मोना की मस्त चूत बनाम मेरा मूसल लण्ड 2

Mona ki mast chut vs mera musal lund-2

अब मैंने देर करना ठीक नहीं समझा और उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों से पकडा और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये… …

क्या अहसास था, यार वो!!

मैं उसके मुलायम होंठ चूसने लगा और चूसते-चूसते अपनी जीभ उसके मुँह में दे दी और उसकी जीभ चाटने और चूसने लगा।

ना जाने फिर क्या हुआ और उसने अचानक ही मुझे धक्का दिया और कहा – आज नहीं, माँ हैं घर पर। कल घर के सभी लोग शादी में जा रहे हैं। कल तुम जल्दी आ जाना।

मरता क्या ना करता। मैंने भी मन मारते हुए कहा – ठीक है…

आप सब तो जानते ही हैं इसे कहा जाता है – “खड़े लण्ड पर चोट”

खैर, फ़िर मैंने उसे थोडी देर पढाया और एक घंटे बाद अपने घर चला गया।

मित्रो, उस रात तो मैं सोया ही नहीं। मोना को याद करते करते रात भर मुठ मारता रहा। जैसे तैसे रात गुज़री और फ़िर दिन गुज़रा।

मैं शाम को चार बजे ही उसके घर पहुँच गया और जैसे ही मैंने घन्टी बजाई मोना ने दरवाजा खोल दिया।

मैं अन्दर गया और अन्दर सोना बैठी थी। फिर हम दोनों अन्दर वाले कमरे में गये और दरवाजा बन्द कर लिया।

मोना बैड पर बैठ गई और मैं भी उसके साथ बैठा। अब मैंने आव देखा ना ताव मैंने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों से पकडा और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये।

उसकी गरम गरम साँसें मैं महसूस कर रहा था और उसके मुलायम होंठ चूसने लगा। फ़िर मैंने अपनी जीभ उसके मुँह मे दे दी और उसकी जीभ चाटने और चूसने लगा।

अचानक ही मेरे हाथ उसकी गोल गोल चूचियों पर आ गये और मैं धीरे धीरे उसके चूचे सहलाने लगा। अब तक मेरा लण्ड पैंट मे तम्बू बनाने लगा था। मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पर रख दिया और वो लण्ड को पैन्ट के ऊपर से ही सहलाने लगी।

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फ़िर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसका टॉप ऊपर कर दिया उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी।

मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मे दबाने लगा फ़िर मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और उसके कबूतरों को आज़ाद कर दिया और फ़िर उसके एकदम नंगे चूचकों को दबाने और मसलने लगा।

कुछ देर ऐसे ही खेलने के बाद मैंने उसके चुचकों को चूसना शुरू कर दिया।

वो उत्तेजना के मारे – उह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह… उम्म्म… इश्स… इस्स… उफ़… आ आ अहहा… जैसी आवाज़ें निकाल रही थी।

20 मिनट तक एक एक करके मैं उसके दोनों मम्मे चूस्ता रहा और फ़िर मैंने उसके जींस का बटन खोल दिया और उसकी जींस नीचे खिस्का दी और तुरंत अपना एक हाथ उसकी पैंटी मे डाल दिया और उसकी ज़रा भी देर किए बिना उसकी चूत में उंगली डाल दी।

वो ज़ोर ज़ोर से सिसकरियां लेने लगी। पूरा कमरा उसकी सिसकरियों से गूँज रहा था – आह… आ आ आ आ आ… इस्स… नहीं प्लीस… धीरे… मत करो ना… उफ़… ओ माँ… अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… हन… नहीं… उम्म्म्ममममममममममममममममममम…

अब मैंने उसके सारे कपडे उतार दिये और उसे एकदम नंगी कर दिया। फिर मैंने अपने भी कपड़े उतार दिए और अब हम दोनों सिर्फ़ अन्डरवियर में थे।

उसने खुद ही मेरा निक्कर नीचे खिसका दिया और मेरे लण्ड को देख कर घबरा गई बोली – तुम्हारा लण्ड कितना मोटा और लम्बा है, ये मेरी चूत मे कैसे जाएगा? मेरी चूत तो फ़ट जाएगी। मुझे अभी से अपनी चूत का भोसड़ा नहीं बनवाना। अगर तुमसे मेरी शादी नहीं हुई तो मेरा पति मुझे रंडी समझ कर दूसरे दिन ही छोड़ देगा।

