गुजरात में पंजाबन भाभी की चुत गांड को चोदा-2

Gujrat Me Punjaban Bhabhi Ki Chut Gand Ko Choda-2

वो मेरे सामने देख के मुस्कुराने लगी. मेरे लंड से प्रीकम निकल रहा था, जो मेरा पेंट पे निशान बना चुका था. मैंने उसका हाथ लेके मेरे लंड पे रख दिया. वो मेरे खड़े लंड को सहलाने लगी. अब मैं उसके बिल्कुल नज़दीक सट गया और गर्दन के ऊपर से हाथ रख के उसके मम्मों को दबाने लगा. वो दस सेकंड तक कुछ नहीं बोली, सिर्फ आँखें बंद करके बैठी रही और मजा लेती रही.

अचानक झटके से वो मेरी और पलटी और मेरे होंठों को चूसने लगी. उसके होंठ बिल्कुल सुर्ख़ हो चुके थे. दस मिनट तक हम दोनों ऐसे ही चुसाई करते रहे. मैं उसके मम्मों को अपने दोनों हाथों से सहला रहा था और ऊपर से ही उसके निप्पल को मसल रहा था. उसके ग़ुब्बारे जैसे चूचे मेरे दोनों हाथों में भी नहीं आ रहे थे.

अब वो पूरी तरह अपने होश खो बैठी थी और अपनी आँखें मूँदे मजा ले रही थी. एक हाथ से मेरे लंड को ऊपर से ही सहला रही थी और दूसरे हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे.
मैंने उसके कानों में बोला- सब कुछ सोफ़े पे ही करने का इरादा है क्या?
वो बोली- चलो अन्दर.

अगर कोई लड़की होती तो मैं अपनी गोद में उठाके बेड में ले जाता. मगर ये तो कम से कम अस्सी किलो की थी और मुझे अपनी कमर तुड़वाने का कोई शौक़ नहीं था.

बेड पे जाते समय रास्ते में ही उसने अपना पंजाबी सूट निकाल दिया. वो सिर्फ़, ब्रा और पेंटी में थी. ब्रा उसके जंबो साइज़ के मम्मों को सम्भालने की बेकार कोशिश कर रहा था और पट्टीनुमा पेंटी तो जैसे उसकी चूत और गांड की दरारों में खो ही चुकी थी. मैंने भी अपना शर्ट निकाल दिया.

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बिस्तर पे जाते ही ही उसने मुझे धक्का दे दिया और मुझे बिस्तर पे गिरा कर मुझ पे चढ़ गई. मुझे लगा कि मेरी सास बंद हो जाएगी. वो लम्बाई में भी मुझसे दो इंच ज़्यादा ही थी. उसने मेरे लंड और आंडों को ऐसे दबाया कि मेरी चीख़ निकल गई. मगर वो कुछ सुनने के मूड में नहीं थी.

वो अभी जंगली बिल्ली की तरह बर्ताव कर रही थी. उसने मेरे गालों को काटना शुरू कर दिया. मुझे टेंशन हो गया कि अगर गालों पे निशान हो गए तो मैं अपनी बीवी को क्या जवाब दूँगा.
मुझे लगा कि यदि मैंने कुछ नहीं किया तो ये मेरे कंट्रोल में नहीं रहेगी. मैंने पूरी ताक़त से उसको पलट दिया. और उसके ऊपर आ गया.

वो अब शांत हो गई. मैंने उसकी ब्रा को निकाल कर उसके दोनों मम्मों को बारी बारी दबाना और चूसना चालू किया. उसके निप्पल भूरे कलर के और क़रीबन आधे इंच के होंगे और बिल्कुल छोटे बच्चे की नूनी की तरह थे. बीच में उसकी चुत को भी रब कर रहा था.. और उसका लसलसा पानी मेरे हाथों में लग रहा था. पतली सी स्ट्रिप उसकी चुत के पानी को कैसे संभाल पाती. चुत का जूस बाहर बह रहा था.

मैंने अपनी उंगली उसकी पेंटी की स्ट्रिप की साइड से चुत में डाली. चूत गीली होने की वजह से आसानी अन्दर से चली गई. मैंने अपनी उंगलियो का कमाल दिखाना चालू किया और उसका जी-स्पॉट ढूँढ कर मालिश करने लगा.

