कंचन की कुंवारी चूत 2

Kanchan ki kunwari chut-2

आज इसको नहीं जाने दूँगा।

मैंने उसकी तरफ देखा तो वो हँसने लगी।

मैंने कहा – क्या हुआ? किस बात कि हंसी आ रही है।

उसने कहा – ऐसे क्यों बैठे हो ज़मीन पर?

मैंने कहा – तो क्या हुआ?

वो बोली – कौन सी बात करना था तुमको?

मैंने कहा कि आज बात करने के मूड में नहीं हूँ।

वो बोली – तो क्या करना है।

मैं बोला – वही।

वो बोली – नहीं।

मैंने कहा – क्यों?

वो बोली – घर जाना है, बाद में कभी।

मैंने कहा – अभी क्या है?

उसने कहा कि कोई देखा लेगा।

मैंने कहा कि इतनी रात को कौन देखेगा बहनचोद, दिमाग खराब मत किया कर मेरा।

वो बोली – तुम ही देखो कि सुबह के चार बजे अपनी ही लाइट ओन है, कोई नहीं तो घर में कोई जाग गया तो?

मैंने कहा कि ऐसा बोल ना कि बन्द कर के करो।

मैं क्यों बोलूँ, तुमको करना है, तुमको देखना चाहिए।

मैंने कहा कि फ़िर दिखेगा कैसे?

मैंने भी समय ना गंवाते हूए उसके बूब्स को पकड़ा और हाथ चलाने लगा।

उसने अपनी आँखें बंद कर ली।

फ़िर मैंने उसके सलवार के अंदर हाथ डाल दिया।

अब मैं उसको चूमने लगा।

इतने में वो भी मदहोश होने लगी और फ़िर मैंने उसको अपने बिस्तर पर पटका और उसके ऊपर ।चढ़ गया और हाथों से उसके बूब्स को दबाने लगा।

वो भी मुझे को अपनी तरफ़ खींचने लगी।

मेरी साँसें बहूत तेज़ चल रही थीं और उसका भी दिल बहुत तेजी से धक-धक हो रहा था।

फ़िर मैं उसके ऊपर से हटा और उसकी सलवार को नीचे खींचने लगा।

पता नहीं क्यों मैं अपने आप को काबू नहीं कर पा रहा था।

मैंने उसकी सलवार को उतारा और फ़िर उसकी काले रंग की पैंटी को उतारा।

अब उसकी चूत मेरे सामने थी।

मैंने उसको हल्का सा सहलाया।

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वो एक दम से चिहुँक उठी।

मैंने उसको कहा कि अपना कुरता भी उतारे तो उसने मना कर दिया।

मैंने कहा – क्यों तो उसने शरम के मारे मुँह फ़ेर लिया।

मैंने भी ज्यादा ज़ोर नही दिया।

मैंने भी अपना लोअर उतारा और नंगा हो गया पता नहीं मेरी सारी शरम कहा गयी थी।

मैंने अपने हाथों से उसकी चूत को फ़ैलाया और अंदर देखने कि कोशिश करने लगा पर नाइट बल्ब की लाइट कम थी।

अब मैं उसकी चूत में उंगली करने की कोशिश करने लगा पर जा नहीं रही थी।

मैंने फ़िर सोचा कि अब इसको छोड़ा जाए जिससे जिससे सील तोड़ने का मजा तो आये।

मैं उसकी चूची को हाथों से दबाने लगा और उसके पैरों के बीच में आ गया जिससे उसको भागने का मौका ना मिले।

मैंने अपने लंड और उसकी चूत में नारियल का तेल लगा लिया और फ़िर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना चालू किया।

पर लंड स्लिप हो गया मैंने फ़िर से कोशिश की।

इस बार मैंने उसकी जंगों को फ़ैलाया और फ़िर अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर मैंने उसको दबाना चालू किया।

मैंने हल्का सा जोर लगाया तो वो चिल्लाने। लगी और कहने लगी कि आराम से करो।

मैंने मन में सोचा कि अब तुझे पता लगेगा।

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फ़िर मैंने हल्का सा झटका मारा और पूरी ताक़त से जोर का झटका उसकी चूत मैं मारा।

उसने मुझे गाल पर पर ज़ोर से चाटा मार दिया पर मैंने उसको कुछ नहीं कहा।

मैं थोड़ी देर तक मैं रुक गया।

फ़िर मैंने उसको साफ़ किया और दुबारा से नई शुरुआत कि इस बार मैं चूमते हुए पेट पर आ गया और नाभि में जीभ डाल कर चाटने लगा और हाथों से उसकी चूचिया दबाने लगा।

