दीदी की चुदाई का निमंत्रण
पढ़ें आशु और उसकी सेक्सी बहन पदमा की हॉट चुदाई कहानी। शादी के बाद अनिल की नपुंसकता ने दीदी को प्यासा छोड़ दिया, फिर भाई ने उसकी चूत की आग बुझाई। मनाली में हुई इस कामुक चुदाई की पूरी डिटेल यहाँ।
हाय दोस्तों, मेरी बहन पदमा जब 22 साल की हुई, तब मैं 21 का था। मेरा नाम आशु है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरा कद 5 फीट 11 इंच है और मेरा जिस्म कसरती और फिट है। जिस कंपनी में मैं काम करता हूँ, उसकी मालकिन मिस कुकरेजा एक 40 साल की खूबसूरत औरत है, जिसके पति का देहांत हो चुका है। उनके दो बच्चे हैं – एक बेटा अनिल और एक बेटी अनीला। अनिल मेरा दोस्त है, 23 साल का है और वो दिखने में बिल्कुल लड़की जैसा है – गोरा, गुलाबी होंठ, 5 फीट 7 इंच का कद, भूरे बाल और उसकी सबसे आकर्षक चीज़ उसकी उभरी हुई गांड है। मेरे दोस्त अक्सर मज़ाक में कहते हैं कि अनिल को लड़की होना चाहिए था, क्योंकि उसकी गांड तो चुदने के लिए बनी है।
मैं और अनिल साथ में पढ़ते थे और पढ़ाई के बाद उसकी माँ ने मुझे अपनी कंपनी में जॉब दे दी। मैं कुकरेजा फैमिली का बहुत शुक्रगुज़ार हूँ। मेरी माँ यशोदा एक स्कूल टीचर हैं और पिताजी का देहांत हो चुका है। मेरी दीदी पदमा कॉलेज में पढ़ती है और बहुत सेक्सी है। उसका कद 5 फीट 5 इंच है, जिस्म 36-24-36 का है, गोरा रंग और कटीली आँखें। वो टाइट जीन्स और टॉप पहनती है, जिसमें उसकी सेक्सी गांड और चूचियों का उभार साफ दिखता है। भले ही वो मेरी बहन है, लेकिन उसका हुस्न मुझे भी अपनी ओर खींच लेता है।
एक बार वो अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी और दरवाज़ा लॉक करना भूल गई। मैं गलती से अंदर चला गया और उसे बिल्कुल नंगी देख लिया। उसका सांचे में ढला जिस्म – लंबी टाँगें, कसरती जांघें, सपाट पेट और बड़ी-बड़ी चूचियाँ – देखकर मेरा लंड तन गया। उसने झट से हाथों से अपनी चूचियों को ढक लिया, लेकिन तब तक मैं उसका पूरा नंगा बदन देख चुका था। मैं माफी माँगकर बाहर आ गया, पर उसकी वो तस्वीर मेरे दिमाग से नहीं गई।
25 जून को दीदी का बर्थडे था। मैं कुकरेजा फैमिली को इनवाइट करने गया। सबसे पहले अनीला से मिला – वो एक स्लिम, सेक्सी लड़की है, जिसकी चूचियाँ 34 साइज़ की होंगी और गांड बिल्कुल टाइट। उसकी भूरी आँखें और बाल किसी का भी दिल जीत सकते हैं। मुझे भी वो बहुत पसंद थी, पर मैं उनकी बराबरी का नहीं था, तो उसे सिर्फ इज़्ज़त से देखता था। मिस कुकरेजा ने कहा, “बेटा, मैं तो नहीं आ पाऊँगी, पर अनिल और अनीला ज़रूर आएँगे।” बर्थडे पर अनिल पदमा को देखकर फिदा हो गया और अनीला ने उसे अपनी भाभी बनाने की ठान ली।
अनिल ने मुझसे कहा, “आशु, मुझे तेरी बहन बहुत पसंद है। मैं तुझे अपना साला बनाना चाहता हूँ। क्या हुस्न है पदमा का! तू मुझे अपना जीजा बना ले, मैं उसे हर खुशी दूँगा और रानी बनाकर रखूँगा।” मुझे ये रिश्ता पसंद आया। अनिल ईमानदार, सुंदर और अमीर था। माँ भी मान गई और फिर मिस कुकरेजा ने भी हामी भर दी। शादी की तैयारियाँ शुरू हुईं। शॉपिंग के दौरान अनीला मेरे करीब आने लगी – हँसती, पीठ पर हाथ मारती, गले लगती। मुझे लगा वो मेरे साथ चक्कर चलाना चाहती है। ऐसी सेक्सी लड़की के साथ रिलेशन में मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती थी?
