स्वीटी भाभी की चुदाई का निमंत्रण-2
आकाश और स्वीटी भाभी की चुदाई की हॉट कहानी का दूसरा भाग। चूत चाटने से लेकर जोरदार चुदाई तक, बेडरूम से बाथरूम तक के मस्त पल। भाभी की प्यास और आकाश के जोश की पूरी डिटेल यहाँ पढ़ें।
कुछ देर तक एक-दूसरे के जिस्म के साथ खेलने के बाद भाभी की नजरें मेरी आँखों में गड़ीं और उन्होंने धीमी, मादक आवाज़ में मुझसे एक गुज़ारिश की। वो बोलीं, “जान, आज तक किसी ने मेरी चूत नहीं चाटी। प्लीज़ तुम मेरी चूत चाट दो, मुझे वो अनोखा मज़ा भी दे दो। तुम्हारे भैया हर बार मुझसे अपना लंड चुसवा लेते हैं और मुझे उसका स्वाद लेना पड़ता है, लेकिन उन्होंने कभी मेरी चूत की तरफ ध्यान नहीं दिया। प्लीज़ अब मुझे और मत तड़पाओ, मेरी चूत चाटो ना।” उनकी बातें सुनकर मेरे अंदर की आग और भड़क गई। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “क्यों नहीं मेरी प्यारी भाभी, आज मैं तुम्हारी चूत को ऐसे चूसूँगा कि तुम ज़िंदगी भर इस पल को याद रखोगी। मैं तुम्हें वो सुख दूँगा जो तुमने पहले कभी नहीं लिया।” फिर मैंने उनके पैरों को और चौड़ा किया, उनकी गुलाबी चूत के होंठों को उंगलियों से खोला और अपनी गर्म जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। जैसे ही मेरी खुरदरी जीभ उनकी चूत के दाने से टकराई, उनके मुँह से जोरदार सिसकियाँ निकलने लगीं। मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत के अंदर-बाहर करना शुरू किया। उनकी चूत से लस्सेदार, गर्म और हल्का नमकीन शहद बहने लगा, जिसे मैंने बड़े चाव से चाटा और पूरा पी लिया। मैं बिना रुके उनकी चूत को जीभ से चोदता रहा, और हर बार मेरी जीभ उनकी चूत की गहराई में जाती, वो मस्ती में डूबती चली गईं।
भाभी अब पूरी तरह मदहोशी में खो चुकी थीं। उनका सिर तकिए पर इधर-उधर पटक रहा था और वो बेकाबू होकर बोल रही थीं, “प्लीज़ ऊऊऊफफ्फ अहह ऊह और करो, तेज़ करो प्लीज़! आहह ऊऊफ्फ ईईई जान, ये तुमने मुझ पर कैसा जादू कर दिया है? आईईईई मेरी चूत में आग सी लग गई है। ऊऊहह आहह मैं मर गई, ऊफ्फ्फ माँ, आज मेरी जान निकल जाएगी। प्लीज़ जल्दी से तेज़-तेज़ करो।” उनकी सिसकियाँ और चीखें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। मैंने उनकी बात मानते हुए अपनी जीभ की रफ्तार बढ़ा दी और उनकी चूत को और जोश के साथ चाटने लगा। आखिर में भाभी का शरीर अकड़ गया और वो पूरी तरह खल्लास हो गईं, यानी वो झड़ चुकी थीं। उनकी चूत से ढेर सारा नमकीन रस निकला, जो मेरे मुँह में आ गया। मैंने उसे एक बूंद भी बर्बाद न करते हुए पूरा पी लिया। जब भाभी थोड़ा होश में आईं, तो उनकी साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। वो उठीं, मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमते हुए बोलीं, “जान, तुमने तो अपना काम पूरा कर दिया। अब देखो मैं तुम्हारे लिए क्या करती हूँ।” उनकी आँखों में शरारत और जोश साफ झलक रहा था।
फिर भाभी नीचे बैठ गईं और मेरे लंड के टोपे पर अपनी नरम जीभ फेरने लगीं। उनकी गर्म जीभ के स्पर्श से मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। कुछ देर टोपे को चाटने के बाद उन्होंने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। दोस्तों, सच कहूँ तो भाभी किसी प्रोफेशनल की तरह लंड चूस रही थीं। वो मेरे लंड को गले तक अंदर लेतीं, फिर धीरे-धीरे बाहर निकालतीं, और इस दौरान उनकी जीभ मेरे लंड के हर हिस्से को चूम रही थी। मैं मज़े और जोश की चरम सीमा पर पहुँच गया था। भाभी ने पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से चूसना शुरू किया। जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो मैंने अपना लंड बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपनी आँखों से इशारा किया और कहा, “अपना वीर्य मेरे मुँह में ही निकाल दो।” मैंने उनकी बात मानते हुए सारा वीर्य उनके हलक में डाल दिया। वो एक बूंद भी बर्बाद किए बिना सब पी गईं और फिर से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। उनकी इस हरकत से थोड़ी ही देर में मेरा लंड दोबारा तनकर खड़ा हो गया, जैसे पहले से भी ज़्यादा जोश में आ गया हो।
