की बात कही, लेकिन वो दिन में इस खुली जगह में चुदने का रिस्क लेना नहीं चाहती थी.

फिर उसने मेरे लंड को चूस चूस कर ही सारा पानी निकाल दिया, ये एहसास मेरे लिए अद्भुत था, फिर भी उसको नहीं चोद पाने का थोड़ा मलाल रह गया. फिर 2 दिन हमारे ऐसे ही घर में रहकर बीत गये, क्योंकि कॉलेज की 15 दिनों की छुट्टीयां लग गई थी. हमसे सहन करना मुश्किल हो रहा था तो मैंने उसे उसकी एक सहेली के घर जाने को कहा, क्योंकि उसकी सहेली के घर में दिन में मम्मी पापा नहीं रहते है, क्योंकि वो जॉब करते है तो मैंने वहीं उसको मिलने का प्लान बनाया और उसकी सहली को भी बता दिया था कि हम आयेगें. तो उसने हँसते हुए अपना टेक्स माँगा, वो खुद भी चुदना चाहती थी तो मैंने उससे कह दिया कि पहले सर्विस तो लेने दो, बाद में टेक्स भी मिल जायेगा.