अजनबी से दोस्ती, प्यार और चुदाई-2

Ajnabi Se Dosti, Pyar Aur Chudai-2

मैंने उसके माथे पर किस किया, उसके गोरे गालो पर किस किया, फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।
वो भी मेरा साथ देने लगी और हम दोनों खड़े खड़े 10 मिनट तक एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे।

फिर मैंने टीशर्ट के ऊपर से ही अपना हाथ उसके चूचों पर रख दिया और धीरे धीरे दबाने लगा। वो जैसे पागल सी होने लगी और तेज तेज सांसें लेने लगी।
मैंने उसको अपनी गोद में उठा लिया और उनको प्यार से बिस्तर पर लिटा दिया।
दोस्तो, मुझे उस वक़्त ऐसी फीलिंग आ रही थी जैसे आज मेरी सुहागरात हो।

फिर मैंने उसको फिर से चुम्बन करना आरम्भ किया और साथ में मैं उसके उरोजों को दबा रहा था। फिर मैंने उसकी टीशर्ट निकाल दी।
क्या बताऊँ दोस्तो … अंदर का नज़ारा देख कर तो मैं हिल गया।
क्या बूब्स थे उसके!
उसने गुलाबी ब्रा पहन रखी थी।

Sexy Girlfriend Ki Chudai
Sexy Girlfriend Ki Chudai
फिर मैंने उसकी जीन्स भी निकाल दी, उसने गुलाबी रंग की ही पैंटी पहन रखी थी। वो मेरे सामने गुलाबी ब्रा पैंटी में थी और एकदम किसी मॉडल की तरह लग रही थी।
परी बोली- जान, तुमने मेरे कपड़े तो निकाल दिए, अपने भी निकालो।
मैं बोला- तुम खुद ही निकाल दो।

फिर परी ने मेरी टीशर्ट और पैंट निकाली और मैंने अपनी बनियान भी निकाल दी और सिर्फ अंडरवियर में आ गया।

अब मैंने उसकी ब्रा निकली।
और ब्रा निकलते ही मेरे मुंह से वाओ निकला।
वो बोली- क्या हुआ?
मैं बोला- तुम्हारे बूब्स कितने ब्यूटीफुल हैं।

अपनी तारीफ सुन कर वो शर्मा गयी। मैं उन रसीले आमों का रस निचोड़ने लगा। मैंने उसके एक बूब्स को मुँह में लिया और दूसरे को दबाने लगा।

परी तेज तेज सांसें लेने लगी और मेरे सिर को अपने बूब्स में दबा दिया। मैं बारी बारी दोनों बूब्स को दबा रहा था, चूस रहा था। उसकी सिसकारियां निकलने लगी ‘आह … आ … ओ … आ … ओर ज़ोर से दबाओ इनको।’

उसकी सिसकारियां सुनके मुझे ओर जोश आ रहा था। बूब्स से नीचे होते हुए मैंने अपनी जीभ से उसकी नाभि में कुरेदना शुरू किया।
मेरी जीभ का स्पर्श पाते ही वो वो बिना जल मछली की तरह तड़प उठी और ज़ोर ज़ोर से सिसकारी ले रही थी।

फिर मैं एक हाथ पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर ले गया और मसलने लगा।
परी को जैसे करंट लग गया। वो ज़ोर से कसमसाई लेकिन मेरा हाथ नहीं हटाया।

तब मैंने उसकी पैंटी निकल दी उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, ऐसा लग रहा था जैसे आज ही उसने अपनी चूत के बाल साफ किये हैं।
फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर लगाई और उसकी चूत चाटने लगा।

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उसने ज़ोर से सिसकारी ली- आ … सिद्धार्थ रुको, मुझे कुछ हो रहा है!
लेकिन मैं नहीं रुका।

फिर वो ओर ज़ोर से सिसकारी लेने लगी- अह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह … उइ … सीसी …
और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगी।

5 मिनट में ही उसका शरीर अकड़ गया और उसने पानी छोड़ दिया। मैं उसका पानी चाट गया। फिर मैं उठा और उसको देखने लगा।
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा मेरी जान?
परी बोली- बहुत मजा आया.