शादी हो गई, पर कुछ दिन बाद पदमा घर आई तो उसके चेहरे पर खुशी नहीं थी। मेरे दोस्त ने कहा, “आशु, पदमा दीदी उदास लग रही है। शादी के बाद तो औरत खिल उठती है, पर लगता है अनिल के लंड में कोई कमी है।” उसकी बात से गुस्सा आया, पर मन में शक भी पनप गया। अगले दिन मैं अनिल से मिलने गोदाम गया। वहाँ चौकीदार ने मुझे अंदर जाने दिया। गोदाम खाली था, पर एक कमरे से आवाज़ें आईं – “हह्ह्ह्ह ज़ोर से अकबर भाई, चोदो अपनी रानी को!” ये अनिल की आवाज़ थी। दरवाज़े से झाँका तो अनिल नंगा, घुटनों पर झुका था और अकबर, हमारा ड्राइवर, अपने 7 इंच के मोटे लंड से उसकी गांड मार रहा था।
मैं गुस्से में मिस कुकरेजा के पास गया और बोला, “आंटी, मेरी बहन खुश नहीं। अनिल तो गांडू है, अकबर से चुदवा रहा है।” वो बोलीं, “बेटा, मैंने कहा था न मुझे दोष मत देना। अनिल के पिता भी कमज़ोर थे। मैं इसकी शादी ठीक करूँगी और अनीला भी तो तुझसे शादी करना चाहती है।” उसी रात अनिल ने मुझे बुलाया और बोला, “यार, तुझे मेरा शौक पता चल गया। मेरा लंड कमज़ोर है, पर एक सुझाव है – तू पदमा की चुदाई कर ले। तुझे उसका जिस्म भी मिलेगा, वो माँ बनेगी और मैं बाप कहलाऊँगा। फिर अनीला भी तेरी होगी।”
मैंने कहा, “वो मेरी बहन है, ये कैसे होगा?” वो बोला, “तो क्या उसे गैर से चुदवाएँ? तू कर ले, इज़्ज़त भी बचेगी।” उसने प्लान बनाया कि मनाली में वो पदमा को उत्तेजित करेगा और फिर मैं उसे चोद दूँगा। अगले दिन हम मनाली गए। अनिल ने पदमा को छूकर गर्म किया। रात को वो बोला, “आशु, तू बगल में सो, मैं अपनी बीवी को चोदता हूँ।” पर शराब के कारण उसका लंड खड़ा नहीं हुआ। पदमा गुस्से में चिल्लाई, “अनिल, नपुंसक! ये जलती चूत कहाँ ले जाऊँ?”
अनिल बाहर आया और बोला, “5 मिनट बाद जा, तेरा काम हो जायेगा।” मैं अंदर गया तो पदमा नंगी, चूत में उंगली करती मिली। मैंने उसके जिस्म पर हाथ फेरा। वो बोली, “भैया, यहाँ क्या कर रहे हो?” मैंने उसकी चूचियाँ दबाईं और बोला, “दीदी, तुझे प्यासी कैसे छोड़ूँ? भाई का फ़र्ज़ है तेरी चूत की आग बुझाना।” फिर मैंने अपना 9 इंच का लंड दिखाया। वो झिझकी, पर वासना जीत गई। उसने कहा, “दरवाज़ा खुला छोड़ दो, वो नपुंसक देख ले कि मर्द क्या होता है। चोद दो मुझे भैया!”
मैंने उसे चूमा, उसका जिस्म सहलाया। उसने मेरा लंड चूसा और हम 69 में एक-दूसरे को चाटने लगे। फिर मैंने उसकी चूत में लंड डाला। वो चिल्लाई, “धीरे भैया!” पर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। हम ज़ोर-ज़ोर से चुदाई करने लगे। कमरा फ़च-फ़च की आवाज़ों से गूँज उठा। वो बोली, “चोदो भैया, मुझे अपनी पत्नी बना दो!” चुदाई के बाद वो झड़ गई और संतुष्ट हो गई। अब हम खूब चुदाई करते हैं और मज़े लेते हैं।