पापा ने मम्मी को बेटे से चुदवाया- 1

Papa ne mummy ko bete se chudwaya- 1

हैल्लो मेरे प्यारे दोस्तों, आप लोगों की तरह में भी  लगातार पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े ले रहा हूँ. मैंने बहुत सारी मजेदार कहानियों को पढ़ा और आज में अपनी भी एक कहानी को आप तक लाया हूँ, यह मेरी पहली कहानी है और प्लीज मुझे मेरी कोई भी गलती के लिए आप माफ़ भी जरुर करे.

दोस्तों इस कहानी में मेरे पापा, मम्मी के बीच जो सब कुछ हुआ, में वो बताने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि मेरे बीच घटी इस घटना को आप जरुर पसंद करेंगे और अब आगे पढ़कर देखे उस रात को क्या क्या हुआ? दोस्तों यह बात तब की है, जब में उस दिन बहुत गहरी नींद में सो रहा था. कुछ देर सोने के बाद जैसे ही में दूसरी तरफ करवट लेकर लेट गया. उसके बाद मैंने जो सब देखा, उसको देखकर में बिल्कुल चकित रह गया, क्योंकि मैंने देखा कि पापा उठकर माँ के पैरों के बीच में बैठ गये और वो उनके पैरों को पकड़कर उनके टखनो को चूमने और चूसने लगे. अब माँ अपने पैरों को पीछे खीचना चाह रही थी, लेकिन पापा ने उनको बहुत ज़ोर से पकड़ रखा था, इसलिए वो ऐसा ना कर सकी और पापा ने माँ के दोनों टखनो को बारी बारी से चूमा और चूसा इस वजह से माँ भी चुपचाप लेटी रही.

मैंने अब उन लोगों की तरफ करवट ले ली और पापा उठकर माँ की कमर के पास जाकर बैठ गए. उसके बाद पापा ने माँ के पैरों को दबाना शुरू किया और पैर दबाते दबाते पापा अपना हाथ भी ऊपर की तरफ बढ़ा रहे थे, जिसकी वजह से पापा के हाथों के साथ साथ अब माँ का पेटिकोट भी उठ रहा था और पापा ने अपने हाथों से माँ के पेटिकोट को उनके घुटनों के ऊपर तक उठा दिया और तब उनके दोनों पैर नंगे हो चुके थे.

अब माँ बहुत डर रही थी और वो चुपचाप लेटी हुई थी और पापा धीरे धीरे अपना हाथ माँ की जांघों पर फेरने लगे और धीरे से अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले जाने लगे थे और अब उनका हाथ माँ की कमर तक पहुंच गया और वहीं पर रुक गया, वो माँ की गोरी गदराई कमर पर बहुत प्यार से हाथ फेरने लगे थे, साथ में उनकी कमर को चूमने भी लगे थे, उनकी नाभि को भी किस करने लगे थे और वो अपना हाथ भी इधर उधर घुमाकर माँ के पेटिकोट के नाड़े तक पहुँच गये.

पापा ने अपने एक हाथ से माँ की चूत के ऊपर रखकर उनके पेटिकोट का नाड़ा भी खींच दिया और नाड़ा खींचते ही माँ का पेटिकोट ढीला होकर कमर पर खुल गया.

पेटिकोट खोलने के बाद पापा अपना हाथ माँ के बूब्स पर ले गये और वो उनके बूब्स को पकड़कर धीरे धीरे दबाने लगे. तभी माँ मेरे पापा के हाथ को हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पापा ने अपना हाथ नहीं हटाया और में उनके पास में लेटा हुए था और उस डर की वजह से माँ कुछ भी नहीं बोल पा रही थी और पापा भी चुपचाप माँ के पास में बैठकर उनके बूब्स से जी भरकर खेलते रहे और बाद में उनकी ब्रा के हुक को भी खोल दिया और उनकी ब्रा को उतार दिया. अब माँ उनको रोकती रही, लेकिन पापा उनके बूब्स को अपने मुहं में भरकर चूसने लगे. पापा कुछ देर तक माँ की निप्पल और बूब्स को सहलाते भी रहे और उसके बाद उन्होंने माँ को उल्टा लेटने के लिए कहा.

अब माँ उल्टी लेट गयी और पापा उनकी नंगी पीठ को सहलाते रहे और कुछ देर बाद उनकी ब्रा को उनके बदन से खींचकर निकाल दिया. अब पापा पीछे से अपना हाथ बढ़ाकर उनके बूब्स को से पकड़कर मसलने लगे और अपना मुहं नीचे की तरफ ले जाकर उनकी कमर और कूल्हों पर चुम्मा देने लगे, माँ उनको रोक नहीं पा रही थी.