फिर मैंने अपना अंडरवियर निकल दिया और वो मेरे लंड को देख के डर गयी।
मैं बोला- इसको प्यार करो।
परी बोली- इतना बड़ा कैसे जाएगा मेरी चूत में? फट जाएगी मेरी चूत!
मैं बोला- कुछ नहीं होगा, मैं आराम से करूँगा।

फिर मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया। परी उसको धीरे धीरे सहलाने लगी। मेरा लंड बिल्कुल टाइट हो गया था, ऐसा लग रहा था जैसे अभी फट जाएगा।

अब मैंने उसको लंड मुँह में लेने के लिए बोला लेकिन उसने मना कर दिया।
मैं बोला- यार जैसे मैंने तेरी चूत चाटी थी तो तुझे मजा आया न? तो अगर तू मेरा लण्ड चूसेगी तो मुझे भी मजा आएगा। तू चाहती है कि मैं ऐसे ही बिना मजे के रहूँ?
तो वो मान गई।

परी ने मेरे पेनिस के टोपे को मुंह में लिया और थोड़ा सा चूसा। उसने एक मिनट ही मेरा पेनिस चूसा फिर उसने मेरा पेनिस बाहर निकाल दिया।
मैं बोला- क्या हुआ करो न!
परी- नहीं मुझसे नहीं होगा। मुझे वॉमिटिंग जैसा फील हो रहा है।

मैंने ज्यादा जबरदस्ती नहीं की। मैंने उसे पानी पिलाया और फिर से किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा। पांच मिनट में ही वो फिर से गर्म हो गयी।
मैंने तकिये के नीचे से कंडोम निकाला और अपने लंड पर चढ़ा लिया।

फिर मैंने उसकी आँखों में देखा और अपने पेनिस को उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो सिसकारियां लेने लगी। जब वो पूरी वासनामयी हो गयी तब मैंने अपने पेनिस को उसकी चूत में हल्का सा डाला।
मेरे पेनिस का अभी टॉप ही घुसा था कि वो चिल्लाने लगी- उईम्मा आहा! रुको … नहीं …!
मैं वहीं रुक गया और उसके बूब्स दबाने लगा।

वो मुझे पेनिस बाहर निकलने को बोलने लगी लेकिन मैंने पेनिस नहीं निकाला और उसे समझने लगा- बस जानू, अब नहीं होगा दर्द!
और उसे किस करने लगा।
5 मिनट में वो बिल्कुल शांत हो गयी।

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मैंने उससे पूछा- अब करूं?
उसने आँखों से मुझे स्वीकृति दे दी।

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मुझे पता था कि अगर मैंने और अंदर डाला तो ये फिर चिल्ला देगी। इसलिए मैं उतने ही पेनिस से अंदर बाहर करने लगा। तो उसको भी अच्छा लगने लगा और वो फिर गर्म हो गयी और सिसकारियां लेने लगी।

मैंने सोचा अब सही समय है पूरा लंड डालने का। तो मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया और पेनिस को पूरा पीछे खींच के एक ज़ोर का झटका मारा।
वो ज़ोर से चिल्लाना चाहती थी लेकिन मैंने अपने होंठों से उसके होंठ बन्द कर रखे थे इसलिए चिल्ला न सकी।
उनकी आंखों में आंसू आ रहे थे और उसकी चूत की झिल्ली फट गयी थी और उसकी चूत से खून निकलने लगा।

मेरा अभी आधा लंड ही अंदर घुसा था। मैंने 5 मिनट इन्तजार किया. जब उसका दर्द कम हुआ तो मैं फिर से अपने आधे लंड से ही उसको चोदने लगा वो भी मेरा साथ देने लगी और सिसकारी लेने लगी- आ … आह … सिद्धार्थ बहुत मजा आ रहा है … और ज़ोर से करो आह … आ … औय … आ … आज तुमने मुझे कली से फूल बना दिया सिद्धार्थ … आहआ … सी … सी … ओह … आ … ज़ोर से करो और ज़ोर से!

