रूई की तरह मुलायम चूचे

Rui ki tarah mulayam chuche

मेरा नाम है प्रदीप बन्सल और मैं मेरठ शहर में रहता हूँ…

बात उन दिनों की है, जब मेरी पहली गर्लफ्रैंड की शादी हो गई थी और 3-4 महीने हो गये थे; अकेले बिना सेक्स के!!

उन दिनों फेस-बुक पर मेरी दोस्ती हो गई, एक लडकी से जो मुम्बई में रहती थी। 8-10 दिन तक पहले नोर्मल; फिर सेक्स चैट होने लगी और फिर फोन पर बात होने लगी…

उसका अपने पति से तलाक का केस चल रहा था!! फिर, उसने अपनी फोटो भेजी; वो दिखने में 30-32 साल की एकदम काली और मोटी थी। उसने बताया कि उसकी दो बेटी थी 3 और 5 साल की… वो मुझसे मिलने और सेक्स करने को बेताब थी, क्यूंकी उसने 1 साल से सेक्स नहीं किया था!! !!!

तडप तो मैं भी रहा था सेक्स के लिये तो सोचा जैसी भी है, दोनो की प्यास तो बुझेगी… तो मैं पहुँच गया मुम्बई!!

पहली नजर उस पर गई तो लगा कि गलती कर दी इतना दूर आकर; पर कोई बात नहीं।

वो मुझे एक होटल में ले गई, जहाँ उसने एक रूम बुक कर रखा था; तीन दिन के लिये…

पहले हमने लन्च किया और बात करते करते हम आपस में काफ़ी खुल गये थे!! दोपहर के 2 बज रहे थे, मेरी नजर तो बस उसकी चूचियों पर थी… जो 40 की थी!!

फिर, मैंने उसको पुछा; क्या वो मानसिक रूप से तैयार है, मेरे साथ सेक्स के लिये…?? तो वो फ़ौरन मेरे पास आयी और मेरी गोद में बैठकर मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दिये!!

अब हम एक दूसरे को किस किये जा रहे थे और मेरे हाथ उसके कुर्ते के अन्दर उसके चूचों को सहलाने और मसलने लगे…

वो तो इतनी गरम हो गई कि पूरे कमरे में उसकी सिसकारियाँ गूंजने लगी!! मैं भी अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, उसकी गरमी को…

दो मिनट के अन्दर हमारे सारे कपड़े फ़र्श पर थे और हम एक दूसरे को बाहों में भींचकर बुरी तरह चूम रहे थे!! उसके चूचे बच्चों को दूध पिला पिला कर इतने नरम और मक्खन जैसे मुलायम हो गये थे कि मुझे उनको चूसने और मसलने में मजा आ रहा था!!

उसका पूरा बदन रूई की तरह मुलायम था… … …

अब तक मेरा लण्ड लोहे की तरह सख्त हो कर सलामी दे रहा था और उसमें इतना दर्द होने लगा लग रहा था कि जल्दी इसको शान्त नहीं किया तो फट ही जाएगा; अभी…

अब जब मैंने उसकी चूत को हाथ लगाया तो वो उछल पड़ी; उसकी चूत बुरी तरह पानी छोड़ रही थी, उसकी जांघों पर बहने लगी थी… उसने फ़ौरन अपनी जीन्स की पोकेट से कन्डोम निकाला और मेरे लण्ड पर लगा दिया और मैं चढ गया उसके ऊपर और लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रखके जोरदार धक्का लगा दिया!!! !!

पहली बार मैंने किसी चूत में पूरा लण्ड एक धक्के में घुसाया था… … …

वो तो अपने होश में ही नहीं थी, बुरी तरह मुझे अपने ऊपर खींच रही थी और अपनी चूत में मेरे लण्ड को खा रही थी!!

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पहली बार मुझे पता चला कि सेक्स का असली मजा अनुभवी और शादीशुदा के साथ ही आता है!! !!!

धक्को की स्पीड बढती ही जा रही थी, उसकी चूत के गीलेपन की वजह से मेरा लण्ड सटासट शोट लगाये जा रहा था; लग रहा था जैसे मैं वहशी हो गया हूँ!!

धक्के इतने तेज थे कि डबल बेड भी खिसकने लगा था, करीब 30 मिनट के बाद मेरे लण्ड ने वीर्य की बरसात कर दी…

होश आया तो लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला, देखा तो कन्डोम के चिथडे उड चुके थे!! और मेरा वीर्य उसकी चूत से टपके जा रहा था!!! पर लण्ड अभी भी झुकने को तैयार नहीं था और ना ही उसकी प्यास मिटी थी अब तक…

उसने फ़ोरन फ़टा हुआ कन्डोम मेरे लण्ड से उतार कर फेन्का, और फ़िर से मुझे अपने ऊपर खीच लिया!!!

इसके बाद तो उस कमरे में जो तूफ़ान आया; उसके लिये तो शब्द ही नहीं है मेरे पास… … …

कितनी बार वो झडी और कितना वीर्य मेरे लण्ड ने उसकी चूत में डाला, कुछ पता नहीं!!

अलग हुए तो, घडी शाम के 6 बजा रही थी… उसके चूचों पर मेरे दाँतों के निशान, उसके बदन पर मेरा पसीना और उसकी चूत और जांघों पर मेरे वीर्य फैल हुआ था!! !!!

आज, के लिये बस इतना ही…

दोस्तो, लिखते लिखते उस पल को याद करके मेरा लण्ड प्यासा होने लगा है!! !!!

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