सोनी की सोनी-सोनी कुंवारी चूत 2

Soni ki soni soni kunwari chut-2

मैं सोफ़े पर बैठ गया और सोचने लगा कि अभी क्या हुआ, मुझे बार-बार वो पल याद आता जब उसके होंठों का स्पर्श मेरे होंठों को हुआ था, बड़ा ही दिलकश अहसास था वो।

रात को बार-बार मुझे वो चुम्मी याद आती रही, मेरी तो नींद ही उड गई थी।

अगले दो-तीन दिन तक वो नहीं दिखी मुझे, मैंने उसे कॉल किया तो बंद आ रहा था।

मैं उसके बारे में भूल गया, फिर अगले दिन रात को मुझे किसी ने आवाज़ लगाई, वह निखिल था मेरा दोस्त, मुझसे मिलने आया था।

मैं बाहर गया तो हम बाहर खड़े होकर ही बातें करने लगे, तब मेरी नजर सोनी पर पडी, लाल कपड़ों में क्या लग रही थी, वो अपने परिवार के साथ कहीं बाहर से आ रही थी।

सबके जाने के बाद निखिल बोला – भाई क्या माल था, इससे मिलवा ना।

मैंने कहा – कुत्ते, तेरे इस भाई का माल है वो, भाभी है तेरी।

निखिल – क्या? चूतिया बना रहा है?

मैंने उसकी छाती पर धीरे से मुक्का मारा, और बोला – रुक साले, अभी बताता हूँ।

उसको मैंने सारे मैसेज पढ़ाये, तो बोला – साले, तेरी तो निकल पडी, इसकी पार्टी तो बनती है और कुछ किया या नहीं?

मैंने कहा – नहीं तो।

तो साले कब करेगा? वो बोला – अभी मैं चलता हूँ कुछ काम है। और हाँ जरुरत हो तो मेरे पुराने घर की चाबी ले जाना। उसने आँख मारते हुए कहा।

यार, बात तो सही है इसकी, काफी दिनों से चूत नहीं मारी किसी की। मैं सोचने लगा। अगले कुछ दिन मैं मौका तलाशता रहा, और आखिरकार मुझे मिला भी।

उस शानदार दिन की दोपहर में भाई कॉलेज गया था, पापा दफ़्तर, और मम्मी मामा के यहाँ गई थी। कुल मिलाकर मैं घर मे अकेला था।

मैंने उसे मैसेज किया। तो थोड़ी ना- नुकर के बाद वो मान गई।

मैं खुश हो गया और नीचे जा कर गेट खोल दिया। वो अन्दर आई तो मैंने जानमुझ कर दरवाजा बंद कर लिया ताकि अगर कोई आ जाये तो दरवाज़ा खुलने की आवाज़ से पता चले।

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उसने गहरे रंग की फूलों के डिजाइन वाली टी-शर्ट और जीन्स पहना था। हम ऊपर कमरे में गये, वहाँ बिस्तर पर मेरा लेपटोप चालू पड़ा था।

वो जाकर बिस्तर पर बैठी और पूछने लगी – क्या कर रहे थे?

मैंने कहा गेम खेल रहा था। तो मुँह बनाकर बोली – बस यही करो तुम, और कुछ आता नहीं क्या?

ओह जान, छोडो ना, और जल्दी से मुझे चुम्मा दे दो। मैं उस पर झपटा।

छोडो प्रेम, क्या कर रहे हो? वो थोड़ा हिचकिचाई और मुझे धक्का लगा दिया।

बस एक चुम्मी जान, मैं दोबारा बढ़ा उसकी ओर और मैंने उसको कमर से पकड़ कर अपने से सटा दिया। वो फिर भी मना करती रही।

मैं झूठ-मूठ का नाराज़ हो गया और बोला- ठीक है, जाओ और जाकर लेपटोप लेकर बैठ गया।

मैं चेयर पर बैठा था और पैर बिस्तर पर पसार के बैठा था और लेपटोप पैरों पर रखा था।

वो थोड़ी देर खडी रही फिर बोली – ओह प्रेम, आय एम सॉरी बस, गुस्सा मत करो प्लीज।

मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी और गेम खेलने लगा। वो मुझे मनाती रही – प्रेम, तुम चाहो तो किस कर सकते हो, नाराज मत हो यार।

मैंने उसकी तरफ़ ध्यान नहीं दिया तो उसने लेपटोप बंद कर दिया और मेरे हाथों से छीनकर बिस्तर पर रख दिया। मैं उसकी ओर देखने लगा, उसकी आँखों में अजीब सी चमक थी।

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वो मेरे करीब आई और मेरे होंठ चुमने लगी।