मैंने उसे कुछ देर समझाया फिर अपना लण्ड पकडा दिया। थोड़े नखरे के बाद मोना मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी।

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अब मैंने उसे लण्ड चूसने को कहा और फिर से थोडी ना नुकर के बाद वो मान गई और मेरे लण्ड को अपने मुँह मे ले लिया और लॉलीपॉप की तरह पहले धीरे धीरे और फिर बेतहाशा चूसने लगी। मुझे बहुत आनन्द आने लगा और मेरे मुँह से भी आह… उह्ह्ह्… की आवाज़ें निकलने लगीं।

मैं भी अपना लण्ड हिला हिला कर उसके मुँह मे अन्दर बाहर करने लगा और कुछ देर बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसके मुँह में ही उडेल दिया और वो भी सारा का सारा रस गटक गई।

कुछ देर हल्की फुल्की चूमा चाटी के बाद मेरा लण्ड फिर फुफ्कारे मरने लगा और मैं उसकी टाँगों के बीच में आ गया और अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसेड दी और वो एकदम से सिसक गई।

थोडी देर मैंने उसकी चूत मे उंगली की और फ़िर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत की फ़ाकों पर रख दी और उसकी भग्नासा को चूसने व चाटने लगा।

कुछ देर तक उसकी चूत चाटने के बाद उसने मेरे सिर के बाल ज़ोर से पकड लिये और उसका शरीर अकडने लगा और उसकी चूत से रस निकलने लगा।

मैं भी सारा का सारा रस पी गया।

इतने मे मोना बोली – अब और ना तड्पाओ मेरे राजा, अब डाल ही दो अपना लण्ड मेरी चूत में और फ़ाड दो मेरी चूत को। बना दो इसका भोसड़ा, माँ ।चुदाने जाए दुनियादारी। जो होगा देखा जाएगा। अभी तो बस मुझे तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में चाहिए।

मैंने भी देर ना करते हुए तुरंत कॉन्डम निकाला और अपने लण्ड पर पहन लिया और मोना की टाँगें अपने कन्धों पर रख ली और अपना लण्ड उसकी चूत पर ज़ोर-ज़ोर से रगडने लगा।

वो सिस्कारियाँ लेने लगी – आ आ आ आ आ आ आ… आह आहह एयाह्म… म्म्म्ममममम… डाल ना मादार चोद… क्या शुभ घड़ी का इंतेज़ार कर रहा है, भोसड़ी वाले… डाल… उम्म्म्मममममममममम… इसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स… डाल भी दे जालिम…

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और फ़िर मैंने एक झट्का दिया और मेरा सूपड़ा चूत के अन्दर तक घुस गया। मैंने एक तेज़ झटका और मारा और मोना की चीख निकल गई और मैंनें तुरंत अपने होंठ उसके होठों पर रख दिये।

थोडी देर मैं ऐसे ही रुका रहा और फ़िर थोडी देर बाद मैंने एक ज़ोर का झट्का मारा और मेरा पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में जड़ तक उतार दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।

मैंने जब मोना की तरफ़ देखा तो उसकी आँखों में आँसू निकल आये थे।

माँ चुदाए मुझे क्या करना आँसू वांसु से। मैं उसके चूचक अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और साथ साथ ज़ोर ज़ोर से झटके मारता रहा।

थोडी देर बाद मोना भी गाँड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी। पूरा कमरा फ़च्च फ़च्च की आवाज़ों से भर गया। अब मैंने अपनी
रफ़्तार और तेज़ कर ली और बहुत तेज़ तेज़ झट्के मारने लगा। तभी मोना का शरीर अकड़ने लगा और वो झड गई।

लेकिन मैं अभी तक नहीं झडा था। मैं लगातार झटके मारता रहा और लगभग 20 मिनट बाद, मैं भी झड गया।

मैं थक कर मोना के बगल में लेट गया और हम दोनों पसीना पसीना हो गये थे। फ़िर थोडी देर बाद मैं उठा और अपने कपडे पहने और फ़िर मोना को भी उसके कपडे पहनाए।

जैसे ही हमने खिड़की की तरफ़ देखा तो हमरी आँखे फ़टी कि फ़टी रह गयीं।

कौन था वो???

यह जानने के लिए मेरी अगली कहानी ज़रूर पढ़ें।

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