उसकी सिसकारी सुन कर मेरे अंदर और जोश आ गया; मैंने अपने लंड को पीछे खींचा और एक और ज़ोर का झटका मारा और वो ज़ोर से चिल्ला दी।
मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया।

उसकी आँखों में फिर से आँसू थे, वो बोली- आज तो तूने मुझे मार डाला। मेरी चूत फाड़ दी। निकाल इसे मेरी चूत से जल्दी।
लेकिन मैंने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और उसे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
वो चिल्ला रही थी।

लेकिन कुछ ही पल में उसका दर्द गायब हो गया और चिल्लाने की जगह वो ओर ज़ोर से सिसकारी लेने लगी- आह … सिद्धार्थ और ज़ोर से करो … बहुत अच्छा लग रहा है … आ … ओह … आह … आ … आह … आ!

परी ने मुझे कस के पकड़ लिया और उसका शरीर अकड़ने लगा। मुझे पता चल गया कि वो झड़ने वाली हैं। मैंने अपने धक्के ओर तेज कर दिये। पूरे कमरे में चप चप ओर हमारी सिसकारी की आवाज ही गूँज रही थी।

और तभी उसका पानी निकल गया।

परी बिल्कुल बेसुध पड़ी रही और मैं उसे चोदे जा रहा था।

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मैं उसके बूब्स दबाने लगा। वो फिर से गर्म होने लगी और मेरा साथ देने लगी। फिर मैं एकदम रुक गया।
परी कुछ समझी नहीं।

फिर मैंने उसको उठाया और उसे घोड़ी बना दिया। मैंने पीछे से उसकी चूत में अपना पेनिस डाल दिया और फिर से जबरस्त चुदाई शुरू हुई।
परी लगातार सिसकारी ले रही थी- आह … ओह … सिद्धार्थ फक मी हार्डर … आह … फक मी … ओर जोर से … आह!

मेरी जानम परी की सिसकारियों से मुझमें और जोश आ रहा था और मैं पूरी ताकत से उसकी चुदाई किये जा रहा था।

फिर मेरा पानी निकलने को हुआ और मैं पूरी ज़ोर से तेज़ी के साथ धक्के लगाने लगा. कुछ ही पलों में मेरा पानी निकाल गया और वो भी मेरे साथ ही झड़ गयी।
5 मिनट तक हम यों ही एक दूसरे से चिपके पड़े रहे, फिर मैं साइड में लेट गया।
हम दोनों की सांसें अभी तक तेज चल रही थी।

मैंने परी से पूछा- कैसा लगा पहला सैक्स?
परी- शुरू में तो बहुत दर्द हुआ, ऐसा लगा जैसे जान ही निकल जाएगी आज, लेकिन बाद में बहुत मजा आया।
मैंने उसको ज़ोर से गले लगाया।

फिर मैं वाशरूम गया।

वापिस आया तो परी उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन दर्द की वजह से उठ भी नहीं पा रही थी। फिर मैंने उसको उठाया और वाशरूम ले गया। और उसकी चूत की सफाई में उसकी मदद की।

फिर हम दोनों दोबारा लेट गये। मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा तो मैं फिर से परी के बूब्स दबाने लगा।
वो बोली- क्या बात है जनाब? अभी तक मन नहीं भरा क्या?
मैं बोला- तू है ही इतनी हॉट … तुझसे तो कभी नहीं भरेगा दिल।
वो हल्के से मुस्कुराई।

मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिये। फिर हमारी चुदाई का दूसरा राउंड शुरु हुआ।
और ये राउंड 15 मिनट तक चला।

फिर हमने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे को ज़ोर से गले लगाया और वापिस अपने घर की तरफ निकल पड़े।
तो दोस्तो, यह थी मेरी औ परी की पहली चुदाई की सच्ची कहानी। आशा करता हूं कि आपको पसंद आई होगी।

मेरी इस रियल sex कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया मुझे जरूर दीजिएगा ताकि मैं अगली कहानी लिखने के लिए प्रेरित हो सकूं।

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