पापा ने माँ के पैरों से उनके पेटिकोट को खींचकर उतार दिया, जिसकी वजह से अब माँ पूरी तरह से नंगी हो गयी और पापा के पास में लेटी रही. अब पापा ने भी अपनी शॉर्ट और अंडरवियर को उतार फेंका और उनके पैरों को फैला दिया. अब पापा माँ की चूत को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे थे और उसके अंदर उंगली डालकर अंदर बाहर करने लगे थे.

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पापा चूत में तब तक अपनी उंगली को डालते निकालते रहे, जब तक चूत से बहुत लार नहीं निकल जाए और वो कुछ देर बाद समझ गये कि अब माँ अपनी चूत को चुदवाने के लिए तैयार है. पापा अपने आप को माँ की खुली हुए जांघों के बीच में पोज़िशन बनाकर उन्होंने अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया और पापा ने अपनी कमर को हिलाकर अपने लंड को माँ की चूत के अंदर डाल दिया, जिसकी वजह से उनका लंड आसानी से माँ की चूत के अंदर समा गया और माँ भी अपनी कमर को उचकाकर लंड को अपनी चूत की और भी गहराई में लेने की कोशिश करने लगी.

पापा ने भी झटके मार मारकर माँ को चोदना शुरू कर दिया और में पास में लेटे हुए था, इसलिए वो ज्यादा आवाज नहीं कर सकते थे और ना ही ज्यादा उछल कूद कर सकते थे और इसलिए वो अपनी चुदाई बहुत धीरे धीरे धक्के देकर कर रहे थे धीरे धीरे चुदाई करने से उनको बहुत आनंद मिल रहा था और फायदा यह था कि पापा, माँ को ज्यादा देर तक चोद सकते थे, लेकिन माँ अब तक बहुत गरम हो चुकी थी और माँ ने अपना पैर उठाकर उनकी कमर पर रख दिया.

अब पापा उनके दोनों पैरों को अपने हाथों से पकड़कर उनको धीरे धीरे, लेकिन गहरे और जोरदार झटको के साथ चोदने लगे. पापा ने देखा कि माँ अपने कूल्हों को अब ज़ोर ज़ोर से और जल्दी जल्दी उछाल रही है और वो अपने होंठो को चबा भी रही है. अब में समझ रहा था कि अगर में पास में ना सोता होता तो माँ ज़रूर जोश में आकर अपनी कमर को उछाल उछालकर उनका लंड अपनी चूत में लेती और बहुत मज़े करती. अब उन्होंने अपने दोनों पैरों को एक बार से पापा की कमर पर रखकर कसकर उनको पकड़ लिया था, लेकिन तभी पापा ने मुझे जागते हुए देख लिया.

वो मुझसे कहने लगे कि बेटे तुम सोए नहीं? तब मैंने कहा कि मुझे नींद ही नहीं आ रही है, तो उन्होंने पूछा क्यों? तब मैंने कहा कि आप मम्मी के साथ पता नहीं क्या कर रहे हो? तो वो हंसते हुए पूछने लगे क्या तुमको भी करना है? तो मैंने उनको हाँ कर दिया और वो मुझसे पूछने लगे कि अमित तुमने क्या अपनी माँ से सुंदर औरत कभी देखी है? में उनकी वो बात सुनकर एकदम चुप रहे. अब पापा से कहने लगे कि में बहुत किस्मत वाला हूँ कि मुझे इतनी सुंदर और जवान औरत मिली. अब तक पापा ठीक तरीके से बोल रहे थे, लेकिन इसके बाद वो जो बोले उसके लिए में तैयार नहीं था.

अब पापा कहने लगे कि तुम्हारी माँ टॉप क्लास माल है, इसकी चूत और बूब्स को देखने के लिए और खाने के लिए गाँव के सभी लोग हमेशा तरसते रहते है और इसके उठे उठे और मस्त बूब्स और मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर कोई भी पागल हो जाएगा. अब पापा माँ से बोले कि जानेमन टावल को थोड़ा और ऊपर करो, आज थोड़ा हम बाप बेटे को तुम अपनी जवानी तो दिखाओ, अरे बेटा अभी छोटा है, उससे क्या शरमाना, अब आज इतना मत शरमाओ बहुत दिनों से तुम पूरी तरह से नंगा नहीं देखा है, प्लीज़ तुम इसको अपनी जवानी दिखा दो, माँ भी अब बेशरम होना चाह रही थी, लेकिन इस समय पापा मेरी माँ को अपने 18 साल के जवान बेटे के सामने नंगी करना चाह रहे थे.

