सेक्सी धोबन और उसका बेटा-17

Sexy Dhoban Aur Uska Beta-17

तभी माँ की नज़र मेरे 8.5 इंच के लंड की तरफ गई और वो चौंक के बोली “अरे ऐसे कैसे सो जाऊं ? और मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया. बोली – मेरे लाल का लंड खडा हो के बार बार मुझे पुकार रहा है और मैं सो जाऊं ? ”
“ओह माँ , इसको तो मैं हाथ से ढीला कर लूँगा. तुम सो जाओ”
“ऩही मेरे लाल आजा ज़रा सा माँ के पास लेट जा, थोरा दम ले लूँ फिर तुझे असली चीज़ का मज़ा दूँगी”

मैं उठ कर मा के बगल में लेट गया. अब हम दोनो मा बेटे एक दूसरे की ओर करवट लेते हुए एक दूसरे से बाते करने लगे. माँ ने अपना एक पैर उठाया और अपनी मोटी जाँघो को मेरे कमर पर डाल दिया. फिर एक हाथ से मेरे खड़े लंड को पकड़ के उसके सुपाडे के साथ धीरे धीरे खेलने लगी. मैं भी माँ की एक चुची को अपने हाथो में पकड कर धीरे धीरे सहलाने लगा और अपने होंठो को माँ के होंठो के पास ले जा कर एक चुंबन लिया. माँ ने अपने होंठो को खोल दिया. चूमा चाटी ख़तम होने के बाद माँ ने पुछा “और बेटे, कैसा लगा माँ की बुर का स्वाद, अच्छा लगा या ऩही?”
“हाँ मान बहुत स्वादिष्ट था, सच में मज़ा आ गया”

“अच्छा , चलो मेरे बेटे को अच्छा लगा इस से बढ़ कर मेरे लिए कोई बात ऩही”
“माँ तुम सच में बहुत सुंदर हो, तुम्हारी चुचिया कितनी खूबसूरत है, मैं…. मैं क्या बोलू मा, तुम्हारा तो पूरा बदन खूबसूरत है.”
“कितनी बार बोलेगा ये बात तू मेरे से, मैं तेरी आँखें ऩही पढ़ सकती क्या, जिनमे मेरे लिए इतना पायर छलकता है”.
मैं माँ से फिर पूरा चिपक गया. उसकी चुचिया मेरी छाती में चुभ रही थी और मेरा लंड अब सीधा उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था. हम दोनो एक दूसरे की आगोश में कुछ देर तक ऐसे ही खोए रहे फिर मैने अपने आप को अलग किया और मसलते मसलते मेरी नज़र मा के सिकुड़ते – फैलते हुए गांड के छेद पर पडी . मेरे मन मैं आया कि क्यों ना इसका स्वाद भी चखा जाए. देखने से तो माँ की गांड वैसे भी काफ़ी खूबसूरत लग रही थी जैसे गुलाब का फूल हो. मैने अपनी लपलपाति हुई जीभ को उसके गांद की छेद पर लगा दिया और धीरे धीरे उपर ही उपर लपलपते हुए चाटने लगा. गांद पर मेरी जीभ का स्पर्श पा कर माँ पूरी तरह से हिल उठी.

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“ओह ये क्या कर रहा है, ओह बड़ा अच्छा लग रहा है , कहा से सीखा ये, तू तो बड़ा कलाकार है रे…. , हाय राम देखो कैसे मेरी बुर को चाटने के बाद मेरी गांड को चाट रहा है, तुझे मेरी गांड इतनी अच्छी लग रही है कि इसको भी चाट रहा है, ओह बेटा सच में गजब का मज़ा आ रहा है, चाट ले चाट ले पूरे गांड को चाट ले ओह ओह उूुुुुुऊउगगगगगगगग” .
मैने पूरे लगन के साथ गांड के छेद पर अपने जीभ को लगा के, दोनो हाथो से दोनो चूतडों को पकड कर छेद को फैलया और अपनी नुकीली जीभ को उसमे ठेलने की कोशिश करने लगा.