अब भाभी ने शरारती अंदाज़ में कहा, “चलो शुरू हो जाओ, असली मज़ा तो अब आएगा।” वो बेड पर सीधे लेट गईं और अपने दोनों पैर ऊपर उठा दिए, जिससे उनकी चूत पूरी तरह खुलकर मेरे सामने आ गई। मैं उनके ऊपर लेट गया। भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पर सेट किया। मैंने एक धीमा धक्का मारा और मेरा लंड उनकी गीली और गर्म चूत में आसानी से पूरा अंदर चला गया। पहले मैंने धीरे-धीरे धक्के मारे, ताकि उन्हें मेरे लंड की आदत हो जाए, फिर धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब मैं जोरदार धक्कों से भाभी को चोद रहा था। हर धक्के के साथ उनका पूरा शरीर हिल रहा था। भाभी भी मेरे लंड से चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थीं और बोल रही थीं, “आआहह ऊऊह ऊऊफफ्फ हाँ और तेज़, जल्दी प्लीज़, तेज़ ऊफफ्फ ऊऊहह।” उनके बूब्स मेरे हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे हिल रहे थे, जो बेहद हसीन और उत्तेजक नज़ारा था। मैं उनके बूब्स को देखते हुए और जोश में आ गया।
थोड़ी देर बाद मैंने भाभी से कहा, “अब घोड़ी बन जाओ।” वो फटाक से पलटीं और घोड़ी बन गईं। उनकी चौड़ी, गोरी गांड ऊपर उठ गई और उनके रसीले बूब्स आम की तरह लटकने लगे। मैंने उनकी चिकनी गांड पर अपने हाथ फेरा, उसे हल्के से थपथपाया और फिर अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। उनके लटकते बूब्स को दोनों हाथों से पकड़कर मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उनकी गांड मेरे जांघों से टकरा रही थी और ‘थप-थप’ की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी। भाभी भी चुदाई में मेरा पूरा साथ दे रही थीं और अपनी कमर को आगे-पीछे हिला रही थीं। बहुत देर तक इस पोजीशन में चुदाई करने के बाद भाभी ठंडी पड़ गईं, यानी वो फिर से झड़ चुकी थीं। मैं भी अपने आखिरी दौर में था। मैंने हाँफते हुए कहा, “भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ, वीर्य कहाँ निकालूँ?” उन्होंने सिसकते हुए कहा, “कोई बात नहीं, मेरे अंदर ही निकाल दो।” फिर मेरे लंड से वीर्य का फव्वारा छूटा और भाभी की चूत मेरे गर्म वीर्य से भर गई। मैं थककर उनके ऊपर ही लेट गया, हम दोनों की साँसें तेजी से चल रही थीं।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला, जो मेरे वीर्य और भाभी के रस से सना हुआ था। भाभी ने फिर से मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और उसे चाटकर पूरी तरह साफ कर दिया। इसके बाद हम दोनों बाथरूम में गए और साथ में नहाने लगे। नहाते हुए भी मेरा जोश कम नहीं हुआ। मैंने भाभी को दीवार से सटाकर खड़ा किया और पानी की फुहारों के बीच उनकी चूत में लंड डालकर फिर से चोदना शुरू कर दिया। पानी के साथ उनकी चूत की गर्मी और सनसनाहट मुझे और उत्तेजित कर रही थी। नहाने और एक और बार चुदाई के बाद हम बाहर आए और कपड़े पहन लिए। कपड़े पहनते हुए मैंने भाभी से मजाक में पूछा, “भाभी, आपको और किस-किस ने चोदा है?” उन्होंने हँसते हुए बताया कि शादी से पहले वो अनचुदी थीं। शादी के बाद उनके भैया ने उनकी चुदाई की, लेकिन वो कुछ मिनट में ही थक जाते थे और उन्हें कभी पूरी संतुष्टि नहीं मिली। फिर उन्होंने शरमाते हुए कहा, “शादी से पहले सिर्फ मेरी एक सहेली के साथ कुछ मज़े किए थे, लेकिन वो लड़कियों वाली बात थी। तुमने जो मज़ा आज दिया, वो मुझे कभी नहीं मिला। तुमने मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर दिया, मेरा जिस्म और मन दोनों तुमसे भर गए।”
अब मेरा टाइम हो चुका था। उनकी तारीफ सुनकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया। मैंने उनसे जाने की इजाज़त माँगी। भाभी की आँखों में आंसू आ गए और वो बोलीं, “तुमने मुझे आज जो सुख और मज़ा दिया, उसे मैं कभी नहीं भूलूँगी। मेरी ज़िंदगी में पहली बार मुझे ऐसा लगा कि कोई मुझसे सच में प्यार करता है।” वो मुझसे लिपट गईं और मुझे कसकर गले लगाया। थोड़ी देर उनकी बाहों में रहने के बाद मैंने अपने कपड़े ठीक किए, उन्हें एक आखिरी बार किस किया और घर के लिए निकल गया। रास्ते भर मैं उनकी चुदाई के बारे में सोचता रहा। उनका गोरा जिस्म, उनकी सिसकियाँ, और वो प्यार भरा लम्हा मेरे दिमाग में बार-बार घूम रहा था। सच में, स्वीटी भाभी के साथ बिताया वो दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे यादगार दिन बन गया।