अब पापा ने से माँ से बोला कि तेरे बेटे ने अभी तक कोई नंगी लड़की या औरत नहीं देखी है, तुम उसको दिखा दो कि औरत के दोनों पैरों के बीच में क्या होता है? और मस्त बूब्स कैसे होते है? तुम आज अपने बेटे को औरतों के खजानों को भी दिखा दो और मुझको भी दिखा दो तुम्हारा नंगा रूप. अब माँ उस समय बहुत चकित होकर पापा की तरफ देखने लगी कि आज वो ऐसे कैसे बातें बोल रहे है? माँ ने कोई भी जवाब नहीं दिया, वो एकदम चुप रही और अपने मुहं को बंद कर लिया, लेकिन पापा उनसे बोलते रहे थे, साली अपनी चूत और बूब्स को तू हमें दिखाएगी तो घट नहीं जाएगा, खोल दो टावल को और हम बाप बेटे को एक साथ अपनी जवानी देखने दो.

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अब माँ धीरे से पापा को देख रही थी और पापा उनके शरीर को घूर रहे थे, जब माँ मुझे देखने लगी, तब में माँ से इशारे से बोला, जिसके बाद वो नंगी हो गई. तब माँ ने धीरे से अपनी जांघों को खोला और टावल को धीरे धीरे उठाकर अपनी जांघों से ऊपर उठा दिया और तब हम लोगों को माँ की चूत दिखाई देने लगी, लेकिन पापा तब भी खुश नहीं थे और उन्होंने माँ से बोला कि मीना अब बिल्कुल नंगी हो जाओ. तभी माँ ने टावल की गाँठ को खोल दिया और अपने ऊपर से टावल को हटाकर वो बिल्कुल नंगी हो गयी. मुझको अपने पापा के ऊपर बहुत हैरानी हो रही थी कि आज वो माँ कैसे यह सब करने के लिए बोल रहे है?

दोस्तों मेरे पापा को अभी भी यह नहीं पता था कि में अपनी माँ की चूत को देखना तो क्या चोद भी चुका हूँ. तभी पापा मुझसे बोले कि देख बेटे तेरी माँ क्या मस्त माल है? तुम इतने मोटे और गोल गोल बूब्स कभी नहीं देखोगे, तुमने तो बस बचपन में इसको बहुत दबाया और इसका दूध पिया है, लेकिन इसको ऐसे दबाने और मसलने में ज्यादा मज़ा आता है, लेकिन तुम इसको कैसे दबाओगे, तुम तो बेटे हो? और बेटे को माँ के बूब्स नहीं दबाने चाहिए.

दोस्तों में अपनी माँ को पापा के सामने नंगी देखकर बहुत गरम हो गया था और मेरा लंड भी खड़ा हो गया था और मेरी पेंट से बाहर आने की कोशिश कर रहा था, में अपना पैर मोड़कर अपने खड़े लंड को दबा रहा था, लेकिन पापा की कहानी अभी तक खत्म नहीं हुई थी तो उन्होंने माँ से कहा, रानी अब ज़रा अपनी चूत भी दिखा दो, इस पूरी दुनिया में तुम्हारी चूत से सुंदर कोई चीज़ नहीं है, तुम अपने पैरों को फैलाओ.

माँ ने पापा की उस बात को मानते हुए अपने पैरों को धीरे धीरे फैला दिया और माँ ने अपने पैरों को पूरा का पूरा खोलकर फैला दिया और तब तक वो फैलाती रही, जब तब ना उनके दोनों पैर खुल ना जाए और इस तरह से माँ की चूत पूरी तरह से खुलकर मेरे सामने आ गयी और मुझको इस समय माँ की चूत के अंदर गुलाबी गुलाबी माँस भी दिख रहा था, मुझको तो माँ की चूत का दाना भी दिख रहा था. अब माँ भी अजीब हरकते करने लगी थी, माँ ने अपने सर को झुकाकर हम जिस कुर्सी पर बैठे थे, वो अपने आप को धकेलने लगी थी और माँ अपने आपको तब तक धकेलती रही, जब तक कि उनके पैरों ने मेरी कुर्सी को ना छू लिया.

माँ ने अपने दोनों पैरों को हवा में उठा लिया और वो अपने कूल्हों को मेरी कुर्सी की तरफ करने लगी, माँ के पैर अब मेरी कुर्सी तक पहुँच गए थे. मैंने माँ के दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और माँ को अपनी तरफ खीँच लिया. अब मेरी माँ की चूत मेरे बिल्कुल नज़दीक हो चुकी थी और मैंने उनको अपनी तरफ और खींचा और माँ ने ही अपने कूल्हों और भी ऊपर उठा दिया और तब उनकी चूत, मेरी कुर्सी साथ हो गई. अब पापा मेरी माँ के कारनामे देख रहे थे.