माँ को मेरे इस काम में बड़ी मस्ती आ रही थी और उसने खुद अपने हाथो को अपने चूतडों पर ले जा कर गांद के छेद को फैला दिया और मुझे जीभ पेलने के लिए उत्साहित करने लगी. “हाय रे जालिम … पेल दे जीभ को जैसे मेरी बुर में पेला था वैसे ही गांड के छेद में भी पेल दे और पेल के खूब चाट .. मेरी गांड को है…हाय दैया…मै तो मर ही जाउंगी आज.खुशी के मारे…, ओह इतना मज़ा तो कभी ऩही आया था, ओह देखो कैसे गांद चाट रहा है,,,,,,,,सस्स्स्स्ससे ईईई चाटो बेटा चाटो और ज़ोर से चाटो , माधरचोद….असली गांडू है रे तू.. ”

मुझे माँ की गालियाँ बहुत प्यारी लग रही थी. मैं पूरी लगन से गांड चाट रहा था. मैने देखा कि चूत का गुलाबी छेद अपने नशीले रस को टपका रहा है तो मैने अपने होंठो को फिर से बुर के गुलाबी छेद पर लगा दिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा जैसे कि पीपे लगा के कोकोकॉला पी रहा हूँ , सारे रस को चाट के खाने के बाद मैने बुर के छेद में जीभ को पेल कर अपने होंठो के बीच में बुर के भगनसे को क़ैद कर लिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दी. माँ के लिए अब बर्दाश्त करना शायद मुश्किल हो रहा था उसने मेरे सिर को अपनी बुर से अलग करते हुए कहा “अब छोड़ बहिनचोद.., फिर से चूस के ही झार देगा क्या, अब तो असली मज़ा लूटने का टाइम आ गया है, है बेटा राजा अब चल मैं तुझे जन्नत की सैर कराती हू अब अपनी माँ की चुदाई करने का मज़ा लूट मेरे राजा, चल मुझे नीचे उतरने दे साले”

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मैने माँ की बुर पर से मुँह हटा लिया. वो जल्दी से नीचे उतर कर लेट गई और अपने पैरो को घुटनो के पास से मोड कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया और अपने दोनो हाथो को अपनी बुर के पास ले जा कर बोली “आ जा राजा जल्दी कर अब ऩही रहा जाता, जल्दी से अपने मूसल को मेरी ओखली में डाल के कूट दे, जल्दी कर बेटा डाल दे अपना लंड अपनी माँ की प्यासी चूत में”

मैं उसके दोनो जाँघो के बीच में आ गया पर मुझे कुछ समझ में ऩही आ रहा था कि क्या करू, फिर भी मैने अपने खड़े लंड को पकडा और माँ के उपर झुकते हुए उसकी बुर से अपने लंड को सटा दिया. माँ ने लंड के बुर से सटते ही कहा “हाँ अब मार धक्का और घुसा दे अपने घोड़े जैसे लंड को माँ की बिल में”

मैने धक्का मार दिया पर ये क्या लंड तो फिसल कर बुर के बाहर ही रगड़ खा रहा था, मैने दुबारा कोशिश की फिर वही नतीज़ा ढाक के तीन पात .. फिर लंड फिसल के बाहर, इस पर माँ ने कहा “रुक जा मेरे अनाडी सैय्या, मुझे ध्यान रखना चाहिए था. तू तो पहली बार चुदाई कर रहा है ना, अभी तुझे मैं बताती हूँ. ” फिर अपने दोनो हाथो को बुर पर ले जा कर चूत के दोनो फांको को फैला दिया, बुर के अंदर का गुलाबी छेद नज़र आने लगा था, बुर एकदम पानी से भीगी हुई लग रही थी, बुर चिदोरकर माँ बोली “ले मैने तेरे लिए अपने चूत को फैला दिया है अब आराम से अपने लंड को ठीक निशाने पर लगा के पेल दे”.

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