सेक्सी धोबन और उसका बेटा-15

Sexy Dhoban Aur Uska Beta-15


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सच बताता हूँ . दोनो फांको को चिर कर मैने जब चूत के गुलाबी रस से भीगे छेद को देखा तो मुझे यही लगा कि मेरा तो जनम सफल हो गया है. चूत के अंदर का भाग एकदम गुलाबी था और रस से भीगा हुआ था जब मैने उस चीर को छुआ तो मेरे हाथो में चिपचिपा सा रस लग गया.

मैने उस रस को वही बिस्तर के चादर पर पोछ दिया और अपने सिर को आगे बढ़ा कर माँ के बुर को चूम लिया. माँ ने इस पर मेरे सिर को अपने चूत पर दबाते हुए हल्के से सिसकते हुए कहा “बिस्तर पर क्यों पोछ दिया, उल्लू, यही माँ का असली प्यार है जो कि तेरे लंड को देख के चूत के रास्ते छलक कर बाहर आ रहा है, इसको चख के देख, चूस ले इसको ”
“हाँ माँ मैं तेरे बुर को जरुर चुसुंगा”

“हाँ बेटा चूस ले अपनी माँ के चूत के सारे रस को, दोनो फांको को खोल के उसमे अपनी जीभ डाल दे और चूस, और ध्यान से देख तू तो बुर के केवल फांको को देख रहा है, देख मैं तुझे दिखाती हू”

और माँ ने अपने चूत को पूरा फैला दिया और अंगुली रख कर बताने लगी “देख ये जो छोटा वाला छेद है ना वो मेरे पेशाब करने वाला छेद है, बुर में दो – दो छेद होते है, उपर वाला पेशाब करने के काम आता है और नीचे वाला जो ये बड़ा छेद है वो चुदवाने के काम आता है इसी छेद में से रस निकालता है ताकि मोटे से मोटा लंड आसानी से चूत को छोड़ सके, और बेटा ये जो पेशाब वाले छेद के ठीक उपर जो ये नुकीला सा निकला हुआ है वो क्लिट कहलाता है और ये औरत को गर्म करने का अंतिम हथियार है. इसको छूटे ही औरत एकदम गरम हो जाती है, समझ में आया?”
“हाँ माँ , आ गया समझ में . हाय , कितनी सुंदर है ये तुम्हारी बुर, मैं चाटुं अब इसे माँ ..”

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“हाँ बेटा, अब तू चाटना शुरू कर दे, पहले पूरी बुर के उपर अपनी जीभ को फिरा के चाट फिर मैं आगे बताती जाती हूँ कि कैसे कैसे करना है”
मैने अपनी जीभ निकाल ली और माँ की बुर पर अपने ज़ुबान को फिरना शुरू कर दिया, पूरी चूत के उपर मेरी जीभ चल रही थी और मैं फूली हुई गद्देदार बुर को अपनी खुरदरी ज़बान से उपर से नीचे तक चाट रहा था. अपनी जीभ को दोनो फांको के उपर फेरते हुए मैं ठीक बुर के दरार पर अपनी जीभ रखी और धीरे धीरे उपर से नीचे तक पूरे चूत की दरार पर जीभ को फिराने लगा, बुर से रिस रिस कर निकालता हुआ रस जो बाहर आ रहा था उसका नमकीन स्वाद मेरे मुझे मिल रहा था. जीभ जब चूत के उपरी भाग में पहुच कर क्लिट से टकराती थी तो मा की सिसकिया और भी तेज़ हो जाती थी.

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माँ ने अपने दोनो हाथो को शुरू में तो कुछ देर तक अपनी चुचियों पर रखा था और अपनी चुचियों को अपने हाथ से ही दबाती रही मगर बाद में उसने अपने हाथो को मेरे सिर के पीछे लगा दिया और मेरे बालो को सहलाते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी. मेरी चूत चुसना बदस्तूर जारी थी और अब मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि माँ को सबसे ज्यादा मज़ा अपनी क्लिट की चूसाने में आ रहा है इसलिए मैने इस बार अपने जीभ को नुकीला कर के क्लिट से सटा दिया और केवल क्लिट पर अपनी जीभ को तेज़ी से चलाने लगा. मैं बहुत तेज़ी के साथ क्लिट के उपर जीभ चला रहा था और फिर पूरे क्लिट को अपने होंठो के बीच दबा कर ज़ोर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, माँ ने उत्तेजना में अपने चूतडों को उपर उछाल दिया और ज़ोर से सिसकिया लेते हुए बोली “है दैया, उईईइ मा सी सी….. चूस ले ओह चूस ले मेरे भगनसे को ओह, सी क्या खूब चूस रहा है रे तू, ओह मैने तो सोचा भी ऩही थऽआअ की तेरी जीभ ऐसा कमाल करेगी, हाय रे बेटा तू तो कमाल का निकला ओह ऐसे ही चूस अपने होंठो के बीच में भगनसे को भर के इसी तरह से चूस ले, ओह बेटा चूसो, चूसो बेटा……”

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माँ के उत्साह बढ़ने पर मेरी उत्तेजना अब दुगुनी हो चुकी थी और मैं दुगुने जोश के साथ एक कुत्ते की तरह से लॅप लॅप करते हुए पूरे बुर को चाटे जा रहा था. अब मैं चूत के भगनसे के साथ साथ पूरे चूत के माँस (गुड्डे) को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था और, माँ की मोटी फूली हुई चूत अपने झाटों समेत मेरे मुँह में थी. पूरी बुर को एक बार रसगुल्ले की तरह से मुँह में भर कर चूसने के बाद मैने अपने होंठो को खूल कर चूत के चोदने वाले छेद के सामने टिका दिया और बुर के होंठो से अपने होंठो को मिला कर मैने खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. बुर का नशीला रस रिस रिस कर निकल रहा था और सीधा मेरे मुँह में जा रहा था. मैने कभी सोचा भी ऩही था की मैं चूत को ऐसे चुसूंगा या फिर चूत की चूसाई ऐसे की जाती है, पर शायद चूत सामने देख कर चूसने की कला अपने आप आ जाती है.

फुददी और जीभ की लड़ाई अपने आप में ही इतनी मजेदार होती है कि इसे सीखने और सीखाने की ज़रूरत ऩही पड़ती. , बस जीभ को फुददी दिखा दो बाकी का काम जीभ अपने आप कर लेती है. माँ की सिसकिया और शाबाशी और तेज हो चुकी थी, मैने अपने सिर को हल्का सा उठा के मा को देखते हुए अपने बुर के रस से भीगे होंठो से माँ से पुछा, “कैसा लग रहा है माँ , तुझे अच्छा लग रहा है?”

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माँ ने सिसकते हुए कहा ” हाय बेटा, मत पुछ, बहुत अच्छा लग रहा है, मेरे लाल, इसी मज़े के लिए तो तेरी माँ तरस रही थी. चूस ले मेरे बुर को और ज़ोर से चुस्स्स्स्सस्स.. . सारा रस पी लीई मेरे सैय्या, तू तो जादूगर है रीईईई, तुझे तो कुछ बताने की भी ज़रूरत ऩही, है मेरे बुर के फांको के बीच में अपनी जीभ डाल के चूस बेटा, और उसमे अपने जीभ को लिबलिबते हुए अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक घुमा दे, हाय घुमा दे राजा बेटा घुमा दे….

कहानी जारी है……

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