तभी पापा मुझसे बोले अपनी माँ के पैरों को और भी फैलाओ, तब तेरी माँ की चूत पूरी तरह से खुल जाएगी और मैंने पापा की बात को मानते हुए माँ के पैरों को और भी फैला दिया, लेकिन पापा इससे संतुष्ट नहीं थे और वो खुद मेरे पास आकर बैठ गये और माँ के एक पैर को पकड़कर उन्होंने और भी फैला दिया. मैंने भी पापा के साथ मिलकर माँ के एक पैर को खींच लिया. अब माँ के पैर करीब पूरे खुल गए थे और उनकी चूत भी पूरी तरफ से खुल गई थी और हम लोगों को उनकी चूत के अंदर भी साफ साफ दिख रहा था.

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अब में माँ की चूत को पूरा खुला हुआ देखकर बहुत गरम हो गया और मैंने पापा से पूछा कि पापा क्या में माँ की चूत में अपना हाथ डाल दूँ? तभी पापा कहने लगे कि यह तेरी माँ है और तुझे तेरी माँ की चूत को नहीं छूना चाहिए, लेकिन तू अभी छोटा है, इसलिए ठीक है तू बस सिर्फ़ एक बार इस मस्तानी और रसीली चूत को छू सकता है.

मैंने पापा की बात को सुनते ही मैंने अपना एक हाथ अपनी माँ की चूत पर रख दिया. मैंने उनकी चूत को सिर्फ़ छुआ ही नहीं में उनकी चूत के दाने को अपने हाथ से रगड़ा और उनकी चूत के होंठो को भी अपनी उंगली से खींचा, जिसकी वजह से माँ उस समय बहुत कांप रही थी और छटपटा भी रही थी, लेकिन मेरे पापा की पकड़ बहुत मजबूत थी, इसलिए माँ अपनी जांघों को बंद नहीं कर सकती थी.

मैंने अपनी एक उंगली को अंदर डाल दिया, लेकिन सिर्फ़ एक उंगली से माँ की चूत को कुछ नहीं हुआ था, इसलिए मैंने दो और तीन उँगलियों को उनकी चूत में डाल दिया और में अपनी उँगलियों को माँ की चूत के अंदर बाहर करने लगा.

दोस्तों में करीब दस मिनट तक अपनी माँ की चूत को अपनी उँगलियों से चोदता रहा, हम दोनों को बहुत मज़ा मिल रहा था और इसलिए बिना पापा से पूछे मैंने अपनी माँ की खुली और रसीली चूत पर अपना मुहं रख दिया, जिसकी वजह से माँ बहुत छटपटाई, लेकिन में उनकी चूत के बाहर और अंदर अपनी जीभ को डालकर उनकी चूत के हर हिस्से को चाट और चूस रह था और में अपने मुहं में उनकी चूत को लेकर करीब 15 मिनट तक चूसता रहा और अपनी उँगलियों से चोदता रहा, जिसकी वजह से माँ बहुत छटपटाती रही और वो बड़बड़ाती रही और करीब दस मिनट के बाद माँ की चूत ने पानी छोड़ दिया, चूत के झड़ते ही माँ ने अपनी जांघों को बंद कर लिया और थोड़ी देर के बाद वो उठकर खड़ी हो गयी और पापा ने माँ से कपड़े पहन लेने के लिए कहा.

में और पापा कमरे में बैठकर टी.वी. देखने लगे. उस समय पापा सोफे पर बैठे हुए थे और में कुर्सी पर बैठा हुआ था. थोड़ी देर के बाद माँ नंगी ही कमरे में चली आई. अब माँ का वो नंगा रूप और वो भी पापा के सामने देखकर में तो अपने आपे से बाहर हो गया और में पापा से बोला कि पापा मैंने माँ की चूत का तो मज़ा ले लिया है, लेकिन अभी तक उनकी मस्ताने बूब्स नहीं दबाए क्या में इनको थोड़ा सा दबाकर और चूसकर इनका मज़ा ले लूँ? और पापा के कुछ कहने के पहले ही मैंने अपनी नंगी घूम रही माँ को अपनी गोद में खींचकर बैठा लिया, माँ मेरी गोद में मेरी तरफ मुहं करके और अपने दोनों पैरों को मेरे दोनों तरफ करके बैठ गयी.

अब पापा मेरी तरफ देखते हुए मुझसे बोले, बेटे आज तुम्हारे पास सही मौका है, तुम माँ का पूरा मज़ा ले लो, लेकिन देखो चोदना मत और चाहे जो कुछ भी कर लो, क्योंकि तू बेटा और यह तेरी माँ है और इसलिए तू अपनी माँ को चोद नहीं सकता, नहीं तो तू मादरचोद कहलाएगा, हाँ ऊपर ऊपर जो कुछ भी करना है कर ले, क्योंकि शाम को मंजू घर पर आ जाएगी और तब तुझे ऐसा अच्छा मौका नहीं मिलेगा.

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