अब वो बहूत मस्त हो चुकी थी।

अहह अहह की आवाज़ें कर रही थी जिससे मैं और भी जोश में आ रहा था।

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वो मदहोशी में डूबी थी और जब मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसने अपनी आँखें बन्द कर रखी थी और श्स्स्स्स्स्स कर रही थी।

मैं उसको और तड़पाना चाहता था।

मैने उसकी चूत पर हाथ रख दिया ऐसा लगा कि मेरा हाथ किसी भट्ठी पर रखा हो और जैसे ही मैंने दाने को छुआ तो उसकी सिसकारी निकल गई – ओह्ह।।। उईइ।।।

मैं अब चूत सहलाने लगा, चूत के होंठों पर अपने होंठ रख दिये तो मानो पागल हो गई।

वो बोली – ऐसा मत करो, मैं मर जाऊँगी।

मैं कहाँ मानने वाला था, मैं नहीं माना और चूत को चूमता ही रहा।

थोड़ी ही देर में वो अपने हाथ से मेरा सर अपनी चूत में और अंदर को दबाने लगी।

मैंने अपनी जुबान चूत में अंदर कर दी।

वो तड़प उठी और चिल्लाई आईईइ अहह ओह अब और मत तड़पाओ और मुझे ऊपर की तरफ खींचने लगी।

फिर मैंने भी देर ना करते हुए लंड को चूत के छेद पर रखा और दूध को अपने मुँह में लेकर एक जोर का धक्का लगाया तो उसकी एक हल्की सी चीख निकल गई।

वो बोली- आराम से करो।

फिर मैंने एक और धक्का लगाया तो आधा लंड अंदर चला गया।

मैंने और देर नहीं लगाई और जब आख़िरी धक्का लगाया तो पूरा लंड अंदर चला गया उसकी चीख निकल गई।

मैं उसकी गर्दन और होंठों को चूमने लगा और दूध को दबाने लगा।

थोड़ी देर में उसे मज़ा आने लगा और चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी और बोली- और जोर से करो ! और जोर से करो ! बहुत मज़ा आ रहा है।

आज मेरी चूत फाड़ दो।

मैं अब पूरी ताक़त से धक्के लगाने लगा।

पूरे कमरे में हमारी सांसों की और सेक्सी सीत्कारों की आवाज़ गूंज रही थी और चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी।

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पाँच मिनट के बाद वो मेरे ऊपर आ गई और मैं नीचे हो गया।

अब वो अपने चूतड़ हिला-हिला कर चुदने लगी लगभग दस मिनट के बाद मैंने कहा कि मेरा निकलने वाला है।

वो फिर से नीचे आ गई और मैं ऊपर आ गया।

वो लगातार बोले जा रही थी – जोर से करो, और तेज़ धक्के मारो, मैं भी झड़ने वाली हूँ।

मैं और जोर से धक्के मारने लगा।

दोनों का जिस्म अकड़ने लगा और दोनों ने अपना पानी छोड़ दिया।

हम दोनों कि ही हालत खराब हो गयी थी।

थोड़ी देर वो ऐसे ही रहे और फ़िर वो बोली कि यार हाथ पैरों में कमज़ोरी हो रही है।

बहूत दर्द हो रहा है।

मैंने कहा – कुछ नहीं, मुझे को भी ऐसा ही हो रहा है।

लगभग छे बजने वाले थे।

मैंने उसको कहा कि थोड़ी देर रुक कर चले जाना और फ़िर मैंने उसको घर जाने दिया।

फ़िर मैं भी सो गया तब से लेकर आज तक मैंने केवल उसकी की दो बार ही चूत ली है।

ऐसा नहीं है कि मुझे को मौका नहीं मिला पर मैंने जो किया वो अपनी भरोसे के लिये किया।

मैंने उसको मोबाइल में सॉरी भी कहा पर उसने कहा कि उसे इस बारे मैं बात नहीं करना है।

जो कुछ हूआ वो हुआ दोनों ने किया, इसमें माफ़ी की जरूरत नहीं है।

इस तरह से मेरा भी मन शान्त हुआ।

दोस्तो कैसी लगी आपको मेरी कहानी।

मुझे आशा है कि आपको मेरी कहानी पसन्द आयी होगी।

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