मेरा एक हाथ उसके निप्पल पे और दूसरा उसकी चूत पे था. इस वक्त वो मेरे पूरे कंट्रोल में थी. मैंने उसके पूरे बदन को निहारा. पंजाबी होने की वजह से पूरा भरा बदन, दूध सा साफ़ रंग, भारी भारी चूचे और उससे भी भारी कूल्हे, गद्देदार दिखने वाली चुत, थोड़ा भारी पेट और उसमें भी गहरी नाभि, जिसमें समझो मैं पूरा खो ही गया था.

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मैं उसके पूरे बदन को बेतहाशा चूम रहा था और मेरे पैर भी उसके पैरों की घिसाई कर रहे थे. कुल मिलाकर मेरे पूरे शरीर का हर अंग उसकी सेवा में लगा हुआ था. उसने मेरे निक्कर को पकड़ा और निकाल के मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया. मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था और प्री कम की बूँदें उसके गुलाबी टोपे पर मोतियों जैसे चमक रही थीं.

उसने मुझे नीचे लेटने को कहा. मेरे लंड को ऊपर नीचे करके अचानक ही अपने मुँह में पूरा उतार लिया और चूसने लगी. मेरा प्री कम निकलते ही अपनी जीभ सुपाड़े के ऊपर घुमाके चाट लेती. वो चूस भी रही थी और मेरी मुठ भी मार रही थी.

मैंने उसको उलटा होने को कहा और वो घूम गई. अब उसके विशाल चूतड़ मेरे मुँह के पास थे और चुत बिल्कुल मेरे मुँह में सामने. चुत पे छोटे छोटे बाल थे शायद कुछ दिन पहले ही उसने अपनी झांटें बनाई होंगी. मैं भला ऐसी रसदार चुत को क्यूँ छोड़ता, उसकी चुत को फैला के अपनी जीभ के करतब दिखने लगा. उसका पानी कुछ खट्टा और खारा, मगर मज़ेदार था.

थोड़ी ही देर में उसने अपने पैर भींचे और मेरे लंड को वैक्यूम क्लीनर के जैसे चूसने लगी और साइड में गिर गई.
वो अब भी मुँह से आ आह आवाज़ निकाल रही थी. पता नहीं जब तक मुठ ना मारूं या चुदाई ना करूँ, मैं कभी चुसाई में झड़ता नहीं हूँ.

अब मैं उसके बाजू में आ गया और वापस उसको गर्म करने की कोशिश करता रहा. मगर वो ऐसे ही बेसुध सी पड़ी रही. मैं भी दस मिनट उसके बदन से खेलता रहा.
थोड़ी देर में वो फिर तैयार हो गई और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी.

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साली क्या ज़ोरदार आइटम थी. पता नहीं उसका पति उससे कैसे निपटता होगा. मैंने फिर उसकी चुसाई चालू कर दी. साथ में अपनी उंगली भी उसकी चुत में गीली करके उसकी गांड में घुसाता रहा.
अब तो वो बिल्कुल तड़प रही थी और अपने हाथों से मेरे लंड को टटोल रही थी. वो अपने पैर चौड़े करके लेटी हुई थी और मैं उसके पैरों के बीच में था. मैंने अपना लंड उसके हाथों में दे दिया उसने मेरे लंड से अपनी गीली चुत पर मालिश करना चालू कर दिया.
इसके दो फ़ायदे थे, औरत और मर्द के दो सबसे संवेदनशील अंग उसका दाना और मेरा सुपारा आपस में चुम्मा चाटी कर रहे थे.

थोड़ी देर के बाद मेरा लंड पकड़ कर धीरे धीरे अपनी चुत के अन्दर घुसाने लगी. मैंने भी उसका साथ देते हुए हर धक्के पर लंड से चुत पर दबाव बनना चालू कर दिया. उसकी चुत इतनी गीली हो चुकी थी कि बिना मेहनत के लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया और उसके मुँह से आह निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने अब अपने लंड की पूरे छह इंच लम्बाई का और उसकी चुत की पूरी गहराई का इस्तमाल करना चालू कर दिया.

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