पड़ोसन भाभी की प्यासी चूत

Padosan bhabhi ki pyaasi chut

हेलो दोस्तो, मेरा नाम अक्की है (बदला हुआ नाम)।

मेरी उम्र इक्कीस साल है।

ये कहानी तब की है जब मैं सत्रह साल का था। मेरी हाइट पाँच फीट ग्यारह इंच है और मेरा लंड छह इंच लंबा है।

कहानी आज से तीन साल पहले की है।

मैं एम बी ए कर रहा था और मैंने कमरा किराए पर ले रखा था।

वहाँ एक पति-पत्नी भी रहते थे।

पति की उम्र उसकी पत्नी से काफ़ी ज़्यादा थी।

वो बीस की थी और उसका पति तीस का।

वो मुझे बहुत सेक्सी लगती थी।

एक दिन मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ाई कर रहा था और वो बाहर झाड़ू लगा रही थी।

मैं खिड़की में से झाँक कर उसकी चुचियाँ देख रहा था।

उस दिन घर में कोई नहीं था।

मैंने मौके का फ़ायदा उठाया और उस से बात कर ली।

मैने कहा – आप मुझे बहुत अच्छे लगते हो।

उसने मुझे कहा कि तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो।

मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

फिर हम बातें करने लग गये।

उसका पति सुबह काम पर चला जाता और शाम को आता था।

उसी दिन शाम को मैंने उसे अपने कमरे में बुला लिया।

वो मेरे पास बिस्तर पर बैठ गई।

उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए।

वो मेरा पहला एहसास था जब मैंने किसी लड़की को चूमा था।

उसके जिस्म की खुशबू बहुत अच्छी थी।

उसके मम्मे बहुत बड़े-बड़े थे।

चौंतीस के थे और मेरे हाथ मे पूरे नहीं आते थे।

मैंने उसकी कमीज़ के ऊपर से ही उसके मम्मे दबाए।

उस दिन बस इतना ही हो पाया और वो अपने कमरे मे चली गई।

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एक दिन दोपहर को उसका पति आया और कहता है कि वो कहीं बाहर जा रहा है, रात को लेट आएगा।

किस्मत से हमारे मकान मालिक भी उस दिन शादी में गये हुए थे, घर पर बस हम अकेले थे।

मैं उसके कमरे में गया और कमरे को बंद कर दिया।

वो खाना खा रही थी। फिर हम दोनों ने साथ खाना खाया और बातें करने लगे।

वो लेट गयी और मैं भी उसके साथ लेट गया। मैंने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए।

मैं उसके गाल और गले पर चूम रहा था।

वो धीरे-धीरे गर्म होने लग गई थी।

फिर उसने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया।

उसकी टांगों में जगह बना कर उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा और कमीज़ के ऊपर से मम्मे निकाल कर उन्हें चूसने लगा।

मुझे सेक्स के बारे में ज़्यादा जानकारी नही थी।

मैंने ब्लू फिल्म देखी थी, वैसा ही कर रहा था।

मेरा लंड पूरी तरह गीला हो चुका था।

उसने गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था।

मैंने उसके ऊपर लेटे-लेटे ही सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार नीचे सरका दी।

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क्या चिकनी टांगें थी उसकी, देख कर दिल खुश हो गया।

फिर मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी और उससे कहा – उठो, कुर्ता उतारने दो।

वो मना करने लगी पर थोड़ी देर बाद मान गई और मैंने उसकी कमीज़ उतार दी।

थोड़ी देर ब्रा के ऊपर से मम्मे दबाने के बाद मैंने ब्रा भी खोल दी और मम्मे मुँह में ले कर चूसने लगा।

बहुत मज़ा आ रहा था, बेहद ही नरम मम्मे थे।

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मैंने उसके मम्मों के ऊपर काट भी लिया वो आ आ.. करती जब मैं दाँत मरता। फिर उसने मुझे कहा कि अपने कपड़े उतार दो।

मैंने कपड़े उतार दिए और चड्डी में उसके ऊपर चढ़ गया।

मेरे लंड ने पानी छोड़ा था तो चड्डी गीली हो गयी थी।

उसने मेरी चड्डी में हाथ ड़ाल कर मेरे लंड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।

दो मिनट के बाद ही मैंने उसका हाथ अपने माल से भर दिया।

मेरे लंड ने उसके हाथ मे पिचकारियाँ छोड़ दी क्यूंकि वो मेरा पहली बार था।

उसने वॉशरूम में जा कर हाथ धोए और साथ लेट गई।

मैं फिर उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी पैंटी में हाथ ड़ाल कर चूत को महसूस करने लगा।

मैंने पैंटी उतार दी।

उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, बहुत नरम चूत थी उसकी।

मैंने उसकी चूत को चूम लिया बहुत मजा आया।

क्या खुशबू थी उसकी।

मैंने उंगली से चूत चौड़ी की और छेद को देखने लगा।

चूत लाल थी और गीली हुई पड़ी थी।

मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरी और उसने मेरे सिर पर हाथ रख के मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया।

मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैं बहुत देर उसके छेद को चूसता रहा।

फिर वो मेरे ऊपर आ गयी और मुझे चूमने लगी।

उसने मेरा लंड हाथ मे पकड़ा और लंड के टोपे नीचे-ऊपर कर के उस पर अपनी जीभ फिराने लगी।

मैंने कहा – मुँह में ड़ाल लो तो उसने माना कर दिया। थोड़ी देर वो मेरे टट्टो के साथ खेलती रही फिर वो बोली – अब रुका नहीं जा रहा पर मैंने उसकी बात नहीं मानी।

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मैंने उसकी टांगों के बीच आकर चूत में उंगली घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा।

थोड़ी देर बाद वो चूतड़ उठाने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से चूत मे घुसने लगी।

मैंने अपनी उंगली निकाल ली और लंड चूत के छेद पर टीका दिया।

मैंने टोपा चूत में घुसा दिया।

अब वो लंड लेने क लिए पागल हुई पड़ी थी।

मैंने थोड़ा सा और धक्का लगाया, चूत गीली होने की वजह से लंड आराम से अंदर चला गया।

फिर उसने कमर उठा कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और पूरा लंड उसकी चूत मे घुस गया।

उसने कुछ सेकेंड मुझे ऐसे ही जकड़े रखा।

फिर मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए साथ-साथ मैं उसके मम्मे दबा रहा था और होंठ चूस रहा था।

बहुत देर तक मैं उसे चोदता रहा।

अचानक उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और कहने लगी – और ज़ोर से डाल और ज़ोर से।

मैं भी जोश-जोश में ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।

उसने मुझे अपनी टांगों और बाहों में जकड लिया उसकी इस हरकत से मैं भी नहीं रुक पाया और उसकी चूत मे ही मैंने अपने माल की पिचकारियाँ छोड़ दी। मैं बहुत देर ऐसे ही उसके ऊपर लेटा रहा फिर उसके बाद मैं अपने कमरे में जाकर सो गया।

शाम को जब आँख खुली तो देखा मकान मलिक आ गये हैं और सोनिया उनके साथ बैठी बातें कर रही है।

अपनी राय मुझे जरूर बताइयेगा –

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