फिर वो रुकी, मुझे देखने लगी और बोली – सॉरी।

मैं मुस्कुराने से खुद को रोक नहीं पाया, मुझे मुस्कुराता देख उसे थोड़ा चैन आया।

ठीक है, पर मैं बदला जरूर लूँगा। कहकर उसे बिस्तर पर धकेल दिया और उसपर चढ गया।

वो हँसने लगी – कैसा बदला? मैं कुछ नहीं बोला।

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मैंने उसके दोनों हाथों को कलाइयों से पकड़ कर बिस्तर से चिपका दिये, उसके चुचे मेरी छाती को छू रहे थे, जो हाथ खोलने की वजह से ऊपर को उठ गये थे।

अब मैं उसकी आँखो में आँखें डाले उसे देख रहा था, वो चुप थी, बस मुस्कुरा रही थी।

मैं कुछ देर वैसे ही रहा फिर उसके होंठों को चुमने थोड़ा आगे बढ़ा तो उसने आँखें बंद कर ली। उसकी साँसे तेज होने लगी।

मैंने उसके लब चुसने शुरू कर दिये, कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी, काफी देर तक हम एक-दूसरे को चूमते रहे उस दौरान मैंने कई बार अपनी जीभ उसके मुँह मैं डालने की कोशिश की पर नाकाम रहा।

अब मैंने उसके हाथों को आजाद कर दिया, उसने अपने हाथों को मेरी गर्दन से लपेट लिया।

मैंने सोचा इसे शायद वैसे चूमना नहीं पता, कुछ देर रुकने के बाद हमने फिर से चुम्बन स्टार्ट किया तब मैं बीच में रुका और उसको कहा – अपना मुँह थोड़ा सा खोल कर मेरी जीभ को अपनी जीभ से छुओ।

वो पहले थोड़ा हिचकिचाई पर जब मैंने फिर चुमना शरू किया तो उसने वैसा ही किया, अब जब मुझे आजादी मिल चुकी थी तो मैंने अपनी जीभ उसके मुँह मे घुमाना शुरू कर दिया।

चुम्बनों के दौरान मेरे हाथ घुमते-घुमाते उसके स्तन पर जा रुके, मैंने उन कबूतरों को सहलाना शुरू किया, पर उसने मेरा हाथ हटा दिया, मैंने दोबारा हाथ रख कर दबाना शुरू किया तो उसने फिर हाथ हटा लिये, दो-तीन बार यही हुआ और आखिर उसने हार मान ली।

अब मैं मज़े से उसके संतरे दबा रहा था।
कुछ देर बाद हम अलग हुए तो मैंने उसकी टी-शर्ट निकालने की कोशिश की उसने भी कोई विरोध नहीं किया, अन्दर उसने सफ़ेद बिंदुओं वाली लाल ब्रा पहनी थी।

उसके मम्मे ज्यादा बड़े नहीँ थे, पर इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्यूँकि दोस्तो बोम्ब छोटा हो या बड़ा, घमाका तो करता ही है।

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वो शर्मा रही थी, और अपने हाथों से चुचों को छुपा रही थी। मैंने प्यार से उसके हाथों को हटाया और बूब्स को चुमा और ऊपर जाकर उसके होंठों का रस पीने लगा। और जोर-जोर से उसके मम्मे दबा रहा था, वो मदहोश हुई जा रही थी।

मैं सोच रहा था जिस बूब्स को सिर्फ़ दूर से देखकर लंड खड़ा होता था, आज वो मेरी मुठ्ठी मे है।

कुछ देर की चुम्माचाटी के बाद जब मैंने आगे बढ़ना चाहा तो वो मुझे रोकने लगी – नहीं प्रेम अब आगे नहीं, अगर कुछ हो गया तो?

अरे यार, कुछ नहीं होगा, मैं माल बाहर निकाल दूँगा या पिल्स ले आउँगा। मैं बुदबुदाया। वो कुछ नहीं बोली तो मैं आगे बड़ा, वो हल्का-हल्का विरोध कर रही थी पर मुझे उसकी परवा नहीं थी।

पर फ़ुटी किस्मत का क्या करें यारों, उतने में ही मुझे दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। वो मेरी ओर देखने लगी, मैंने उसे कपडे पहनने का ईशारा किया। और खुद भी शर्ट पहन लिया।

मैं सोच रहा था की कौन वापस आ गया? इतनी जल्दी तो कोई आनेवाला नहीं था।

हम दोनों जल्दी से नीचे आ गये, वो सोफ़े पर बैठ गई और मैं दरवाजा खोलने गया।
दरवाजा खोला तो पता चला गैस सिलेंडर वाला है।

उसकी भी फ़टी पडी थी पर जब मैंने उसे जाकर ये बताया तो उसकी हँसी निकल गई।

वो अब जाना चाहती थी, मैंने रोकने की कोशिश की तो उसने कहा- फिर कभी।

मुझे गुस्सा आ रहा था उस सिलेंडर वाले पर, फिर मैंने सोचा- कोई बात नहीं, अगली बार नहीं छोडुँगा। और उसे अगली बार चोदने की प्लानिंग करने लगा।

कहानी जारी है ..

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